



पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिन पूरे होने के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में वांगचुक ने जूस पीकर भूख हड़ताल खत्म की। नड्डा ने उन्हें जूस का पहला घूंट दिया।
वांगचुक ने 28 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में अनशन शुरू किया था। स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें पहले सफदरजंग अस्पताल और फिर दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर 21 जुलाई को मेदांता अस्पताल स्थानांतरित किया गया था। अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान भी उन्होंने अनशन जारी रखा।
वांगचुक ने सोशल मीडिया पर बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने उनसे भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि विभिन्न शर्तों पर लंबी बातचीत और देश में संभावित हिंसा की आशंका को देखते हुए अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने समर्थकों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की हिंसा से दूर रहने की अपील की।
केंद्र सरकार की ओर से यह आश्वासन दिए जाने की जानकारी सामने आई है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल विद्यार्थियों और युवाओं के खिलाफ दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। वांगचुक ने इससे पहले प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग नहीं करने और उनके विरुद्ध दर्ज मामलों पर उदारता से विचार करने की मांग रखी थी।
आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले विद्यार्थियों के परिवारों को मुआवजा देने का विषय भी बातचीत में उठाया गया था। हालांकि सरकार और वांगचुक के बीच बनी सहमति की सभी शर्तों तथा किसी औपचारिक लिखित दस्तावेज का पूरा विवरण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने 48 घंटे से भी कम समय में दूसरी बार वांगचुक से मुलाकात की। गुरुवार देर रात हुई बातचीत के बाद गतिरोध समाप्त हुआ और वांगचुक ने अनशन तोड़ने की सहमति दी। इस दौरान लेह एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ पदाधिकारी भी अस्पताल में मौजूद थे।
वांगचुक ने अनशन समाप्त करने के बाद सरकार, सांसदों, चिकित्सकों और अपने समर्थकों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि वह स्वस्थ होकर शिक्षा और सामाजिक कार्यों से जुड़े अपने दायित्वों की ओर लौटना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वांगचुक के अनशन समाप्त करने के बाद उनके स्वास्थ्य को लेकर सोशल मीडिया पर संदेश जारी किया। उन्होंने वांगचुक से चिकित्सकों की सलाह के अनुसार अपनी दिनचर्या अपनाने और अनशन के दौरान कम हुआ वजन जल्द वापस प्राप्त करने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की।
वांगचुक के अनशन समाप्त करने से कुछ समय पहले प्रधानमंत्री ने पेपर लीक के मामलों में फास्ट ट्रैक अदालतों और कठोर दंड के प्रावधानों से संबंधित प्रस्ताव को केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष रखने की घोषणा की थी। सरकार ने इससे जुड़े विधायी प्रस्ताव को संसद में शीघ्र लाने की बात भी कही है।
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने वांगचुक के अनशन समाप्त करने पर राहत और खुशी जताई। उन्होंने वांगचुक के साहस और त्याग के लिए उनका आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण आंदोलन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जारी रहेगा।
जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन 20 जून से चल रहा है और शुक्रवार को इसका 35वां दिन है। आंदोलनकारी नीट पेपर लीक मामले में राजनीतिक एवं प्रशासनिक जवाबदेही, परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। गुरुवार को भी हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर मौजूद थे।
CJP ने 24 जुलाई को ‘हर जिला, एक दिन, एक मांग’ के नारे के साथ देशव्यापी शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया है। संगठन ने छात्र संघों और नागरिक संगठनों से आवश्यक प्रशासनिक अनुमति लेकर जिला स्तर पर प्रदर्शन आयोजित करने की अपील की है।
वांगचुक का अनशन समाप्त होने के बावजूद छात्र आंदोलन के प्रमुख मुद्दों पर गतिरोध पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सरकार परीक्षा सुधार, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई और आंदोलनकारियों के साथ संवाद की बात कर रही है, जबकि प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और व्यापक संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित करने पर अड़े हुए हैं।