Monday, 03 August 2026

अंगदान को अभियान नहीं, जन आंदोलन बनाएं: हरिभाऊ बागडे


अंगदान को अभियान नहीं, जन आंदोलन बनाएं: हरिभाऊ बागडे

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आरयूएचएस में अंगदान जागरूकता सेमिनार; खान-पान की आदतें सुधारने और तंबाकू मुक्त समाज बनाने पर भी दिया जोर

जयपुर। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि देश में अंग प्रत्यारोपण की चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद अंगदान करने वालों की संख्या बहुत कम है। उन्होंने आमजन से अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इसे केवल एक दिवस तक सीमित न रखकर जन आंदोलन का रूप देने का आह्वान किया।

राज्यपाल सोमवार को राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कॉलेज में आयोजित अंगदान जागरूकता सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को अंगदान की शपथ भी दिलाई।

‘पुरानी ब्रेड खाते हैं, एक दिन पुरानी रोटी नहीं’

स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश देते हुए राज्यपाल ने खान-पान की बदलती आदतों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लोग घर में एक दिन पहले बनी रोटी खाना पसंद नहीं करते, लेकिन बाजार से पहले से बनी और पैक की गई ब्रेड खरीदकर खा लेते हैं।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के लिए ताजा और पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। खान-पान की गलत आदतें कई बीमारियों का कारण बन सकती हैं, इसलिए लोगों को अपनी जीवनशैली में सुधार करना चाहिए।

अंगदान की कमी पर जताई चिंता

राज्यपाल ने कहा कि भारत में प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में लोग समय पर अंग प्रत्यारोपण नहीं हो पाने के कारण जान गंवा देते हैं। उन्होंने लगभग पांच लाख लोगों की मृत्यु का उल्लेख करते हुए कहा कि अंगदान की कमी इस स्थिति का एक बड़ा कारण है।

उन्होंने कहा कि देश में अंग प्रत्यारोपण की सुविधाएं अच्छी हैं, लेकिन जरूरत के मुकाबले दान किए जाने वाले अंगों की संख्या बेहद कम है। ऐसे में समाज में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है।

अंगदान दिवस को आंदोलन बनाने की अपील

बागडे ने कहा कि अंगदान दिवस मनाना तभी सार्थक होगा, जब इसे व्यवहार में उतारा जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल औपचारिक कार्यक्रम न बनकर निरंतर चलने वाला सामाजिक अभियान होना चाहिए।

उन्होंने शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, सामाजिक संगठनों और युवाओं से अंगदान के प्रति भ्रम दूर करने और लोगों को वैज्ञानिक एवं कानूनी जानकारी उपलब्ध कराने का आह्वान किया।

पहले किडनी प्रत्यारोपण का किया उल्लेख

राज्यपाल ने कहा कि देश में पहला सफल किडनी प्रत्यारोपण दिसंबर 1971 में तमिलनाडु में हुआ था। उन्होंने कहा कि करीब 55 वर्ष पहले अंग प्रत्यारोपण की शुरुआत हो जाने के बावजूद आज भी अंगदान को लेकर पर्याप्त जागरूकता विकसित नहीं हो सकी है।

उन्होंने इस स्थिति को चिंताजनक बताते हुए कहा कि चिकित्सा विज्ञान की प्रगति का लाभ तभी मिल सकता है, जब समाज अंगदान के लिए आगे आए।

तंबाकू मुक्त समाज का संदेश

राज्यपाल ने आमजन से तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों से दूर रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए सही खान-पान, नियमित जीवनशैली और नशामुक्त वातावरण आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि बीमारियों से बचाव के लिए उपचार से पहले रोकथाम पर ध्यान देना चाहिए। परिवार और शिक्षण संस्थान इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

अंगदाताओं को दी श्रद्धांजलि

कार्यक्रम में राज्यपाल ने उन लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने अंगदान कर दूसरों को नया जीवन दिया। उन्होंने अंगदाताओं और उनके परिवारों के योगदान को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।

इस अवसर पर आरयूएचएस के प्रो. प्रमोद येवले और आरयूएचएस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मोहनीश ग्रोवर ने भी अंगदान के महत्व, चिकित्सा प्रक्रिया और सामाजिक सरोकारों पर जानकारी दी।

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