



नगर निकाय और पंचायत चुनाव से पहले राजस्थान के राजनीतिक हालात, ओबीसी प्रतिनिधित्व और रिक्त पदों पर नियुक्तियों को लेकर मंथन की संभावना नई दिल्ली। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस दौरान राजस्थान के मौजूदा राजनीतिक हालात, आगामी नगर निकाय एवं पंचायत चुनाव और प्रदेश से जुड़े विभिन्न प्रशासनिक विषयों पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि बैठक में राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग की रिपोर्ट पर विचार-विमर्श हुआ। आयोग ने 5 अगस्त को मुख्यमंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। आयोग की रिपोर्ट में प्रदेश की ओबीसी जातियों के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का आकलन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ जातियों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत अधिक है, जबकि बड़ी संख्या में जातियों को पर्याप्त भागीदारी नहीं मिली है। बताया जा रहा है कि बैठक में कम प्रतिनिधित्व वाली ओबीसी जातियों को स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में किस प्रकार राजनीतिक महत्व दिया जाए, इस पर चर्चा हुई। हालांकि किन जातियों को क्या लाभ दिया जाएगा, इस संबंध में कोई आधिकारिक निर्णय अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। उपलब्ध जानकारी में कहा गया है कि 11 ओबीसी जातियों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व का अधिक लाभ मिला है। इसे संवैधानिक आरक्षण प्राप्त होने के अर्थ में नहीं देखा जाना चाहिए। आयोग की रिपोर्ट में इन जातियों के अपेक्षाकृत अधिक निर्वाचित प्रतिनिधित्व का उल्लेख बताया गया है। स्थानीय निकायों में आरक्षण की अंतिम व्यवस्था सरकार, निर्वाचन प्राधिकार और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार तय होगी। बैठक में राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण के अध्यक्ष और सदस्यों के रिक्त पदों का विषय भी उठाए जाने की चर्चा है। राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में राज्य सरकार को इन पदों पर शीघ्र नियुक्ति करने के निर्देश दिए थे। सरकार को न्यायालय द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करनी है। इस कारण प्रशासनिक स्तर पर इस विषय को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है। नगर निकाय और पंचायत चुनावों से पहले प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियां किए जाने की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। विभिन्न बोर्ड, निगम, आयोग और अन्य संस्थाओं में रिक्त पदों को भरने को लेकर पार्टी और सरकार के स्तर पर मंथन होने की संभावना जताई जा रही है। इन नियुक्तियों के माध्यम से क्षेत्रीय, सामाजिक और संगठनात्मक संतुलन साधने का प्रयास किया जा सकता है। हालांकि सरकार या भाजपा की ओर से अभी कोई आधिकारिक सूची या समयसीमा जारी नहीं की गई है। मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के बीच हुई चर्चा का ठोस परिणाम आगामी दिनों में सामने आ सकता है। ओबीसी आयोग की सिफारिशों, राजनीतिक नियुक्तियों और निकाय-पंचायत चुनावों की रणनीति पर अंतिम फैसला आधिकारिक आदेशों के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल मुलाकात को चुनाव से पहले प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों पर केंद्रीय नेतृत्व के साथ समन्वय की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर चर्चा
‘11 जातियों’ वाले दावे पर आधिकारिक स्पष्टता जरूरी
अपील अधिकरण में नियुक्तियों का मुद्दा
राजनीतिक नियुक्तियों की अटकलें तेज
मुलाकात के परिणाम का इंतजार