



राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान उठाई मांग; डिजिटल संग्रहालय, पैनोरमा, ओपन एयर थिएटर और फोरलेन सड़क के लिए केंद्र से बजट मांगा
नई दिल्ली। राजस्थान से राज्यसभा सांसद डॉ. अलका गुर्जर ने भगवान देवनारायण की जन्मस्थली मालासेरी डूंगरी से भगवान सवाई भोज मंदिर तक हेरिटेज कॉरिडोर विकसित करने की मांग की है। उन्होंने सोमवार को संसद के शून्यकाल में यह विषय उठाते हुए केंद्र सरकार से परियोजना के लिए आवश्यक बजट उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
डॉ. गुर्जर को राज्यसभा में पहली बार शून्यकाल के दौरान अपनी बात रखने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कॉरिडोर से धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार और ग्रामीण पर्यटन के नए अवसर पैदा हो सकेंगे।
डॉ. अलका गुर्जर ने सवाई भोज के ऐतिहासिक बांध को अमृतसर स्थित श्री हरमंदिर साहिब के पवित्र सरोवर की तर्ज पर विकसित करने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि इस स्थल का योजनाबद्ध विकास होने से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इससे क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं धार्मिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में भी मदद मिलेगी।
राज्यसभा सांसद ने मालासेरी डूंगरी और सवाई भोज मंदिर में राष्ट्रीय स्तर के पैनोरमा स्थापित करने की मांग की। उन्होंने दोनों स्थलों पर डिजिटल संग्रहालय और ओपन एयर थिएटर विकसित करने का भी प्रस्ताव रखा।
उनका कहना था कि इन सुविधाओं के माध्यम से भगवान देवनारायण और सवाई भोज से जुड़े इतिहास, लोक परंपराओं, संस्कृति और जनआस्था को आधुनिक तकनीक के जरिए प्रस्तुत किया जा सकता है।
डॉ. गुर्जर ने दोनों धार्मिक स्थलों के बीच फोरलेन सड़क संपर्क विकसित करने के लिए भी केंद्र सरकार से सहयोग मांगा।
उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क संपर्क से श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही सुगम होगी। इससे आसपास के गांवों, स्थानीय बाजारों और छोटे कारोबारों को भी लाभ मिल सकता है।
सांसद ने कहा कि हेरिटेज कॉरिडोर बनने से होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद, भोजन और पर्यटन सेवाओं से जुड़े रोजगार बढ़ेंगे।
उन्होंने दावा किया कि परियोजना से ग्रामीण पर्यटन को गति मिलेगी और स्थानीय युवाओं को अपने क्षेत्र में ही स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।
डॉ. अलका गुर्जर ने कहा कि मालासेरी डूंगरी और सवाई भोज मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल हैं। इन्हें हेरिटेज कॉरिडोर के रूप में विकसित करने से धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक संरक्षण और क्षेत्रीय विकास को एक साथ बढ़ावा दिया जा सकेगा।
उन्होंने केंद्र सरकार से इस प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करते हुए विस्तृत परियोजना तैयार कराने और आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान करने की मांग की।