



राजपत्र अधिसूचना और कोर्ट में दिए शपथपत्र की अनदेखी का आरोप, प्रतिनियुक्त अधिकारियों द्वारा लिए जा रहे खाद्य नमूनों की वैधानिकता पर भी विवाद
जयपुर। राजस्थान में नियमित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्ति के बाद भी प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत अधिकारियों से खाद्य नमूने लेने और अन्य वैधानिक कार्य कराए जाने को लेकर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
आरोप है कि विभाग ने अपनी ही राजपत्र अधिसूचना में तय शर्तों और न्यायालय में प्रस्तुत शपथपत्र का पालन नहीं किया। नियमित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्ति का राजपत्र प्रकाशित होने के बावजूद प्रतिनियुक्त अधिकारियों को उनके मूल विभागों में वापस नहीं भेजा गया है।
मामले से जुड़े पक्ष का कहना है कि प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त खाद्य सुरक्षा अधिकारियों से संबंधित राजपत्र अधिसूचना में स्पष्ट शर्त थी कि नियमित अधिकारियों की नियुक्ति होते ही प्रतिनियुक्ति स्वतः समाप्त मानी जाएगी।
इसके बाद संबंधित अधिकारियों को तुरंत उनके मूल विभागों में वापस भेजा जाना था। आरोप है कि नियमित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्ति के बावजूद यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।
बताया गया है कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने न्यायालय में प्रस्तुत जवाब और शपथपत्र में भी नियमित नियुक्ति के बाद प्रतिनियुक्त अधिकारियों को हटाने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद अधिकारियों को पद पर बनाए रखने को शपथपत्र के विपरीत बताया जा रहा है। इसी आधार पर कुछ पक्ष न्यायालय की अवमानना का सवाल उठा रहे हैं।
हालांकि अवमानना हुई है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालय ही कर सकता है।
विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू प्रतिनियुक्त अधिकारियों द्वारा लिए जा रहे खाद्य नमूनों की कानूनी स्थिति को लेकर है।
सवाल उठाया जा रहा है कि यदि नियमित नियुक्ति के बाद प्रतिनियुक्ति की वैधता समाप्त मानी जानी थी, तो ऐसे अधिकारियों द्वारा की गई सैंपलिंग, निरीक्षण और अन्य कानूनी कार्रवाई कितनी वैध होगी। इसका अंतिम निर्धारण लागू अधिसूचना, नियुक्ति आदेश, सेवा विस्तार संबंधी दस्तावेज और न्यायिक व्याख्या के आधार पर ही होगा।
मामले से जुड़े पक्षों ने सवाल उठाया है कि प्रतिनियुक्त अधिकारियों को पद पर बनाए रखने के पीछे क्या कारण हैं। उनका आरोप है कि विभाग के उच्च अधिकारी राजपत्र की शर्तों के बावजूद प्रतिनियुक्त अधिकारियों को संरक्षण दे रहे हैं।
हालांकि इस आरोप पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
नियमित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों से जुड़े पक्ष ने सरकार और विभाग से राजपत्र की शर्तों तथा न्यायालय में दिए शपथपत्र का अक्षरशः पालन करने की मांग की है।
उन्होंने प्रतिनियुक्त अधिकारियों को तत्काल उनके मूल विभागों में वापस भेजने और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी सैंपलिंग एवं अन्य कार्रवाई केवल विधिवत अधिकृत अधिकारियों से कराने की मांग की।
इस पूरे मामले में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नियमित अधिकारियों की नियुक्ति की प्रभावी तारीख क्या थी, प्रतिनियुक्ति संबंधी अधिसूचना में कौन-सी शर्तें दर्ज थीं और क्या बाद में कोई संशोधित आदेश या विस्तार जारी किया गया।
इन दस्तावेजों और विभाग के आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद ही प्रतिनियुक्त अधिकारियों की वर्तमान स्थिति तथा उनके द्वारा की गई कार्रवाई की वैधानिकता स्पष्ट हो सकेगी।


