



मतदाता पहचान पत्र नहीं होने पर 11 वैकल्पिक दस्तावेजों से हो सकेगी वोटिंग; चुनाव अधिसूचना तक मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की सुविधा
जयपुर। राजस्थान में प्रस्तावित नगरपालिका और पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में फर्जी मतदान एवं मतदाता प्रतिरूपण के मामलों में अब भारतीय दंड संहिता के बजाय भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव अधिकारियों और पुलिस को नए आपराधिक कानून के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
फर्जी पहचान के आधार पर मतदान करने, किसी अन्य जीवित या मृत व्यक्ति के नाम से वोट डालने अथवा एक बार मतदान करने के बाद दोबारा वोट देने का प्रयास भारतीय न्याय संहिता की धारा 172 के तहत चुनाव में प्रतिरूपण का अपराध माना गया है। इसकी सजा धारा 174 में निर्धारित है, जिसके तहत एक वर्ष तक का कारावास, जुर्माना अथवा दोनों हो सकते हैं। यह अपराध गैर-संज्ञेय और जमानती श्रेणी में आता है।
पूर्व में चुनाव में किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर वोट देने के मामलों में भारतीय दंड संहिता की धारा 171-डी और 171-एफ का इस्तेमाल किया जाता था। भारतीय न्याय संहिता लागू होने के बाद अब इसी प्रकार के अपराधों में बीएनएस की धारा 172 और 174 का उल्लेख किया जाएगा।
धारा 172 अपराध की परिभाषा देती है, जबकि धारा 174 उसकी सजा से संबंधित है। इसलिए कानूनी रूप से यह लिखना अधिक सटीक होगा कि फर्जी मतदान के मामले में धारा 172 के साथ धारा 174 के तहत कार्रवाई होगी।
भारतीय न्याय संहिता लागू होने के बाद राजस्थान में होने वाले ये पहले व्यापक स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनाव होंगे। ऐसे में निर्वाचन अपराधों की एफआईआर, शिकायतों और न्यायिक कार्रवाई में पुराने आईपीसी प्रावधानों के स्थान पर नए कानून का उपयोग किया जाएगा।
राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव से संबंधित अनेक दिशा-निर्देश जारी किए हैं और मतदाताओं की पहचान के लिए वैकल्पिक दस्तावेजों संबंधी नया आदेश भी 30 जुलाई 2026 को जारी किया है।
किसी मतदाता का नाम मतदाता सूची में दर्ज है, लेकिन उसके पास मतदाता फोटो पहचान पत्र नहीं है, तो वह आयोग द्वारा मान्य वैकल्पिक दस्तावेज प्रस्तुत कर मतदान कर सकेगा।
इनमें आधार कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, पासपोर्ट, फोटोयुक्त पेंशन दस्तावेज तथा बैंक या डाकघर की फोटोयुक्त पासबुक जैसे दस्तावेज शामिल हो सकते हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में आधिकारिक निर्देश जारी किए हैं।
यह स्पष्ट है कि केवल पहचान दस्तावेज दिखाना पर्याप्त नहीं होगा। मतदान के लिए संबंधित मतदाता का नाम उस निर्वाचन क्षेत्र की अंतिम मतदाता सूची में दर्ज होना अनिवार्य है।
नगर निकाय और पंचायती राज चुनावों के लिए 1 जनवरी 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर तैयार मतदाता सूचियों का निरंतर अद्यतन किया जा रहा है। चुनाव की लोक सूचना जारी होने तक पात्र व्यक्ति निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम जुड़वाने, त्रुटि सुधारने या नाम हटाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
ऐसे व्यक्ति, जिनकी आयु 1 जनवरी 2026 को 18 वर्ष या उससे अधिक हो चुकी है और नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के समक्ष आवेदन कर सकते हैं।
मृत व्यक्तियों, स्थायी रूप से अन्य स्थान पर चले गए मतदाताओं और एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों को मतदाता सूची से हटाने के लिए भी आवेदन किया जा सकता है।
आयोग का उद्देश्य मतदान से पहले मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और अद्यतन बनाना है, ताकि फर्जी मतदान, दोहरी प्रविष्टि और किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर मतदान की आशंका कम की जा सके।
मतदान केंद्रों पर तैनात अधिकारियों को मतदाता की पहचान का सावधानीपूर्वक सत्यापन करना होगा। किसी मतदाता की पहचान पर आपत्ति होने पर निर्धारित चुनावी प्रक्रिया के अनुसार चुनौती मत की व्यवस्था अपनाई जा सकेगी।
फर्जी मतदान का प्रयास पाए जाने पर मतदान अधिकारी संबंधित पुलिस और रिटर्निंग अधिकारी को सूचना देंगे। इसके बाद मामले की प्रकृति के आधार पर बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।