Thursday, 30 July 2026

जल जीवन मिशन 2.0: अगस्त तक 1,200 पेयजल योजनाओं का होगा ‘जल अर्पण’, 2,500 गांवों को मिलेगा लाभ: वी. श्रीनिवास


जल जीवन मिशन 2.0: अगस्त तक 1,200 पेयजल योजनाओं का होगा ‘जल अर्पण’, 2,500 गांवों को मिलेगा लाभ: वी. श्रीनिवास

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मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने मिशन की प्रगति की समीक्षा की, हर घर सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के कार्य समयबद्ध पूरा करने के निर्देश

जयपुर। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने गुरुवार को शासन सचिवालय में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग और जल जीवन मिशन 2.0 की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर तक सुरक्षित एवं स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए स्वीकृत परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

बैठक में मिशन के क्रियान्वयन, वित्तीय प्रबंधन, पेयजल योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव तथा प्रस्तावित ‘जल अर्पण दिवस’ की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

₹80,848 करोड़ की सीमा में स्वीकृत परियोजनाएं समय पर पूरी हों

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा स्वीकृत ₹80,848 करोड़ की समग्र वित्तीय सीमा में शामिल सभी परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों से परियोजनाओं की नियमित निगरानी करने और काम में आने वाली बाधाओं का तत्काल समाधान करने को कहा।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण परिवारों तक नल के माध्यम से सुरक्षित पेयजल पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वित्तीय और भौतिक प्रगति में समन्वय बनाए रखना आवश्यक है।

अगस्त तक ग्राम पंचायतों को सौंपी जाएंगी 1,200 योजनाएं

जल जीवन मिशन के अंतर्गत वित्तीय और भौतिक रूप से पूरी हो चुकी 1,200 पेयजल योजनाओं को अगस्त तक ग्राम पंचायतों एवं स्थानीय समुदायों को औपचारिक रूप से हस्तांतरित किया जाएगा। इन योजनाओं से प्रदेश के करीब 2,500 गांव लाभान्वित होंगे।

योजनाओं के हस्तांतरण के लिए ‘जल अर्पण दिवस’ आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य स्थानीय समुदायों को योजनाओं के संचालन, संरक्षण और नियमित रखरखाव से सीधे जोड़ना है।

ओएंडएम व्यवस्था को मिलेगा संस्थागत स्वरूप

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने प्रस्तावित संचालन एवं संधारण नीति के अनुरूप पेयजल योजनाओं की ओएंडएम व्यवस्था को मजबूत बनाने के निर्देश दिए। इसके तहत ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति को ग्राम पंचायत की स्थायी समिति के रूप में सक्रिय किया जाएगा।

पांच से छह ग्राम पंचायतों को शामिल कर क्लस्टर समितियां गठित की जाएंगी। ब्लॉक स्तर पर पीएचईडी ओएंडएम सपोर्ट टीम और जिला स्तर पर जिला तकनीकी इकाई तथा जिला जलापूर्ति एवं स्वच्छता मिशन के प्रशासनिक ढांचे को प्रभावी बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि योजनाओं के निर्माण के बाद उनका नियमित संचालन और रखरखाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। संस्थागत व्यवस्था मजबूत होने से जलापूर्ति में आने वाली तकनीकी समस्याओं का समय पर समाधान हो सकेगा।

सौर ऊर्जा से संचालित पंपिंग प्रणालियों को मिलेगा बढ़ावा

बैठक में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और पेयजल योजनाओं की संचालन लागत कम करने के लिए सौर ऊर्जा आधारित पंपिंग प्रणालियों को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया गया।

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने अधिकारियों को आगामी तीन वर्षों में अधिक से अधिक योजनाओं को सौर ऊर्जा से जोड़ने की दिशा में कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। इससे बिजली खर्च कम होने के साथ दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति व्यवस्था को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकेगा।

3,000 तकनीकी कार्मिकों की नियुक्ति शीघ्र पूरी करने के निर्देश

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जल योजनाओं की नियमित निगरानी और बेहतर संचालन के लिए राजस्थान कॉन्ट्रैक्चुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट्स नियमों के तहत 3,000 सपोर्ट इंजीनियर, सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ और केमिस्ट की नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने को कहा।

उन्होंने कहा कि तकनीकी कार्मिकों की उपलब्धता से योजनाओं की गुणवत्ता की निगरानी, जल परीक्षण, डिजिटल डेटा प्रबंधन और तकनीकी समस्याओं के समाधान में तेजी आएगी।

नल जल मित्रों की नियुक्ति और प्रशिक्षण को प्राथमिकता

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से नल जल मित्रों की नियुक्ति, प्रशिक्षण और मानदेय संबंधी व्यवस्था भी प्राथमिकता के आधार पर पूरी करने के निर्देश दिए।

नल जल मित्र ग्राम स्तर पर पाइपलाइन, नल कनेक्शन और जलापूर्ति प्रणाली की सामान्य देखरेख करेंगे। स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित कार्मिक उपलब्ध होने से छोटी तकनीकी खराबियों को शीघ्र ठीक किया जा सकेगा और पेयजल आपूर्ति में बाधा कम होगी।

बैठक में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के प्रमुख शासन सचिव हेमन्त कुमार गेरा, जल जीवन मिशन के मिशन निदेशक राजन विशाल, पंचायती राज विभाग के शासन सचिव डॉ. जोगा राम सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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