Saturday, 25 July 2026

आरपीएससी का नया रोडमैप: CBT क्षमता पांच गुना बढ़ाने और कॉपियों की जांच में AI के इस्तेमाल की तैयारी


आरपीएससी का नया रोडमैप: CBT क्षमता पांच गुना बढ़ाने और कॉपियों की जांच में AI के इस्तेमाल की तैयारी

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आरपीएससी के कार्यवाहक अध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह ने कराया इंटरनल ऑडिट, संभाग स्तर पर परीक्षा कॉम्प्लेक्स, आधुनिक सुरक्षा तकनीक और सख्त मॉनिटरिंग सिस्टम पर जोर

अजमेर। राजस्थान लोक सेवा आयोग ने भर्ती परीक्षाओं की गोपनीयता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को मजबूत करने के लिए नया रोडमैप तैयार किया है। प्रस्तावित व्यवस्था में मानवीय और भौतिक संसाधनों के विस्तार के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फेस रिकग्निशन, आधुनिक सर्वर और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। आवश्यक संसाधन और नई सुविधाएं विकसित करने के लिए राज्य सरकार से भी सहयोग लिया जाएगा।

करीब ढाई साल से आयोग के सदस्य रहे लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह को 20 जून 2026 को अध्यक्ष पद का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया था। पदभार संभालने के बाद उन्होंने आयोग की अलग-अलग शाखाओं और प्रक्रियाओं का इंटरनल ऑडिट करवाया। इस दौरान सामने आई कमियों को चिह्नित कर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई और सुधार कार्यों की नियमित निगरानी के लिए मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया गया है।

CBT क्षमता 5 हजार से बढ़ाकर 25 हजार करने का लक्ष्य

आरपीएससी की वर्तमान कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट यानी CBT क्षमता लगभग 5 हजार अभ्यर्थियों की बताई गई है। इसे पांच गुना बढ़ाकर एक साथ 25 हजार अभ्यर्थियों की परीक्षा आयोजित करने योग्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है। क्षमता बढ़ने के बाद बड़ी भर्ती परीक्षाओं को भी चरणबद्ध तरीके से कंप्यूटर आधारित प्रणाली से आयोजित किया जा सकेगा।

प्रस्तावित परीक्षा केंद्रों को डेडिकेटेड सर्वर, सुरक्षित बैकअप सिस्टम, 360 डिग्री कैमरों और फेस रिकग्निशन तकनीक से लैस करने की योजना है। इसका उद्देश्य अभ्यर्थी की पहचान सुनिश्चित करने के साथ प्रश्नपत्र और परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा को मजबूत करना है।

मूल्यांकन में AI के इस्तेमाल की तैयारी

आरपीएससी लिखित परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करने की संभावनाओं पर भी काम कर रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था में अलग-अलग परीक्षकों द्वारा दिए गए अंकों में निर्धारित सीमा से अधिक अंतर होने पर सिस्टम संबंधित उत्तर पुस्तिका को चिह्नित कर सकेगा।

रिपोर्ट के अनुसार यदि दो या अधिक परीक्षकों के अंकों में 20 प्रतिशत से अधिक का अंतर मिलता है तो उत्तर पुस्तिका की दोबारा जांच कराई जा सकती है। इससे मूल्यांकन की विसंगतियों को पहचानने और अभ्यर्थियों को अधिक पारदर्शी परिणाम उपलब्ध कराने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

संभाग स्तर पर बन सकते हैं स्थायी परीक्षा कॉम्प्लेक्स

आरपीएससी ने संभाग स्तर पर स्थायी परीक्षा कॉम्प्लेक्स विकसित करने का प्रस्ताव भी तैयार किया है। वर्तमान में दस्तावेज सत्यापन, साक्षात्कार और कई विशेष परीक्षाओं के लिए अभ्यर्थियों को अजमेर स्थित आयोग मुख्यालय आना पड़ता है।

प्रस्तावित परीक्षा कॉम्प्लेक्स में कंप्यूटर लैब, साक्षात्कार बोर्ड कक्ष, स्ट्रॉन्ग रूम, प्रतीक्षा कक्ष और सुरक्षा से जुड़ी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इससे अभ्यर्थियों को लंबी दूरी तय करने की परेशानी कम होने के साथ आयोग के अजमेर मुख्यालय पर दबाव भी घटेगा।

परीक्षा कैलेंडर का सख्ती से होगा पालन

भर्ती परीक्षाओं में अनिश्चितता कम करने के लिए आयोग परीक्षा कैलेंडर को सख्ती से लागू करने की दिशा में भी काम कर रहा है। RPSC ने वर्ष 2026 के लिए विभिन्न भर्ती परीक्षाओं का कैलेंडर पहले ही जारी किया है और आधिकारिक परीक्षा डैशबोर्ड पर विज्ञापन, परीक्षा तिथि, प्रवेश पत्र, उत्तर कुंजी और परिणाम से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

अधिकारियों और सदस्यों के बीच शाखाओं तथा कार्यों का स्पष्ट विभाजन किया गया है, ताकि परीक्षा आयोजन, परिणाम, साक्षात्कार और विभागीय पदोन्नति समिति से जुड़े कार्यों की नियमित समीक्षा हो सके। प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी तय करने से लंबित मामलों के समयबद्ध निस्तारण और प्रशासनिक जवाबदेही में सुधार की उम्मीद है।

नए रोडमैप का उद्देश्य आरपीएससी की मौजूदा मजबूत व्यवस्थाओं को बनाए रखते हुए कमियों को दूर करना और भर्ती प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, तकनीक आधारित एवं अभ्यर्थी-केंद्रित बनाना है। योजनाओं का अंतिम स्वरूप संसाधनों की उपलब्धता, राज्य सरकार की स्वीकृति और तकनीकी परीक्षण के बाद निर्धारित होगा।

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