



जयपुर। राजस्थान में पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव में हो रही देरी को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने हाईकोर्ट में राज्य सरकार के संबंधित विभागों को जिम्मेदार ठहराया है। राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने अदालत को बताया कि आयोग चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला आरक्षण का निर्धारण नहीं होने के कारण चुनाव कार्यक्रम घोषित करना संभव नहीं है।
पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयुक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में उपस्थित हुए। उन्होंने कहा कि आरक्षण की लॉटरी निकालना पंचायतीराज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग की जिम्मेदारी है तथा आयोग इस संबंध में दोनों विभागों को छह पत्र लिख चुका है।
राजेश्वर सिंह ने कोर्ट को बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाता सूचियां तैयार कर ली गई हैं। चुनाव के लिए आवश्यक ईवीएम की व्यवस्था भी दूसरे राज्यों से की जा चुकी है और आयोग के स्तर पर लगभग सभी तैयारियां पूरी हैं।
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी बाधा वार्डों और अध्यक्ष पदों के लिए आरक्षण का निर्धारण नहीं होना है। जब तक यह स्पष्ट नहीं होगा कि कौन-सा वार्ड किस वर्ग के लिए आरक्षित है, तब तक उम्मीदवारों की पात्रता और चुनाव प्रक्रिया तय नहीं की जा सकती।
निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि सरकार आरक्षण की प्रक्रिया पूरी कर आवश्यक विवरण उपलब्ध करा दे तो आयोग दो दिन के भीतर चुनाव कार्यक्रम घोषित कर सकता है।
आयोग ने अदालत में कहा कि एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं को आरक्षण देना कानूनी एवं संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा है। पिछले आदेश में हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट समय पर नहीं आने की स्थिति में उसके बिना भी चुनाव कराए जा सकते हैं।
हालांकि, राज्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला आरक्षण का निर्धारण राज्य सरकार को करना ही होगा। इसके अभाव में आयोग के लिए चुनाव घोषित करना व्यावहारिक रूप से कठिन है।
राजेश्वर सिंह ने बताया कि आरक्षण संबंधी विवरण उपलब्ध कराने के लिए आयोग ने कुल छह पत्र लिखे हैं। इनमें तीन पत्र पंचायतीराज विभाग और तीन स्वायत्त शासन विभाग को भेजे गए।
आयोग के अनुसार, विभागों की ओर से बताया गया कि ओबीसी राजनीतिक आरक्षण आयोग 14 अगस्त तक रिपोर्ट देगा। इसके बाद आरक्षण की लॉटरी निकालकर वार्डों को एससी, एसटी, ओबीसी और महिला वर्ग के लिए आरक्षित करने की प्रक्रिया 21 अगस्त तक पूरी की जाएगी।
हाईकोर्ट ने पूर्व में चुनाव 31 जुलाई तक कराने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के लिए 14 अगस्त और आरक्षण लॉटरी के लिए 21 अगस्त की समयसीमा बताए जाने पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई।
खंडपीठ ने सवाल किया कि जब चुनाव कराने की अंतिम तारीख पहले से तय थी तो अगस्त तक की नई समयसीमा किस आधार पर निर्धारित की गई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह 14 अगस्त तक इंतजार करने के पक्ष में नहीं है।
अदालत ने सरकार और संबंधित आयोगों से जुलाई के भीतर ही निश्चित तारीख बताने को कहा है।
राज्य निर्वाचन आयुक्त ने कोर्ट में कहा कि आरक्षण का विवरण मिले बिना चुनाव घोषित करने पर यह तय नहीं हो सकेगा कि किस वर्ग का उम्मीदवार किस वार्ड से चुनाव लड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि आयोग ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के बिना चुनाव कराने पर विचार कर सकता है, लेकिन एससी, एसटी और महिला आरक्षण की जानकारी अनिवार्य रूप से चाहिए। यह विवरण उपलब्ध कराना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने अदालत को बताया कि पंचायत और निकाय चुनावों के लिए करीब 90 दिन का कार्यक्रम तैयार किया गया है। सरकार ने समयसीमा बढ़ाने के लिए आवेदन पेश करने की जानकारी भी आयोग को दी थी।
आयोग के अनुसार, सरकार ने बताया था कि 14 अगस्त तक ओबीसी आयोग की रिपोर्ट आ जाएगी और 21 अगस्त तक आरक्षण की लॉटरी निकालकर आवश्यक विवरण उपलब्ध करा दिया जाएगा।
चुनावों में लगातार हो रही देरी पर हाईकोर्ट ने सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग और ओबीसी आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने कहा कि आदेश की पालना नहीं होने की स्थिति में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।
खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कराने में असमर्थ रहता है तो अदालत किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को नियुक्त कर चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने की व्यवस्था पर विचार कर सकती है।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि सोमवार, 20 जुलाई 2026 को अगली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और संबंधित आयोग तीन प्रमुख तारीखें स्पष्ट करें।
इनमें ओबीसी आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुत करने की तारीख, आरक्षण लॉटरी निकालने की तारीख और चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की तारीख शामिल हैं। अदालत ने संकेत दिया है कि ये तारीखें अगस्त के बजाय जुलाई के भीतर होनी चाहिए।
