



आरसीए चुनाव: ढाई साल से जारी अनिश्चितता समाप्त होने की उम्मीद, अगस्त के अंत या सितंबर की शुरुआत में हो सकते हैं चुनाव
जयपुर। राजस्थान क्रिकेट संघ (आरसीए) में करीब ढाई साल से जारी प्रशासनिक और चुनावी अनिश्चितता की स्थिति बुधवार को काफी हद तक साफ हो सकती है। राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त प्रशासक एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) भास्कर ए. सावंत को 29 जुलाई तक आरसीए चुनाव कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार कर अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
प्रशासक की ओर से प्रस्तावित चुनाव कार्यक्रम पेश किए जाने के बाद आरसीए चुनाव की समय-सीमा, मतदाता सूची, जिला क्रिकेट संघों की पात्रता और चुनाव प्रक्रिया से संबंधित स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है। सब कुछ निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रहा तो अगस्त के अंतिम सप्ताह अथवा सितंबर के पहले सप्ताह में आरसीए के चुनाव कराए जाने का रास्ता साफ हो सकता है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने 1 जुलाई को आरसीए का संचालन कर रही एडहॉक कमेटी को निलंबित करते हुए भास्कर ए. सावंत को प्रशासक नियुक्त किया था। अदालत ने प्रशासक की निगरानी में तीन महीने के भीतर नए चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था, जिससे चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता खुल गया।
आरसीए से जुड़े जिला क्रिकेट संघों, खिलाड़ियों और पदाधिकारियों की निगाह अब प्रशासक की ओर से पेश किए जाने वाले चुनावी रोडमैप पर टिकी है। इसमें मतदाता सूची के प्रकाशन, आपत्तियां दर्ज कराने, नामांकन, नामांकन पत्रों की जांच, नाम वापसी और मतदान की संभावित तारीखों का उल्लेख किया जा सकता है।
चुनाव से पहले जिला क्रिकेट संघों की मान्यता और उनके प्रतिनिधियों की पात्रता भी महत्वपूर्ण मुद्दा हो सकती है। आरसीए में लंबे समय से विभिन्न गुटों के बीच जिला संघों की मान्यता, चुनावी अधिकार और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर विवाद बना हुआ है।
आरसीए चुनाव को लेकर फिलहाल जयदीप बिहाणी, पराक्रम सिंह, धनंजय सिंह खींवसर, मोहित यादव और दीनदयाल ‘डीडी’ कुमावत के नाम संभावित दावेदारों के रूप में चर्चा में हैं। हालांकि इनमें से किसी ने औपचारिक चुनाव कार्यक्रम जारी होने से पहले अपनी अंतिम दावेदारी घोषित नहीं की है।
आरसीए की पूर्ववर्ती एडहॉक व्यवस्था में बिहाणी, खींवसर, यादव और कुमावत अलग-अलग भूमिकाओं में सक्रिय रहे हैं। संगठन के भीतर लंबे समय से जारी खींचतान और अलग-अलग गुटों की सक्रियता के कारण चुनावी समीकरणों में अंतिम समय तक बदलाव की संभावना बनी हुई है। पूर्व में एडहॉक कमेटी के सदस्यों के बीच फैसलों और टीम चयन को लेकर भी मतभेद सामने आते रहे हैं।
आरसीए से जुड़े कुछ पदाधिकारियों और पूर्व एडहॉक कमेटी के सदस्यों के विरुद्ध रजिस्ट्रार स्तर पर जारी कार्रवाई अथवा नोटिस चुनावी दावेदारी को प्रभावित कर सकते हैं। कोई प्रतिकूल आदेश आने की स्थिति में कुछ संभावित दावेदारों की पात्रता पर प्रश्न खड़ा हो सकता है।
डीडी कुमावत की नियुक्ति से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने फरवरी 2026 में उनके एडहॉक कमेटी के संयोजक के रूप में कार्य करने पर अंतरिम रोक भी लगाई थी। याचिका में आरसीए के संविधान के तहत उनकी पात्रता पर सवाल उठाए गए थे।
ऐसे हालात में पराक्रम सिंह मजबूत दावेदार के रूप में उभर सकते हैं। हालांकि आरसीए के कई जिला संघों में पद रिक्त होने और चुनावी समीकरण पूरी तरह स्पष्ट नहीं होने के कारण किसी नए नाम के सामने आने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
आरसीए में मार्च 2024 से एडहॉक व्यवस्था के माध्यम से कामकाज संचालित किया जा रहा था। इस दौरान एडहॉक कमेटी में कई बार बदलाव हुए, लेकिन निर्वाचित कार्यकारिणी का गठन नहीं हो सका। आंतरिक विवादों, जिला क्रिकेट संघों की मान्यता और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कानूनी मामलों के कारण चुनाव लगातार टलते रहे।
अब हाईकोर्ट की सीधी निगरानी और न्यायालय द्वारा नियुक्त प्रशासक की देखरेख में चुनाव होने से आरसीए में निर्वाचित कार्यकारिणी के गठन की उम्मीद बढ़ी है। चुनाव कार्यक्रम सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि राजस्थान क्रिकेट संघ को नई कार्यकारिणी कब तक मिल सकेगी।