



हाईकोर्ट ने कलक्टर को फार्म हाउस, होटल और रेस्टोरेंट सहित सभी अतिक्रमण चिह्नित करने के निर्देश; कोर्ट बोला—प्रभावशाली व्यक्ति का नाम भी नहीं छूटे
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने रामगढ़ बांध के जलग्रहण क्षेत्र में अतिक्रमण को गंभीरता से लेते हुए जयपुर जिला कलेक्टर को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि रिपोर्ट में अतिक्रमण करने वाले प्रत्येक व्यक्ति का नाम और कब्जे का स्वरूप स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाए।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने रामगढ़ बांध एवं उसके कैचमेंट क्षेत्र से संबंधित स्वप्रेरित जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिए। अदालत इस मामले में पहले भी बांध के पुनर्जीवन, जल प्रवाह मार्गों और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर असंतोष जता चुकी है।
खंडपीठ ने कलेक्टर से कहा कि भौतिक सर्वे कर यह बताया जाए कि बांध के कैचमेंट क्षेत्र में किस व्यक्ति ने किस स्थान पर अतिक्रमण किया है। रिपोर्ट में फार्म हाउस, होटल, रेस्टोरेंट तथा अन्य व्यावसायिक या निजी निर्माण का अलग-अलग विवरण शामिल किया जाए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि अतिक्रमणकर्ता कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, रिपोर्ट में उसका नाम दर्ज होना चाहिए। प्रशासन को केवल सामान्य आंकड़े देने के बजाय स्थलवार और नामवार वास्तविक स्थिति अदालत के सामने रखनी होगी।
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने सरकारी विभागों की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए मौखिक टिप्पणी की कि अधिकारी कब तक बैठकों में चाय-बिस्किट के साथ मामले निपटाते रहेंगे। अदालत ने कहा कि विभागों को मौके पर जाकर वास्तविक भौतिक सर्वे करना चाहिए।
हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाइयों में भी कहा था कि रामगढ़ बांध के संरक्षण को लेकर वर्षों से रिपोर्ट तैयार की जा रही हैं, लेकिन धरातल पर अपेक्षित कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही। अदालत ने पांच किलोमीटर के क्षेत्र में अतिक्रमण नहीं हटने के बावजूद 105 किलोमीटर दूर ईसरदा बांध से पानी लाने की योजना पर भी सवाल उठाए थे।
मामले में न्यायमित्र अभिनव शर्मा ने अदालत को बताया कि रामगढ़ बांध मुख्य रूप से बाणगंगा नदी और उसकी सहायक नदियों से भरता था। इन नदियों के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण और अवरोध होने के कारण वर्षा का पानी बांध तक नहीं पहुंच पा रहा है।
उन्होंने कहा कि बांध को पुनर्जीवित करने के लिए केवल वैकल्पिक जलापूर्ति योजना पर्याप्त नहीं होगी। बाणगंगा सहित बांध को पानी देने वाली पांच नदियों के बहाव क्षेत्र से अतिक्रमण और अवैध अवरोध हटाना भी आवश्यक है। पिछली सुनवाई में न्यायमित्र ने वर्ष 2018 की एक रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए क्षेत्र में बड़ी संख्या में एनिकट चिह्नित होने की जानकारी भी दी थी।
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया है कि रामगढ़ बांध के पुनर्जीवन के लिए ईसरदा बांध से करीब 105 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के माध्यम से पानी लाने की योजना तैयार की गई है। परियोजना को वर्ष 2028 तक पूरा करने का प्रस्ताव है और इससे लाया गया पानी पेयजल के रूप में उपयोग किया जाएगा।
सरकार ने पहले खुले चैनल से पानी लाने की योजना बनाई थी, लेकिन रास्ते में पानी रोके या मोड़े जाने की आशंका के चलते इसे पाइपलाइन परियोजना में परिवर्तित किया गया। हाईकोर्ट ने संबंधित विभागों से इस योजना और वित्तीय व्यवस्था का विस्तृत शपथ-पत्र भी मांगा है।
दो सप्ताह में पेश होने वाली रिपोर्ट के आधार पर अदालत यह समीक्षा करेगी कि कैचमेंट क्षेत्र में कितने अतिक्रमण हैं और उन्हें हटाने के लिए प्रशासन ने क्या कार्रवाई की है। रिपोर्ट में किसी प्रकार की अपूर्णता या प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम छिपाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।