Thursday, 30 July 2026

मकर द्वार पर विपक्ष का प्रदर्शन, छात्र कार्रवाई और राम मंदिर चंदा विवाद पर सरकार को घेरा


मकर द्वार पर विपक्ष का प्रदर्शन, छात्र कार्रवाई और राम मंदिर चंदा विवाद पर सरकार को घेरा

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प्रियंका गांधी भी विरोध में शामिल, राज्यसभा में आज पेश होगा पेपर लीक रोकथाम संशोधन विधेयक

नई दिल्ली। संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने गुरुवार सुबह करीब 10:30 बजे संसद भवन के मकर द्वार पर प्रदर्शन किया। विपक्षी सांसदों ने 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कथित पुलिस कार्रवाई और अयोध्या के राम मंदिर में चंदे से संबंधित कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

प्रदर्शन में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल हुईं। विपक्षी सांसदों ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई की जवाबदेही तय करने, संबंधित घटनाक्रम पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बयान कराने और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।

छात्र प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई का विरोध

विपक्षी दलों का आरोप है कि 20 जुलाई को अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों के खिलाफ पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग किया। विपक्ष इस विषय पर संसद के भीतर भी चर्चा और गृह मंत्री के जवाब की मांग कर रहा है।

इस मुद्दे को लेकर राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और सदन के नेता जेपी नड्डा के बीच भी तीखी बहस हो चुकी है। सत्ता पक्ष ने पुलिस कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया, जबकि विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करार दिया।

राम मंदिर चंदे के मुद्दे पर भी नारेबाजी

विपक्षी सांसदों ने अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चंदे से संबंधित कथित चोरी और अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने मामले में पारदर्शी जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने पोस्टर और तख्तियां दिखाते हुए कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े चंदे की सुरक्षा और उसका पारदर्शी प्रबंधन सुनिश्चित करना सरकार एवं संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है।

राज्यसभा में पेपर लीक विधेयक पर चर्चा

राज्यसभा की प्रस्तावित कार्यसूची के अनुसार दोपहर दो बजे से ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश किया जाना है। विधेयक पर करीब सात घंटे चर्चा होने की संभावना जताई गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित सत्ता पक्ष और विपक्ष के वरिष्ठ सांसद बहस में भाग ले सकते हैं।

विधेयक बुधवार को लोकसभा में ध्वनि मत से पारित हो चुका है। इसमें पेपर लीक और संगठित परीक्षा अपराधों के लिए सजा एवं जुर्माने को अधिक कठोर बनाने सहित जांच और सुनवाई की प्रक्रिया को समयबद्ध करने के प्रावधान हैं।

विपक्ष ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की

लोकसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार ने इसे सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया। विपक्ष ने कहा कि दोषियों की सजा बढ़ाना आवश्यक है, लेकिन केवल दंडात्मक प्रावधानों से पेपर लीक की समस्या समाप्त नहीं होगी।

विपक्षी सांसदों ने परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, तकनीकी निगरानी और प्रभावित अभ्यर्थियों को समयबद्ध राहत देने के लिए व्यापक प्रशासनिक सुधारों की मांग की। विधेयक पर लोकसभा में लंबी चर्चा और हंगामे के बाद मतदान हुआ था।

लोकसभा में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने वाला विधेयक

लोकसभा में ‘सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026’ पर भी चर्चा प्रस्तावित है। यह विधेयक प्रधान न्यायाधीश के अतिरिक्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रावधान करता है। इसके लागू होने पर प्रधान न्यायाधीश सहित शीर्ष अदालत की कुल स्वीकृत क्षमता 38 न्यायाधीश हो जाएगी।

सरकार का कहना है कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के निस्तारण और न्यायिक कामकाज की गति सुधारने में सहायता मिलेगी।

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