Wednesday, 12 August 2026

बीसलपुर से टोरडी सागर नहर योजना पर किसानों का विरोध, बाजार मूल्य के अनुसार मुआवजा और भूमि के बदले भूमि की मांग


बीसलपुर से टोरडी सागर नहर योजना पर किसानों का विरोध, बाजार मूल्य के अनुसार मुआवजा और भूमि के बदले भूमि की मांग

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टोडारायसिंह एसडीएम कार्यालय पर प्रदर्शन, किसानों ने पाइपलाइन से पानी पहुंचाने के विकल्प का तकनीकी परीक्षण कराने की मांग की

टोंक। बीसलपुर बनास नदी से टोरडी सागर बांध में नहर के माध्यम से पानी पहुंचाने की प्रस्तावित योजना को लेकर टोडारायसिंह क्षेत्र के किसानों ने विरोध जताया है। किसानों का कहना है कि नहर निर्माण और संबंधित कार्यों से उनकी उपजाऊ कृषि भूमि प्रभावित होगी, जिससे उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा। किसानों ने एसडीएम कार्यालय टोडारायसिंह पहुंचकर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

किसानों ने मांग की कि परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण से पहले प्रत्येक प्रभावित किसान की जमीन और उस पर पड़ने वाले प्रभाव का विस्तृत सर्वे कराया जाए। साथ ही किसानों को केवल डीएलसी दर के आधार पर नहीं, बल्कि वर्तमान बाजार मूल्य और लागू भूमि अधिग्रहण नियमों के अनुसार उचित एवं पर्याप्त मुआवजा दिया जाए।

‘कृषि भूमि ही आजीविका का मुख्य साधन’

किसानों ने ज्ञापन में कहा कि उनकी कृषि भूमि खेती और परिवार की आजीविका का प्रमुख साधन है। यदि यह भूमि नहर निर्माण में चली जाती है तो प्रभावित परिवारों के सामने रोजगार और आय का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि कृषि भूमि केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि पशुपालन, पशुओं के चारे और स्थानीय पर्यावरणीय संतुलन से भी जुड़ी हुई है। ऐसे में भूमि अधिग्रहण के व्यापक प्रभावों को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाना चाहिए।

डीएलसी दर के बजाय बाजार मूल्य से मुआवजे की मांग

किसानों का कहना है कि फिलहाल भूमि का मुआवजा डीएलसी दर के आधार पर दिए जाने की बात सामने आ रही है, जबकि यह दर मौजूदा बाजार मूल्य से काफी कम है।

उन्होंने मांग की कि भूमि अधिग्रहण की स्थिति में वास्तविक बाजार मूल्य, लागू कानून और अधिग्रहण से होने वाले सभी प्रकार के नुकसान को ध्यान में रखते हुए मुआवजा तय किया जाए।

किसानों ने यह भी कहा कि यदि परियोजना के कारण उनकी शेष भूमि कृषि योग्य नहीं रहती या उसका उपयोग प्रभावित होता है, तो उस नुकसान का भी अलग से उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए।

भूमि के बदले कृषि भूमि देने की मांग

ज्ञापन में किसानों ने मांग की कि यदि उनकी कृषि भूमि परियोजना में ली जाती है तो प्रभावित परिवारों को भूमि के बदले उपयुक्त कृषि भूमि उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे अपनी आजीविका जारी रख सकें।

किसानों का कहना है कि केवल नकद मुआवजा कई परिवारों के भविष्य की आजीविका सुरक्षित करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा।

पाइपलाइन से पानी पहुंचाने का विकल्प सुझाया

किसानों ने नहर निर्माण के स्थान पर वैकल्पिक तकनीकी योजना तैयार करने की भी मांग की है। उन्होंने विशेष रूप से बीसलपुर बांध से पाइपलाइन के माध्यम से टोरडी सागर में पानी पहुंचाने की संभावना का तकनीकी परीक्षण कराने को कहा है।

किसानों का तर्क है कि यदि पाइपलाइन का विकल्प तकनीकी रूप से संभव हो तो इससे बड़ी संख्या में किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि को नहर निर्माण से बचाया जा सकता है।

जनसुनवाई की प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल

किसानों ने आरोप लगाया कि प्रभावित लोगों को पर्याप्त सूचना दिए बिना जनसुनवाई की गई। उन्होंने मांग की कि भूमि संबंधी कोई भी कार्रवाई करने से पहले प्रभावित किसानों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की जाए, उनकी आपत्तियां और सुझाव सुने जाएं तथा सभी बिंदुओं का विधिवत रिकॉर्ड रखा जाए।

किसानों ने कहा कि जब तक उनकी आपत्तियों और वैकल्पिक व्यवस्था पर उचित निर्णय नहीं हो जाता, तब तक उनकी भूमि पर आगे की कार्रवाई नहीं की जाए।

मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

ज्ञापन में मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप कर किसानों की कृषि भूमि और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है। किसानों ने कहा कि या तो पाइपलाइन के माध्यम से टोरडी सागर में पानी पहुंचाने की वैकल्पिक योजना बनाई जाए अथवा भूमि अधिग्रहण की स्थिति में बढ़ा हुआ उचित मुआवजा और भूमि के बदले भूमि उपलब्ध कराई जाए।

ज्ञापन देने वालों में लोकेश, हरिराम, सूरजमल, अशोक, कालूराम, मेवाराम और ओमप्रकाश सैनी सहित अन्य किसान शामिल रहे।

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