Thursday, 30 July 2026

छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर पानी की टंकी पर चढ़े एनएसयूआई नेता


छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर पानी की टंकी पर चढ़े एनएसयूआई नेता

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दिल्ली में छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई का विरोध; अमित शाह के इस्तीफे और माफी की मांग

जयपुर। राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ हुई कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में गुरुवार को कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई ने जयपुर में प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के दौरान राजस्थान विश्वविद्यालय से जुड़े एनएसयूआई के तीन छात्र नेता टोंक फाटक क्षेत्र में स्थित पानी की टंकी पर चढ़ गए। उन्होंने हाथों में पोस्टर लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस्तीफा देने तथा प्रदर्शनकारी छात्रों से माफी मांगने की मांग की।

टंकी पर चढ़े तीन छात्र नेता

पानी की टंकी पर चढ़ने वाले छात्र नेताओं में राजस्थान विश्वविद्यालय के एनएसयूआई प्रभारी विजयपाल कुड़ी, छात्र नेत्री वियोना जाट और छात्र नेता कोशेन खान शामिल बताए गए हैं।

तीनों प्रदर्शनकारियों ने कहा कि दिल्ली में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और विद्यार्थियों की आवाज पर हमला बताया।

दिल्ली में हाल के छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और हिरासत के विरोध में विभिन्न छात्र संगठनों ने जंतर-मंतर पर भी प्रदर्शन किया है। विपक्ष की ओर से इस कार्रवाई की जवाबदेही तय करने और केंद्रीय गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई गई है।

छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग

एनएसयूआई नेताओं ने राजस्थान सरकार से प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव दोबारा शुरू करने की मांग की। उनका कहना था कि चुनाव नहीं होने से विद्यार्थियों को अपनी समस्याएं संस्थागत स्तर पर उठाने के लिए निर्वाचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि छात्रसंघ विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच संवाद की महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। लंबे समय तक चुनाव स्थगित रखना छात्र राजनीति और लोकतांत्रिक भागीदारी को कमजोर करता है।

‘छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास’

टंकी पर चढ़े छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारें विद्यार्थियों की मांगों का समाधान करने के बजाय उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है और छात्रों के खिलाफ कथित बल प्रयोग को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि छात्रसंघ चुनाव बहाल नहीं किए गए और दिल्ली की घटना पर जवाबदेही तय नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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