Thursday, 06 August 2026

तीन साल के प्रशिक्षण को नियमित सेवा में जोड़ने की मांग, विद्युत कर्मचारियों ने उपमुख्यमंत्री बैरवा को सौंपा ज्ञापन


तीन साल के प्रशिक्षण को नियमित सेवा में जोड़ने की मांग, विद्युत कर्मचारियों ने उपमुख्यमंत्री बैरवा को सौंपा ज्ञापन

ख़बर सुनिए:

0:00
0:00
Audio thumbnail

सूरतगढ़ थर्मल में प्रतिनिधिमंडल ने उठाया हजारों तकनीकी कर्मचारियों का मुद्दा, वरिष्ठता, वेतन, पदोन्नति और पेंशन लाभों के पुनर्निर्धारण की मांग

सूरतगढ़। राजस्थान विद्युत निगमों में विभिन्न वर्षों में भर्ती हुए हजारों तकनीकी कर्मचारियों के तीन वर्षीय आईटीआई प्रशिक्षण काल को नियमित सेवा में शामिल करने की मांग एक बार फिर उठी है। डॉ. अंबेडकर अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण समिति, एसटीपीएस सूरतगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा को इस संबंध में विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

प्रतिनिधिमंडल ने समिति अध्यक्ष बलीराम मेघवाल के नेतृत्व में सूरतगढ़ थर्मल पावर स्टेशन कॉलोनी में उपमुख्यमंत्री से मुलाकात की। समिति ने मांग की कि वर्ष 1993-94, 1997-98, 2002-03 और 2005-06 में भर्ती तकनीकी कर्मचारियों के तीन वर्षीय प्रशिक्षण काल को अर्हकारी सेवा माना जाए।

पांचों विद्युत निगमों के कर्मचारी प्रभावित

ज्ञापन के अनुसार राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम, राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम तथा जयपुर, अजमेर और जोधपुर विद्युत वितरण निगमों में भर्ती तकनीकी कर्मचारियों को नियुक्ति के बाद तीन वर्ष तक आईटीआई ट्रेनी के रूप में काम करना पड़ा।

समिति का दावा है कि इस अवधि में कर्मचारियों से उत्पादन, संचालन, अनुरक्षण और अन्य तकनीकी कार्य नियमित कर्मचारियों की तरह कराए गए, लेकिन प्रशिक्षण अवधि को अब तक सेवा लाभों में शामिल नहीं किया गया।

वरिष्ठता और पेंशन पर पड़ा असर

समिति ने कहा कि प्रशिक्षण अवधि को सेवा में नहीं जोड़ने से कर्मचारियों की वरिष्ठता, वेतन निर्धारण, वार्षिक वेतनवृद्धि, चयन वेतनमान, पदोन्नति और पेंशन लाभ प्रभावित हुए हैं।

ज्ञापन में इस अवधि को जोड़ते हुए सभी सेवा लाभों का पुनर्निर्धारण करने और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी पूर्व प्रभाव से इसका लाभ देने की मांग की गई।

भर्ती शर्तों में उल्लेख नहीं होने का दावा

संगठन ने कहा कि भर्ती विज्ञापनों और साक्षात्कार पत्रों में प्रशिक्षण अवधि को नियमित सेवा से बाहर रखने का उल्लेख नहीं था। समिति का आरोप है कि बाद में नियुक्ति आदेशों में ‘प्योरली टेम्परेरी एंड एडहॉक’ जैसे शब्द जोड़े गए।

प्रतिनिधिमंडल ने तर्क दिया कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कर्मचारियों के प्रतिकूल नई सेवा शर्तें लागू करना न्यायोचित नहीं है।

वर्ष 2006 के बाद बदली भर्ती व्यवस्था

ज्ञापन में कहा गया कि वर्ष 2006 के बाद तकनीकी कर्मचारियों की भर्ती में तीन वर्षीय प्रशिक्षण व्यवस्था समाप्त कर दो वर्ष का प्रोबेशन लागू किया गया। इस व्यवस्था में नियुक्ति की तारीख से नियमित सेवा और वेतनमान का लाभ दिया जाने लगा।

समिति ने समान योग्यता, कार्य और जिम्मेदारी के बावजूद केवल भर्ती वर्ष के आधार पर अलग-अलग सेवा शर्तें लागू करने को समानता के सिद्धांत के विपरीत बताया।

सीपीएफ कटौती और एसीआर का दिया हवाला

समिति ने दावा किया कि प्रशिक्षण अवधि के दौरान कर्मचारियों के स्टाइपेंड से सीपीएफ की नियमित कटौती हुई और नियोक्ता अंशदान भी जमा कराया गया। यही सीपीएफ खाता नियमित सेवा में आगे जारी रहा।

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि इस अवधि में कर्मचारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट तैयार की गई और उन्हें आवास अथवा एचआरए, अवकाश, परिवहन, उत्पादन प्रोत्साहन तथा विशेष उत्पादकता पुरस्कार जैसी सुविधाएं दी गईं।

बिना नई चयन प्रक्रिया के तकनीशियन पद पर नियुक्ति

समिति के अनुसार प्रशिक्षण पूरा होने के बाद कर्मचारियों को किसी नई चयन प्रक्रिया के बिना तकनीशियन ग्रेड-द्वितीय और ग्रेड-तृतीय पदों पर नियुक्त किया गया।

संगठन ने इसे प्रशिक्षण और नियमित सेवा के बीच निरंतरता का आधार बताते हुए कहा कि सेवा में कोई वास्तविक अवरोध नहीं था।

न्यायिक फैसलों का दिया हवाला

ज्ञापन में ‘सब्सटेंस ओवर फॉर्म’ के सिद्धांत के साथ सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों के फैसलों का उल्लेख किया गया।

समिति ने प्रेम सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, डायरेक्ट रिक्रूट क्लास-द्वितीय इंजीनियरिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि सेवा की वास्तविक प्रकृति केवल पदनाम से नहीं, बल्कि नियुक्ति प्रक्रिया, कार्य और सेवा निरंतरता से तय होनी चाहिए।

इन न्यायिक संदर्भों की अंतिम लागू स्थिति संबंधित सेवा नियमों और सक्षम न्यायिक अथवा प्रशासनिक परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।

सभी निगमों के लिए समान नीति की मांग

प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री से सभी विद्युत निगमों के लिए एक समान नीति जारी करने की मांग की। समिति ने कहा कि यह मामला करीब तीन दशकों से लंबित है और कई बार ज्ञापन देने के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ।

उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर ज्ञापन प्राप्त किया। इस अवसर पर राजकुमार भाटिया, अमरजीत सोलंकी, लेखराज बीरट, जगदीश चोपड़ा, रोहतास करेला और जगत प्रसाद सहित समिति के अन्य सदस्य मौजूद रहे।

    Previous
    Next

    Related Posts