



जोधपुरविवेक विहार थाने में दर्ज प्रकरण में 18 पदाधिकारी और ट्रस्टी नामजद, गिरफ्तार आरोपियों को सोमवार को अदालत में पेश किया जाएगा
जोधपुर। जोजरी नदी में कथित रूप से प्रदूषण फैलाने के मामले में पुलिस ने जोधपुर प्रदूषण नियंत्रण एवं अनुसंधान फाउंडेशन से जुड़े पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में संस्था के तत्कालीन प्रबंध निदेशक, कार्यकारी निदेशक, कोषाध्यक्ष, एक ट्रस्टी और सुपरवाइजर शामिल हैं।
विवेक विहार पुलिस थाने में करीब दो महीने पहले दर्ज इस प्रकरण में कुल 18 पदाधिकारियों और न्यासियों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस के अनुसार मामले की जांच जारी है और आगे अन्य लोगों की गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
मामले की जांच कर रहे अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त पूर्व नरेंद्र सिंह देवड़ा ने बताया कि जोधपुर प्रदूषण नियंत्रण एवं अनुसंधान फाउंडेशन, जिसे जेपीसीआरएफ अथवा सीईटीपी ट्रस्ट के नाम से भी जाना जाता है, के तत्कालीन प्रबंध निदेशक जसराज बोथरा को गिरफ्तार किया गया है।
इसके अलावा कार्यकारी निदेशक नीलेश संचेती, कोषाध्यक्ष सांगसिंह परिहार, ट्रस्टी सुरेश खेमानी और सुपरवाइजर गोपाल को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है।
पुलिस के अनुसार पांचों आरोपियों को सोमवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा। अदालत के समक्ष पुलिस जांच से जुड़े तथ्य रखे जाएंगे और आगे की कार्रवाई न्यायिक आदेश के अनुसार होगी।
यह प्रकरण राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी दीपेंद्र झरवाल की रिपोर्ट के आधार पर विवेक विहार पुलिस थाने में दर्ज किया गया था।
शिकायत के अनुसार 28 मई 2026 को राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल, रीको, जल संसाधन विभाग और जोधपुर विकास प्राधिकरण की संयुक्त टीम ने कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण किया था।
आरोप है कि निरीक्षण के दौरान प्रदूषण नियंत्रण और अपशिष्ट जल के निस्तारण से संबंधित अनियमितताएं सामने आई थीं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और न्यासियों के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज किया गया।
पुलिस प्रकरण में कुल 18 पदाधिकारियों और ट्रस्टियों को आरोपी बनाया गया है। अब तक पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है, जबकि शेष लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
जांच एजेंसी दस्तावेजों, निरीक्षण रिपोर्ट, संयंत्र संचालन से जुड़े रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बयान का परीक्षण कर रही है।
जोजरी नदी प्रदूषण से जुड़े मामले में 4 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित बताई गई है। इससे एक दिन पहले हुई गिरफ्तारियों को मामले की जांच में महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।
हालांकि पुलिस कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट में लंबित न्यायिक कार्यवाही अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों के खिलाफ आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक सुनवाई के बाद ही होगी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर अन्य नामजद आरोपियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल सभी संबंधित व्यक्तियों की जिम्मेदारी, निर्णय प्रक्रिया और संयंत्र संचालन में उनकी भूमिका का परीक्षण किया जा रहा है।
मामले में गिरफ्तार होना दोषसिद्धि नहीं है। आरोपियों को अदालत में अपना पक्ष रखने और उपलब्ध कानूनी उपाय अपनाने का अधिकार रहेगा।