



नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात विद्यार्थियों के नाम वीडियो संदेश जारी कर पेपर लीक को लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय बताया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों और दोषियों के विरुद्ध कठोर दंड से संबंधित प्रस्ताव शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद सरकार इससे जुड़े विधायी मसौदे को संसद में पेश कर शीघ्र पारित कराने का प्रयास करेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं का हित और उनका भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पेपर लीक करने वालों को जल्द से जल्द सख्त सजा दिलाने और मामलों के समयबद्ध निस्तारण के लिए संबंधित विभागों एवं अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पेपर लीक कोई छोटी या सामान्य घटना नहीं है। ऐसी घटनाओं से लाखों विद्यार्थियों की वर्षों की मेहनत प्रभावित होती है और उनके माता-पिता को भी मानसिक एवं आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटना सामने आने के बाद पिछले करीब ढाई महीनों में सरकार ने कई कदम उठाए हैं। मामले में शामिल आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है और परीक्षा व्यवस्था की कमियों को दूर करने के लिए संबंधित एजेंसियों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की तत्काल प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना था कि विद्यार्थियों का एक शैक्षणिक वर्ष बर्बाद न हो। इसके लिए कम से कम समय में दोबारा परीक्षा आयोजित कराई गई और करीब 22 लाख विद्यार्थियों की परीक्षा प्रक्रिया पूरी की गई।
उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा का परिणाम भी 19 जुलाई को जारी कर दिया गया, ताकि प्रवेश प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
मोदी ने कहा कि पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें गठित करने और दोषियों के विरुद्ध कठोर दंड के प्रावधान तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। संबंधित विभागों ने गुरुवार देर रात इसका मसौदा प्रधानमंत्री को भेज दिया।
उन्होंने बताया कि इस मसौदे पर शुक्रवार की केंद्रीय मंत्रिमंडल बैठक में चर्चा की जाएगी। मंत्रिमंडल के विचार-विमर्श के बाद प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाएगा।
संसद के मानसून सत्र का दूसरा सप्ताह सोमवार, 27 जुलाई 2026 से शुरू होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार प्रस्तावित कानून को जल्द से जल्द संसद में लाने और पारित कराने का पूरा प्रयास करेगी।
हालांकि प्रस्तावित विधेयक में सजा की अवधि, जुर्माने, विशेष अदालतों की संरचना और जांच प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत प्रावधान केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी और विधेयक के संसद में प्रस्तुत होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार केवल परीक्षा दोबारा कराने या परिणाम घोषित करने तक सीमित नहीं रहेगी। पेपर लीक में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, जिससे भविष्य में कोई भी विद्यार्थियों की मेहनत और भविष्य से खिलवाड़ करने का साहस न करे।
उन्होंने कहा कि फास्ट ट्रैक अदालतों का उद्देश्य मामलों की सुनवाई में होने वाली देरी को कम करना और दोष सिद्ध होने पर जिम्मेदार लोगों को शीघ्र कठोर दंड दिलाना है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी कहा है कि यह कदम विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे निर्णयों की श्रृंखला का हिस्सा है।