



15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षर लोगों को अक्षर ज्ञान के साथ डिजिटल, वित्तीय, कानूनी और स्वास्थ्य संबंधी शिक्षा से जोड़ने पर जोर
बांसवाड़ा। बदलते समय में साक्षरता का अर्थ केवल पढ़ना और लिखना जानना नहीं रह गया है। अब प्रत्येक नागरिक का डिजिटल, वित्तीय, कानूनी, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी विषयों में जागरूक होना भी उतना ही आवश्यक है। इसी उद्देश्य से देशभर में 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के असाक्षर व्यक्तियों के लिए नवभारत साक्षरता अभियान संचालित किया जा रहा है।
राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के मार्गदर्शन में अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसे लोगों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है, जो सामाजिक, आर्थिक अथवा अन्य कारणों से औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर सके।
नवभारत साक्षरता अभियान में पढ़ना, लिखना और सामान्य गणना सिखाने के साथ दैनिक जीवन से जुड़े व्यावहारिक कौशलों पर भी ध्यान दिया जाता है। साक्षर होने के बाद व्यक्ति सरकारी योजनाओं की जानकारी पढ़ सकता है, आवेदन पत्र भर सकता है, बैंकिंग दस्तावेज समझ सकता है और अपने जरूरी कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भरता कम कर सकता है।
अभियान का उद्देश्य लाभार्थियों को केवल अक्षर पहचानने योग्य बनाना नहीं, बल्कि उन्हें निर्णय लेने और अपने अधिकारों का उपयोग करने में सक्षम बनाना है।
ऑनलाइन भुगतान, मोबाइल बैंकिंग, सरकारी पोर्टल और डिजिटल सेवाओं का उपयोग तेजी से बढ़ा है। ऐसे में डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित इस्तेमाल करना प्रत्येक नागरिक के लिए जरूरी हो गया है।
अभियान में लोगों को मोबाइल और डिजिटल सेवाओं के उपयोग के साथ साइबर ठगी से बचने की जानकारी देने पर भी जोर दिया जाता है। इससे लाभार्थी ऑनलाइन लेन-देन और सरकारी डिजिटल सेवाओं का अधिक सुरक्षित तरीके से उपयोग कर सकते हैं।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य जागरूकता को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। लाभार्थियों को स्वच्छता, पोषण, टीकाकरण, रोगों की रोकथाम और समय पर उपचार के महत्व से अवगत कराया जाता है।
स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी व्यक्ति और उसके परिवार को बीमारियों से बचाने तथा बेहतर जीवनशैली अपनाने में मदद कर सकती है।
अभियान के माध्यम से नागरिकों को उनके संवैधानिक, सामाजिक और पारिवारिक दायित्वों की जानकारी भी दी जाती है।
एक साक्षर और जागरूक व्यक्ति अपने अधिकारों को समझने के साथ समाज तथा राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों का जिम्मेदारी से निर्वहन कर सकता है। इससे लोकतांत्रिक भागीदारी और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना मजबूत होती है।
कानूनी और वित्तीय जानकारी को कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा बनाया गया है। लोगों को उपभोक्ता अधिकार, बचत, ऋण, बीमा, बैंकिंग और सरकारी वित्तीय योजनाओं के बारे में जागरूक किया जाता है।
इससे नागरिक वित्तीय निर्णय अधिक समझदारी से ले सकते हैं और ठगी, गलत दस्तावेज या भ्रामक ऋण प्रस्ताव जैसी समस्याओं से बच सकते हैं।
प्राकृतिक आपदा के समय सुरक्षित रहने और सही निर्णय लेने के लिए आपदा प्रबंधन का बुनियादी ज्ञान भी जरूरी है। इसी प्रकार यातायात नियमों की जानकारी सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और सुरक्षित आवागमन में सहायक होती है।
नवभारत साक्षरता अभियान में इन जीवनोपयोगी विषयों को भी शामिल किया गया है, ताकि लाभार्थी व्यावहारिक परिस्थितियों में सही कदम उठा सकें।
उल्लास–नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत राजस्थान में असाक्षर वयस्कों की पहचान के लिए सर्वे अभियान चलाया जा रहा है।
उपलब्ध विवरण के अनुसार प्रदेश के निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले 80 प्रतिशत से अधिक लर्नर्स के चिह्नीकरण का कार्य पूरा हो चुका है। कई जिलों ने निर्धारित लक्ष्य का शत-प्रतिशत सर्वे पूरा कर लिया है, जबकि अन्य जिलों में भी अभियान को गति दी जा रही है।
इस प्रक्रिया में सर्वेयर घर-घर जाकर पात्र लोगों की पहचान करते हैं और उन्हें शिक्षण तथा मूल्यांकन गतिविधियों से जोड़ते हैं।
जनजाति बहुल बांसवाड़ा जिले में जिला कलेक्टर एवं जिला साक्षरता निष्पादन समिति के अध्यक्ष डॉ. इंद्रजीत यादव के निर्देशन में नवभारत साक्षरता अभियान का निर्धारित लक्ष्य पूरा करने का दावा किया गया है।
जिले में पात्र व्यक्तियों की पहचान, सर्वे और साक्षरता संबंधी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। अभियान के अंतर्गत आयोजित मूल्यांकन में भी लर्नर्स की प्रभावी उपस्थिति बताई गई है।
डॉ. इंद्रजीत यादव ने कहा कि नवभारत साक्षरता अभियान वयस्क असाक्षरों को डिजिटल रूप से जागरूक और साक्षर बनाने के साथ उन्हें अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति सजग करने का माध्यम है।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों और साक्षरता प्रतिनिधियों से सभी पात्र लोगों को अभियान से जोड़ने तथा उन्हें जागरूक बनाने का आह्वान किया।
मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी पवन कुमार रावल के अनुसार जिले के विभिन्न ब्लॉकों के लिए लक्ष्य निर्धारित कर सर्वेयरों के माध्यम से सर्वे पूरा कराया गया। मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों, सहयोगियों और साक्षरता प्रतिनिधियों के समन्वय से अभियान की गतिविधियों को समय पर पूरा करने का प्रयास किया गया।
नवभारत साक्षरता अभियान का अंतिम उद्देश्य केवल निरक्षरता कम करना नहीं, बल्कि ऐसे जागरूक, जिम्मेदार और आत्मनिर्भर नागरिक तैयार करना है, जो आधुनिक भारत की सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप जीवन जी सकें।
अक्षर ज्ञान, डिजिटल कौशल, वित्तीय समझ, कानूनी जागरूकता और स्वास्थ्य शिक्षा का समन्वय इस अभियान को पारंपरिक साक्षरता कार्यक्रम से अधिक व्यापक बनाता है।