



सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित समिति अधिकारियों, पर्यावरणविदों, खनन प्रतिनिधियों और ग्रामीणों से होगा संवाद
जयपुर। अरावली क्षेत्र की पारिस्थितिकी, भूगर्भीय संरचना, जल विज्ञान, जैव विविधता, खनन, भूमि उपयोग और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का अध्ययन करने के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति 7 से 10 अगस्त तक राजस्थान के चयनित जिलों का दौरा करेगी।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर अरावली को परिभाषित करने के संबंध में भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद के महानिदेशक की अध्यक्षता में यह समिति गठित की गई है। समिति फील्ड विजिट के दौरान अरावली क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का अध्ययन करेगी और विभिन्न हितधारकों से संवाद कर जानकारी जुटाएगी।
समिति के दौरे के लिए राज्य सरकार ने खान विभाग के निदेशक महावीर प्रसाद मीणा को नोडल अधिकारी और अतिरिक्त निदेशक खान बी.एस. सोढ़ा को सहायक नोडल अधिकारी बनाया है।
वन विभाग की ओर से अतिरिक्त मुख्य वन संरक्षक टी.जे. कविथा को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। ये अधिकारी समिति और जिला प्रशासन के बीच समन्वय सुनिश्चित करेंगे।
समिति 7 अगस्त को कोटपूतली, नीमकाथाना और सरिस्का क्षेत्र का फील्ड विजिट करेगी। इस दौरान अरावली क्षेत्र में खनन, वन क्षेत्र, जल स्रोत, भूमि उपयोग और स्थानीय पर्यावरणीय परिस्थितियों का अध्ययन किया जाएगा।
उसी दिन सरिस्का-अलवर क्षेत्र में जिला प्रशासन, खान एवं वन विभाग के अधिकारियों और अन्य हितधारकों के साथ संवाद भी प्रस्तावित है।
समिति 8 अगस्त को जयपुर के साथ किशनगढ़ और अजमेर क्षेत्र का दौरा करेगी। अजमेर में अधिकारियों, खान पट्टाधारकों, पर्यावरणविदों, स्वयंसेवी संस्थाओं और खनन क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ बैठक की जाएगी।
समिति स्थानीय स्तर पर खनन गतिविधियों, पर्यावरण संरक्षण, जल संसाधनों और भूमि उपयोग में आए बदलावों से संबंधित तथ्य जुटाएगी।
समिति 9 अगस्त को राजसमंद और उदयपुर क्षेत्र का फील्ड दौरा करेगी। इसके बाद 10 अगस्त को उदयपुर में विभिन्न हितधारकों से विस्तृत संवाद होगा।
इन बैठकों में जिला कलेक्टर, खान एवं वन विभाग के अधिकारी, खनन पट्टाधारक, खनन एसोसिएशनों के प्रतिनिधि, श्रमिक, पर्यावरण विशेषज्ञ, सामाजिक संस्थाएं, स्थानीय ग्रामीण और किसान भाग लेंगे।
समिति केवल सरकारी रिकॉर्ड का अध्ययन नहीं करेगी, बल्कि अरावली क्षेत्र से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े लोगों से भी जानकारी लेगी।
खनन श्रमिकों, किसानों, स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण विशेषज्ञों से यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि खनन, भूजल दोहन, भूमि उपयोग परिवर्तन और पर्यावरणीय बदलावों का उनके जीवन तथा आजीविका पर क्या प्रभाव पड़ा है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस अपर्णा अरोरा ने बुधवार को सचिवालय में खान और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर समिति के दौरे की तैयारियों की समीक्षा की।
उन्होंने संबंधित जिलों और क्षेत्रीय अधिकारियों को आवश्यक दस्तावेज, आंकड़े और अन्य सूचनाएं तैयार रखने के निर्देश दिए। जिला कलेक्टरों से भी समिति के दौरे और जनसंवाद कार्यक्रमों में समन्वय बनाए रखने को कहा गया।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि समिति को अरावली संरक्षण के लिए खान विभाग, वन विभाग और खान पट्टाधारकों द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी जाए।
समिति पुनर्वनीकरण, खनन क्षेत्र की बहाली, जल संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरण प्रबंधन से जुड़े कार्यों का भी अवलोकन करेगी।
तैयारी बैठक में विशिष्ट सचिव खान नम्रता वृष्णि, प्रधान मुख्य वन संरक्षक पी.के. उपाध्याय, अतिरिक्त मुख्य वन संरक्षक टी.जे. कविथा, निदेशक माइंस एम.पी. मीणा और अतिरिक्त निदेशक बी.एस. सोढ़ा सहित विभिन्न वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इसके अलावा महेश माथुर, एडीजी आलोक प्रकाश जैन, ओएसडी श्रीकृष्ण शर्मा, एसजी सुनील कुमार वर्मा, संजय सक्सेना और फील्ड अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।