



नई दिल्ली। पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों पर अंकुश लगाने के लिए लाया गया ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ मंगलवार को लंबी चर्चा के बावजूद लोकसभा से पारित नहीं हो सका। दोपहर 2 बजे शुरू हुई चर्चा रात 11 बजे तक करीब नौ घंटे चली, लेकिन कई सांसदों का संबोधन बाकी रहने के कारण विधेयक पर मतदान नहीं कराया जा सका।
रात 11 बजे लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। अब बुधवार को विधेयक पर दोबारा चर्चा होगी और इसके बाद मतदान कराया जाएगा। लोकसभा से पारित होने के बाद विधेयक को राज्यसभा में विचार और मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।
यह विधेयक वर्ष 2024 में बनाए गए ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम’ में संशोधन का प्रस्ताव करता है। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य पेपर लीक, संगठित नकल और परीक्षा प्रक्रिया में हस्तक्षेप जैसी गतिविधियों के विरुद्ध कानूनी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। विधेयक केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में पेश किया।
विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि युवाओं के भविष्य और सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता से खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने दावा किया कि कानून में प्रस्तावित संशोधन पेपर लीक करने वाले संगठित गिरोहों तथा परीक्षा संबंधी अनियमितताओं में शामिल लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने में मदद करेगा।
वहीं, विपक्षी सांसदों ने विधेयक के प्रावधानों को अपर्याप्त बताते हुए सरकार से पेपर लीक की घटनाओं, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी की जवाबदेही और प्रभावित अभ्यर्थियों को राहत देने के संबंध में जवाब मांगा। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने एनटीए के शीर्ष अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया।
विधेयक पर चर्चा के दौरान नवनियुक्त केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को लेकर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। संसद परिसर में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जोशी की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने दुष्कर्म के दोषियों की रिहाई का कथित रूप से समर्थन करने वाले व्यक्ति को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी है।
लोकसभा में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इसी विषय को उठाया। उनकी टिप्पणी पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध किया और प्रह्लाद जोशी ने आरोपों को प्रमाणित करने की चुनौती दी। इसके बाद प्रियंका गांधी की विवादित टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटा दिया गया।
लोकसभा में अभी कई सांसदों का विधेयक पर बोलना बाकी है। बुधवार को शेष चर्चा पूरी होने के बाद सरकार की ओर से जवाब दिया जाएगा और विधेयक को मतदान के लिए रखा जाएगा। इसके बाद इसे राज्यसभा भेजा जाएगा। विधेयक के प्रावधानों और परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही को लेकर बुधवार को भी सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है।