Saturday, 08 August 2026

अलवर लिपिक भर्ती-2013 में फर्जीवाड़ा: 302 नियुक्तियां संदिग्ध, 15 दिन में सुनवाई के बाद बर्खास्तगी


अलवर लिपिक भर्ती-2013 में फर्जीवाड़ा: 302 नियुक्तियां संदिग्ध, 15 दिन में सुनवाई के बाद बर्खास्तगी

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अलवर। अलवर जिला परिषद की लिपिक भर्ती-2013 में बड़े स्तर पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। राज्य स्तरीय जांच टीम ने भर्ती के तीन चरणों में नियुक्त 655 लिपिकों में से 302 की नियुक्तियों को संदिग्ध माना है। जांच रिपोर्ट के आधार पर राजस्थान सरकार ने अलवर जिला कलक्टर और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को इन सभी कर्मचारियों की 15 दिन के भीतर सुनवाई कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। संतोषजनक जवाब और वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने की स्थिति में संबंधित कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त करने को कहा गया है।

मामले की जांच राज्य स्तर पर संयुक्त आयुक्त (जांच) अनिल सोनी की ओर से की गई। उनकी ओर से तैयार 73 पृष्ठ की जांच रिपोर्ट शासन सचिव जोगाराम ने अलवर कलक्टर आर्तिका शुक्ला और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सालुखे गौरव रविंद्र को कार्रवाई के लिए भेजी है। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि जांच के दायरे में आए सभी 302 कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने और दस्तावेज प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया जाए। यदि वे जांच रिपोर्ट में लगाए गए आक्षेपों का संतोषजनक निराकरण नहीं कर पाते हैं तो विभागीय प्रक्रिया पूरी करते हुए 15 दिन में सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जाए।

जांच में केवल कर्मचारियों की नियुक्ति ही सवालों के घेरे में नहीं आई है, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में शामिल रहे 200 से अधिक अधिकारियों और कार्मिकों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। सरकार ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ तीन सप्ताह के भीतर नियमानुसार कार्रवाई कर इसकी रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा 18 कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने की भी सिफारिश की गई है।

अलवर जिला परिषद की ओर से वर्ष 2013 में लिपिक भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके बाद भर्ती का अगला चरण वर्ष 2017 और फिर वर्ष 2022 में पूरा हुआ। इन तीनों चरणों में कुल 655 लिपिकों की नियुक्ति की गई थी। अब जांच रिपोर्ट में इनमें से करीब आधी नियुक्तियों पर गंभीर सवाल खड़े होने से पूरी भर्ती प्रक्रिया जांच के घेरे में आ गई है।

जांच में सामने आई प्रमुख अनियमितताओं में अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का उचित सत्यापन नहीं कराया जाना शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार भर्ती के दौरान प्रस्तुत कंप्यूटर प्रमाण पत्र और अनुभव प्रमाण पत्रों की प्रामाणिकता की समुचित जांच नहीं की गई। जांच में यह भी सामने आया कि कथित रूप से एक गिरोह प्रदेश में सक्रिय था, जो जाली कंप्यूटर प्रमाण पत्र और फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र तैयार करता था। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर कुछ अभ्यर्थियों के नियुक्ति पाने की आशंका जताई गई है।

सरकार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक मामले की व्यक्तिगत रूप से सुनवाई की जाए और उपलब्ध दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाए। जांच रिपोर्ट में लगाए गए आरोप प्रमाणित होने तथा कर्मचारी की ओर से संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलने पर विभागीय नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए।

इस जांच के बाद अब वर्ष 2013 से लेकर 2022 तक चली लिपिक भर्ती प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड, प्रमाण पत्रों के सत्यापन और चयन प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की भूमिका की भी विस्तृत समीक्षा होने की संभावना है। सरकार की ओर से तय समय सीमा में कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बाद जिला प्रशासन और जिला परिषद स्तर पर प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।

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