Friday, 31 July 2026

कथित फर्जी डिग्री मामले में भाजपा विधायक जयदीप बिहाणी सहित आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट के आदेश


कथित फर्जी डिग्री मामले में भाजपा विधायक जयदीप बिहाणी सहित आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट के आदेश

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एक वर्ष से समन और जमानती वारंट की तामील नहीं होने पर अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नाराज, एसपी से दैनिक प्रयासों का रिकॉर्ड मांगा

श्रीगंगानगर। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-2, श्रीगंगानगर ने कथित फर्जी डिग्री एवं अंकतालिका प्रकरण में भाजपा विधायक जयदीप बिहाणी सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने एक वर्ष से अधिक समय तक समन और जमानती वारंट की प्रभावी तामील नहीं होने पर पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी भी जताई है।

एसीजेएम निधि बेनीवाल की अदालत ने राज्य बनाम जयदीप बिहाणी एवं अन्य मामले की सुनवाई करते हुए आरोपियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। प्रकरण की अगली सुनवाई 5 अगस्त को निर्धारित की गई है।

जानकारी के बावजूद पेश नहीं होने का आरोप

सुनवाई के दौरान परिवादी पक्ष के अधिवक्ता विक्रम पूनिया ने कहा कि आरोपियों को न्यायालय की ओर से जारी समन और जमानती वारंट की जानकारी थी। इसके बावजूद वे जानबूझकर अदालत में उपस्थित नहीं हो रहे हैं।

अधिवक्ता ने आरोपियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए कठोर प्रक्रिया अपनाने की मांग की। इस पर अदालत ने मामले के रिकॉर्ड और पूर्व में जारी आदेशों का परीक्षण करते हुए गिरफ्तारी वारंट जारी करने के निर्देश दिए।

मई 2025 में लिया गया था अपराधों का संज्ञान

अदालत के आदेश के अनुसार 19 मई 2025 को परिवाद में भारतीय दंड संहिता की धारा 417, 418, 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत अपराधों का संज्ञान लिया गया था।

इसके बाद आरोपियों को न्यायालय में उपस्थित कराने के लिए समन और जमानती वारंट जारी किए गए। पुलिस अधीक्षक के माध्यम से अर्द्धशासकीय पत्र भी भेजे गए, लेकिन आरोपियों की उपस्थिति सुनिश्चित नहीं हो सकी।

इन धाराओं में धोखाधड़ी, मूल्यवान प्रतिभूति से संबंधित जालसाजी, धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी, कथित जाली दस्तावेज का इस्तेमाल और आपराधिक षड्यंत्र जैसे आरोप शामिल हैं। आरोपों की सत्यता का निर्धारण न्यायिक सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद होगा।

औपचारिक तामील रिपोर्ट पर अदालत ने जताई नाराजगी

अदालत ने कहा कि प्रत्येक पेशी पर तामीलकर्ता की ओर से औपचारिक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाती रही, लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी अथवा उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए कोई सार्थक प्रयास दिखाई नहीं दिया।

न्यायालय ने इसे अपने आदेशों की अवहेलना मानते हुए पुलिस अधीक्षक की निगरानी में नियमित और प्रभावी तामील कराने को कहा। अदालत ने सांसदों और विधायकों से संबंधित मामलों में शीघ्र तामील सुनिश्चित करने के राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व निर्देशों का भी उल्लेख किया।

प्रतिदिन करने होंगे तामील के प्रयास

अदालत ने पुलिस अधीक्षक, श्रीगंगानगर को अर्द्धशासकीय पत्र भेजने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत नियुक्त तामीलकर्ता को प्रतिदिन वारंट की तामील का प्रयास करना होगा।

तामीलकर्ता की रोजाना आमद और रवानगी पुलिस रोजनामचा में दर्ज की जाएगी। अगली सुनवाई पर इन प्रविष्टियों सहित कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड न्यायालय में प्रस्तुत करना होगा।

यदि वारंट की तामील नहीं होती है तो संबंधित अधिकारी को स्वयं अदालत में उपस्थित होकर लिखित स्पष्टीकरण देना होगा।

आईजी बीकानेर को भी पत्र भेजने के निर्देश

अदालत ने पुलिस महानिरीक्षक, बीकानेर रेंज को भी पत्र भेजने को कहा है। इसमें सामान्य नियम (सिविल एवं दांडिक), 2018 के प्रावधानों के अंतर्गत पुलिस अधीक्षक और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा आवश्यक कार्रवाई पर विचार करने का उल्लेख किया जाएगा।

अदालत का यह आदेश फिलहाल आरोपियों की न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित कराने से संबंधित है। इसे आरोपों पर अंतिम निर्णय अथवा दोषसिद्धि नहीं माना जाएगा।

बीआईएफटी से जुड़ा है कथित फर्जी डिग्री विवाद

मामला बिहाणी इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी से कथित रूप से फर्जी डिग्री और अंकतालिकाएं जारी करने के आरोपों से जुड़ा है। वर्ष 2015 में न्यायालय के आदेश पर जवाहर नगर पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

परिवादिया रविंद्र कौर का आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2009 में संस्थान में फैशन डिजाइनिंग डिप्लोमा और बाद में बीबीए पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया था। संस्थान के पदाधिकारियों ने यूजीसी, एआईसीटीई और विभिन्न विश्वविद्यालयों से मान्यता का दावा करते हुए उनसे करीब ₹1.80 लाख शुल्क लिया।

विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम संचालन पर उठे थे सवाल

परिवाद के अनुसार वर्ष 2015 में जानकारी प्राप्त करने पर कथित रूप से सामने आया कि जिस विश्वविद्यालय के नाम पर डिग्री और अंकतालिकाएं जारी की गई थीं, वह संबंधित पाठ्यक्रम संचालित नहीं करता था। यह भी आरोप लगाया गया कि बीआईएफटी उस विश्वविद्यालय का अधिकृत अध्ययन केंद्र नहीं था।

प्राथमिकी में संस्थान के तत्कालीन अध्यक्ष जयदीप बिहाणी, प्रबंधक गोविंद सक्सेना, समन्वयक कविता चौधरी, कोषाध्यक्ष श्याम कोठारी, आईआईएफटी के सीईओ रतनादीप लाल सहित प्रबंध समिति के सदस्यों और अन्य संबंधित कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया था।

अब 5 अगस्त की सुनवाई पर वारंट की तामील और आरोपियों की उपस्थिति से संबंधित स्थिति अदालत के समक्ष रखी जाएगी।

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