Wednesday, 29 July 2026

जयपुर ग्रामीण चुनाव याचिका में पक्षकार बने रहेंगे चुनाव आयोग और निर्वाचन अधिकारी, हाईकोर्ट ने अर्जी खारिज की


जयपुर ग्रामीण चुनाव याचिका में पक्षकार बने रहेंगे चुनाव आयोग और निर्वाचन अधिकारी, हाईकोर्ट ने अर्जी खारिज की

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1615 वोट के जीत के अंतर के मुकाबले निरस्त डाक मतपत्रों की संख्या में विरोधाभास को अदालत ने माना महत्वपूर्ण

जयपुर। जयपुर ग्रामीण लोकसभा सीट के वर्ष 2024 के चुनाव परिणाम को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका में भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त, जिला निर्वाचन अधिकारी और रिटर्निंग ऑफिसर पक्षकार बने रहेंगे। राजस्थान हाईकोर्ट ने इन अधिकारियों एवं संस्थाओं को पक्षकारों की सूची से हटाने की मांग वाली निर्वाचन आयोग की अर्जी खारिज कर दी है।

जस्टिस विनोद कुमार भारवानी की अदालत ने कांग्रेस प्रत्याशी अनिल चोपड़ा की ओर से दायर चुनाव याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को यह आदेश दिया। अदालत ने कहा कि चुनाव परिणाम और निरस्त डाक मतपत्रों से जुड़ी विरोधाभासी सूचनाओं के संबंध में स्पष्टीकरण देने के लिए निर्वाचन आयोग तथा संबंधित निर्वाचन अधिकारी आवश्यक पक्षकार हैं। जयपुर ग्रामीण लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी राव राजेंद्र सिंह ने कांग्रेस प्रत्याशी अनिल चोपड़ा को 1,615 मतों के अंतर से पराजित किया था।

निरस्त डाक मतपत्रों की संख्या में अंतर

अदालत ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि दोनों प्रत्याशियों के बीच जीत-हार का अंतर केवल 1,615 मतों का था। मतगणना और चुनाव परिणाम के दिन 4 जून 2024 को याचिकाकर्ता की आपत्ति का निस्तारण करते हुए रिटर्निंग ऑफिसर ने निरस्त किए गए डाक मतपत्रों की संख्या 1,225 बताई थी।

इसके विपरीत, सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत उपलब्ध कराई गई जानकारी में निरस्त डाक मतपत्रों की संख्या 2,738 बताई गई। अदालत ने गौर किया कि दोनों सूचनाएं एक ही दिन से संबंधित हैं और निर्वाचन तंत्र की ओर से ही दी गई हैं।

कोर्ट ने कहा कि निरस्त डाक मतपत्रों की संख्या में यह अंतर ही चुनाव याचिका के मुख्य विवादों में शामिल है। ऐसे में निर्वाचन आयोग और संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति के बिना विवाद का प्रभावी एवं संपूर्ण निर्णय करना संभव नहीं होगा।

आयोग ने कहा था—विवाद केवल प्रत्याशियों के बीच

निर्वाचन आयोग की ओर से पेश प्रार्थना पत्र में कहा गया था कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत चुनाव याचिका में निर्वाचन आयोग को पक्षकार नहीं बनाया जा सकता। आयोग का तर्क था कि चुनाव विवाद मुख्य रूप से विजयी और पराजित प्रत्याशी के बीच है, इसलिए आयोग एवं निर्वाचन अधिकारियों को पक्षकारों की सूची से हटाया जाना चाहिए।

कांग्रेस प्रत्याशी अनिल चोपड़ा की ओर से इस आवेदन का विरोध किया गया। उनके अधिवक्ता संजय शर्मा ने अदालत को बताया कि दोनों प्रत्याशियों के बीच जीत का अंतर निरस्त बताए गए डाक मतपत्रों की संख्या से कम है।

निर्वाचन अधिकारियों से ही अपेक्षित है स्पष्टीकरण

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि परिणाम के दिन दी गई जानकारी और आरटीआई के तहत उपलब्ध कराए गए आंकड़ों में बड़ा अंतर है। इस विरोधाभास का स्पष्टीकरण केवल निर्वाचन आयोग, जिला निर्वाचन अधिकारी और रिटर्निंग ऑफिसर ही दे सकते हैं।

अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि मामले के प्रभावी और पूर्ण निस्तारण के लिए निर्वाचन आयोग तथा संबंधित अधिकारी आवश्यक पक्षकार हैं। इसी आधार पर उन्हें पक्षकारों की सूची से हटाने की मांग वाला प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया गया।

चुनाव परिणाम की वैधता को दी गई है चुनौती

अनिल चोपड़ा ने अपनी चुनाव याचिका में जयपुर ग्रामीण लोकसभा सीट के परिणाम को चुनौती देते हुए मतगणना और निरस्त डाक मतपत्रों से संबंधित प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। याचिका का प्रमुख आधार यह है कि निरस्त मतपत्रों के संबंध में निर्वाचन अधिकारियों की ओर से अलग-अलग आंकड़े दिए गए, जबकि जीत का अंतर अपेक्षाकृत कम था।

हालांकि मौजूदा आदेश केवल इस प्रश्न से संबंधित है कि निर्वाचन आयोग और संबंधित निर्वाचन अधिकारी मामले में पक्षकार बने रहेंगे या नहीं। चुनाव परिणाम की वैधता और याचिकाकर्ता के आरोपों पर अंतिम निर्णय विस्तृत सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद होगा।

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