Sunday, 02 August 2026

पोकरण में वायुसेना का ‘रोटर क्लैप-III’ अभ्यास, हेलीकॉप्टरों ने हवा में ड्रोन लक्ष्य किए नष्ट


पोकरण में वायुसेना का ‘रोटर क्लैप-III’ अभ्यास, हेलीकॉप्टरों ने हवा में ड्रोन लक्ष्य किए नष्ट

ख़बर सुनिए:

0:00
0:00
Audio thumbnail

एक सप्ताह तक चले काउंटर-यूएएस युद्धाभ्यास में ड्रोन की पहचान, ट्रैकिंग और निष्प्रभावी करने की क्षमता परखी गई

जैसलमेर। पाकिस्तान सीमा के निकट स्थित पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज भारतीय वायुसेना की ड्रोन रोधी क्षमता और हेलीकॉप्टर बेड़े की सामरिक तैयारियों की गवाह बनी। यहां एक सप्ताह तक चले ‘रोटर क्लैप-III’ युद्धाभ्यास में वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने शत्रु ड्रोन की पहचान, निगरानी और उन्हें हवा में ही नष्ट करने का अभ्यास किया।

अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आधुनिक युद्ध परिस्थितियों में मानवरहित हवाई प्रणालियों से उत्पन्न खतरे का मुकाबला करना था। इसके लिए युद्धक्षेत्र जैसे हालात तैयार किए गए और हेलीकॉप्टर इकाइयों को ड्रोन की लाइव लोकेशन का पता लगाकर निर्धारित समय में कार्रवाई करने का अभ्यास कराया गया।

विभिन्न हेलीकॉप्टर इकाइयों ने लिया हिस्सा

‘रोटर क्लैप-III’ में भारतीय वायुसेना की कई हेलीकॉप्टर इकाइयों ने भाग लिया। अभ्यास के दौरान पायलटों, तकनीकी दलों और निगरानी तंत्र के बीच समन्वय को परखा गया।

वायुसेना ने हेलीकॉप्टरों के माध्यम से ड्रोन का पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने और उपयुक्त हथियार प्रणाली से निष्प्रभावी करने की कार्रवाई का अभ्यास किया। अधिकारियों के अनुसार बदलते सामरिक परिदृश्य में काउंटर-ड्रोन क्षमता सैन्य तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।

बड़े ड्रोन हमलों से निपटने की तैयारी

आधुनिक युद्ध में बड़ी संख्या में छोटे और कम लागत वाले ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी तथा हमलों के लिए बढ़ा है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए अभ्यास में एक साथ सामने आने वाले कई हवाई लक्ष्यों से निपटने की रणनीति और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता की जांच की गई।

अभ्यास के दौरान हेलीकॉप्टर क्रू ने लक्ष्य की पहचान से लेकर उसे निष्प्रभावी करने तक की पूरी प्रक्रिया में आपसी तालमेल का प्रदर्शन किया। इस प्रशिक्षण से वास्तविक अभियान के दौरान प्रतिक्रिया समय कम करने और निर्णय लेने की क्षमता बेहतर करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

पोकरण में पहले हुआ था ‘वायु शक्ति-2026’

इससे पहले फरवरी 2026 में पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय वायुसेना ने ‘वायु शक्ति-2026’ अभ्यास आयोजित किया था। इसमें लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों, परिवहन विमानों और विभिन्न हथियार प्रणालियों की क्षमता प्रदर्शित की गई थी।

‘रोटर क्लैप-III’ में विशेष रूप से हेलीकॉप्टर आधारित काउंटर-यूएएस अभियानों पर ध्यान केंद्रित किया गया। अभ्यास ने यह परखने का अवसर दिया कि वायुसेना का रोटरी-विंग बेड़ा ड्रोन जैसे छोटे और तेजी से बदलती दिशा वाले लक्ष्यों के खिलाफ कितनी प्रभावी कार्रवाई कर सकता है।

सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पोकरण रेंज

पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज भारतीय सशस्त्र बलों के प्रमुख प्रशिक्षण क्षेत्रों में शामिल है। विशाल रेगिस्तानी भूभाग और सीमावर्ती स्थिति के कारण यहां वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में हथियारों और सैन्य प्लेटफॉर्म का परीक्षण किया जाता है।

एक सप्ताह तक चले अभ्यास के समापन के साथ वायुसेना ने अपनी परिचालन तैयारियों, हेलीकॉप्टर इकाइयों के समन्वय और ड्रोन रोधी रणनीति का व्यापक मूल्यांकन किया।

    Previous
    Next

    Related Posts