Saturday, 08 August 2026

यूपीआई यूजर्स के लिए रहेगा पूरी तरह निःशुल्क, रोजमर्रा के लेन-देन पर नहीं लगेगा कोई शुल्क: केंद्र सरकार


यूपीआई यूजर्स के लिए रहेगा पूरी तरह निःशुल्क, रोजमर्रा के लेन-देन पर नहीं लगेगा कोई शुल्क: केंद्र सरकार

ख़बर सुनिए:

0:00
0:00
Audio thumbnail

व्यापारियों के भी अधिकांश यूपीआई लेन-देन रहेंगे निःशुल्क, भविष्य में एमडीआर लगा तो निश्चित सीमा से अधिक चुनिंदा व्यापारी ट्रांजेक्शन पर ही होगा लागू

नई दिल्ली। यूपीआई लेन-देन पर शुल्क लगाए जाने की चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम यूजर्स के लिए यूपीआई निःशुल्क रहेगा। भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं से किसी प्रकार का लेन-देन शुल्क नहीं लिया जाएगा और सभी पर्सन-टू-पर्सन (पी2पी) लेन-देन भी निःशुल्क बने रहेंगे। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि व्यापारियों के लिए भी अधिकांश यूपीआई लेन-देन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।

सरकार की ओर से कहा गया है कि भविष्य में यदि मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लागू किया जाता है तो यह सभी व्यापारी लेन-देन पर समान रूप से लागू नहीं होगा। इसे केवल निश्चित सीमा से अधिक के सीमित संख्या में व्यापारी लेन-देन पर मामूली दर से लागू किया जा सकेगा। यह दर डेबिट या क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले एमडीआर की तुलना में काफी कम होगी।

आम लोगों के दैनिक यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यूपीआई के जरिए भुगतान करने वाले नागरिकों को ट्रांजेक्शन फीस नहीं देनी होगी। व्यक्ति से व्यक्ति यानी पी2पी लेन-देन भी पूरी तरह निःशुल्क रहेंगे। इसका मतलब है कि आम नागरिकों के रोजमर्रा के यूपीआई भुगतान पर किसी तरह का शुल्क लगाने की बात नहीं है।

व्यापारियों के मामले में भी अधिकांश लेन-देन निःशुल्क रहेंगे। सरकार के मुताबिक, भविष्य में एमडीआर लागू होने की स्थिति में इसे सीमा आधारित रखा जाएगा और केवल कुछ चुनिंदा व्यापारी लेन-देन इसके दायरे में आएंगे।

एमडीआर पर फैसला करेगी एनपीसीआई की अध्यक्षता वाली समिति

संसद की ओर से कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित होने के बाद भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10ए में संशोधन प्रस्तावित है।

इसके बाद एमडीआर लागू किया जाना है या नहीं और लागू होने की स्थिति में उसकी व्यवस्था क्या होगी, इस पर एनपीसीआई की अध्यक्षता वाली 'यूपीआई और सेवा संचालन समिति' निर्णय लेगी।

पीएसएस अधिनियम में संशोधन को लेकर सरकार ने दूर किया भ्रम

भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन को लेकर सामने आई आशंकाओं पर सरकार ने कहा कि इसे आम यूपीआई यूजर्स पर शुल्क लगाने की कोशिश के रूप में देखना गलत है।

सरकार के अनुसार, संशोधन का उद्देश्य यूपीआई की दीर्घकालिक स्थिरता, तकनीकी प्रगति और उभरते जोखिमों के प्रति इसकी क्षमता को मजबूत करना है। तेजी से बढ़ रहे यूपीआई लेन-देन के कारण साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी की रोकथाम और तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार अपग्रेड करने की जरूरत है।

सरकार का कहना है कि यूपीआई इकोसिस्टम में अधिक कंपनियों की भागीदारी और प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने के लिए आत्मनिर्भर राजस्व मॉडल भी जरूरी है। यूपीआई के अगले चरण के विकास के लिए केवल सब्सिडी पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित व्यवस्था तैयार करने की आवश्यकता है।

बाहरी दबाव में नीतिगत बदलाव की खबरों को बताया निराधार

सरकार ने उन रिपोर्टों को भी खारिज किया है, जिनमें यूपीआई से जुड़ी नीति में बदलाव के पीछे बाहरी प्रभाव होने का दावा किया गया था। सरकार ने ऐसे दावों को निराधार, गलत और भ्रामक बताया है।

केंद्र ने कहा कि यूपीआई भारत का अपना डिजिटल नवाचार है और सरकार इसे नागरिकों के लिए निःशुल्क बनाए रखने के साथ आने वाले दशकों के लिए इसकी स्थिरता सुनिश्चित करने को प्रतिबद्ध है।

जुलाई में यूपीआई से ₹29.9 लाख करोड़ के 2,366 करोड़ ट्रांजेक्शन

सरकार के अनुसार, वर्ष 2016-17 में शुरुआत के बाद यूपीआई भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुका है। जुलाई 2026 में ही यूपीआई के जरिए 2,366 करोड़ लेन-देन हुए, जिनकी कुल राशि करीब ₹29.9 लाख करोड़ रही।

यूपीआई का विस्तार अब भारत की सीमाओं से बाहर भी हो रहा है। सरकार के मुताबिक, यूपीआई वर्तमान में 11 विदेशी देशों में सक्रिय है और कई अन्य देशों ने भी इसमें रुचि दिखाई है।

सरकार ने नागरिकों से यूपीआई से संबंधित शुल्क या नीतिगत बदलावों की जानकारी के लिए केवल वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक और एनपीसीआई की आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने तथा असत्यापित जानकारी को आगे नहीं बढ़ाने की अपील की है।

    Previous
    Next

    Related Posts