



बाड़मेर-जालौर क्षेत्र को समुद्री व्यापार तंत्र से जोड़ने की योजना, राष्ट्रीय जलमार्ग-48 की प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट पर काम
जयपुर। राजस्थान के बाड़मेर-जालौर क्षेत्र में प्रस्तावित अंतर्देशीय पोर्ट और कृत्रिम नहर परियोजना को लेकर तकनीकी एवं व्यवहार्यता संबंधी अध्ययन जारी है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने कहा कि परियोजना आगे बढ़ने पर पश्चिमी राजस्थान में औद्योगिक निवेश, व्यापार, परिवहन और रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
राज्यसभा में राजस्थान में पोर्ट विकसित करने की संभावनाओं को लेकर राठौड़ की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने परियोजना से संबंधित प्रगति की जानकारी दी।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश में वर्तमान में 12 प्रमुख और 217 गैर-प्रमुख बंदरगाह संचालित हैं। इसके अतिरिक्त महाराष्ट्र के पश्चिमी तट पर वधावन पोर्ट को ग्रीनफील्ड गहरे जल वाले बंदरगाह के रूप में स्वीकृति दी जा चुकी है।
मदन राठौड़ ने राज्यसभा में देश के मौजूदा बंदरगाहों की संख्या, नए बंदरगाहों के विकास की योजनाओं तथा बाड़मेर-जालौर क्षेत्र तक समुद्री जल लाकर अंतर्देशीय पोर्ट विकसित करने की संभावनाओं से संबंधित सवाल पूछा था।
राठौड़ के अनुसार, केंद्रीय मंत्री ने बताया कि बाड़मेर जिले के बखासर क्षेत्र में अंतर्देशीय पोर्ट और कृत्रिम नहर विकसित करने के लिए पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार की गई है।
भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण ने आईआईटी मद्रास के नेशनल टेक्नोलॉजी सेंटर फॉर पोर्ट्स, वाटरवेज एंड कोस्ट्स को परियोजना की गणितीय मॉडलिंग और राष्ट्रीय जलमार्ग-48 की प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का काम सौंपा है।
राष्ट्रीय जलमार्ग-48 जवाई-लूणी नदी प्रणाली को कच्छ के रण से जोड़ने की प्रस्तावित परियोजना है। इससे राजस्थान को गुजरात के समुद्री व्यापार मार्ग से जोड़ने की संभावनाओं का अध्ययन किया जा रहा है।
तकनीकी अध्ययन में भवात्रा से कांडला क्रीक तक के मार्ग को अपेक्षाकृत अधिक उपयुक्त पाया गया है। हालांकि परियोजना के लिए चिह्नित अन्य विकल्पों को भी व्यवहार्य माना गया है।
इसके आधार पर संभावित माल परिवहन, औद्योगिक उपयोग और आर्थिक व्यवहार्यता से संबंधित यातायात अध्ययन रिपोर्ट को अद्यतन किया जा रहा है। पूर्ववर्ती अध्ययनों में भवात्रा से नवलखी और कांडला क्रीक की दिशा वाले विकल्प को भी प्रमुख संभावित मार्गों में शामिल किया गया था।
मदन राठौड़ ने कहा कि केंद्र सरकार का जवाब पश्चिमी राजस्थान के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। परियोजना साकार होने पर बाड़मेर, जालौर और अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में उद्योगों तथा लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के विस्तार की संभावना बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि अंतर्देशीय पोर्ट बनने से खनिज, पेट्रोकेमिकल, सीमेंट, कृषि उत्पाद और अन्य वस्तुओं को समुद्री बंदरगाहों तक पहुंचाने का वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हो सकता है। इससे सड़क एवं रेल परिवहन पर दबाव कम होने और माल ढुलाई की लागत में कमी आने की संभावना है।
परियोजना अभी तकनीकी अध्ययन, मार्ग निर्धारण और व्यवहार्यता मूल्यांकन के चरण में है। प्रारंभिक एवं विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार होने के बाद ही इसकी लागत, जल उपलब्धता, भूमि की आवश्यकता, पर्यावरणीय प्रभाव और निर्माण की समय-सीमा स्पष्ट हो सकेगी।
इसलिए इसे फिलहाल स्वीकृत या निर्माणाधीन पोर्ट के बजाय अध्ययनाधीन परियोजना के रूप में देखा जाना चाहिए।