



बिहार की 14 वर्षीय बालिका को बालिग बताकर दो लाख रुपए में कराया विवाह; चार मुख्य आरोपी गिरफ्तार
झालावाड़। बिहार के गरीब और अत्यंत पिछड़े परिवारों की नाबालिग लड़कियों को बहला-फुसलाकर अथवा कथित रूप से खरीदकर राजस्थान लाने और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उनका विवाह कराने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का झालावाड़ पुलिस ने खुलासा किया है। गिरोह के सदस्यों ने बिहार की 14 वर्षीय बालिका का फर्जी आधार कार्ड बनवाकर उसे बालिग दर्शाया और अकलेरा क्षेत्र में दो लाख रुपए लेकर उसका विवाह करा दिया।
विवाह के कुछ दिन बाद आरोपी बालिका को दोबारा अपने साथ ले जा रहे थे, तभी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे मुक्त कराया। मामले की विस्तृत जांच के बाद पुलिस ने गिरोह के चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।
पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि 7 जुलाई को अकलेरा क्षेत्र के मदनपुरिया गांव से सूचना मिली थी कि बिहार से लाई गई एक नाबालिग बालिका को कुछ लोग जबरन वाहन में बैठाकर ले जा रहे हैं। सूचना मिलते ही अकलेरा थाना पुलिस ने संदिग्ध वाहन का पीछा शुरू किया।
पुलिस को देखकर आरोपी वाहन लेकर रटलाई की ओर भाग निकले। इसके बाद रटलाई थाना पुलिस को सूचना दी गई और ग्रामीणों के सहयोग से सड़क पर ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी कर रास्ता अवरुद्ध किया गया। पुलिस ने वाहन को रोककर उसमें सवार बिहार निवासी नाबालिग बालिका सहित छह लोगों को हिरासत में लिया।
बालिका की सुरक्षा और संरक्षण को ध्यान में रखते हुए उसे झालावाड़ स्थित वन स्टॉप सेंटर भेजा गया। पुलिस ने उससे काउंसलिंग और आवश्यक पूछताछ के बाद पूरे गिरोह की गतिविधियों की जांच शुरू की।
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह ने बालिका की वास्तविक उम्र छिपाने के लिए उसका फर्जी आधार कार्ड तैयार करवाया था। दस्तावेज में उसकी उम्र बढ़ाकर उसे बालिग दर्शाया गया, ताकि विवाह के दौरान किसी प्रकार का संदेह उत्पन्न न हो।
आरोप है कि गिरोह ने अकलेरा क्षेत्र में बालिका का विवाह कराने के बदले करीब दो लाख रुपए लिए थे। पुलिस अब फर्जी आधार कार्ड तैयार करने वाले व्यक्तियों और इस काम में सहयोग करने वाले अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
प्रारंभिक जांच के अनुसार गिरोह के सदस्य बिहार के गरीब और अत्यंत पिछड़े परिवारों की नाबालिग लड़कियों को अपना निशाना बनाते थे। उन्हें बेहतर जीवन, रोजगार अथवा विवाह का प्रलोभन देकर राजस्थान लाया जाता था। कुछ मामलों में परिवार से कथित रूप से पैसे देकर लड़कियों को लाए जाने की आशंका भी सामने आई है।
राजस्थान लाने के बाद लड़कियों के फर्जी पहचान और आयु संबंधी दस्तावेज तैयार कर विभिन्न स्थानों पर उनका विवाह कराया जाता था। इसके बदले गिरोह कथित रूप से बड़ी रकम वसूलता था।
पुलिस के अनुसार गिरोह का तरीका बेहद गंभीर और अमानवीय था। विवाह के बाद यदि संबंधित व्यक्ति अथवा परिवार को लड़की पसंद नहीं आती थी तो गिरोह के सदस्य उसे वापस ले जाते थे और फिर किसी अन्य स्थान पर उसका विवाह करा देते थे।
हर बार विवाह कराने के बदले आरोपियों द्वारा मोटी रकम वसूले जाने की बात सामने आई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह अब तक कितनी नाबालिग लड़कियों को राजस्थान लाकर इस तरह विवाह करा चुका है।
पुलिस ने मामले में चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है। उनसे गिरोह के अन्य सदस्यों, फर्जी दस्तावेज बनाने वालों, बिचौलियों और विवाह कराने में शामिल लोगों के बारे में पूछताछ की जा रही है।
पुलिस को आशंका है कि गिरोह का नेटवर्क राजस्थान के अन्य जिलों और बिहार के कई क्षेत्रों तक फैला हो सकता है। जांच के दौरान अन्य पीड़ित बालिकाओं तथा इसी प्रकार कराए गए विवाहों की जानकारी भी सामने आने की संभावना है।