



टोंक। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने राजस्थान की चिकित्सा, शिक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता इन तीनों व्यवस्थाओं की बिगड़ती स्थिति से परेशान है और कांग्रेस आगामी मानसून सत्र में जनहित से जुड़े इन मुद्दों को मजबूती से उठाएगी।
शुक्रवार को टोंक में मीडिया से बातचीत करते हुए पायलट ने कहा कि सरकार विज्ञापनों, आयोजनों और अपनी उपलब्धियों के प्रचार में व्यस्त है, जबकि धरातल पर अस्पतालों, विद्यालयों और कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार खराब हो रही है।
सचिन पायलट ने शिक्षा व्यवस्था, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ी होने से युवाओं का व्यवस्था से विश्वास उठ रहा है।
पायलट ने कहा कि लाखों विद्यार्थी मेहनत करके परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के कारण स्वयं को वंचित महसूस करते हैं। शिक्षा युवा पीढ़ी के भविष्य का सबसे महत्वपूर्ण आधार है, इसलिए इसमें जवाबदेही तय करना आवश्यक है।
उन्होंने दावा किया कि सोनम वांगचुक पिछले करीब 19-20 दिनों से जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे हैं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठा रहे हैं। पायलट ने कहा कि सरकार को आंदोलनकारियों से संवाद कर उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
पायलट ने कहा कि लोकतांत्रिक सरकार की जिम्मेदारी है कि किसी भी आंदोलन या जन-असंतोष को नजरअंदाज करने के बजाय संबंधित लोगों से संवाद करे। सरकार का कोई प्रतिनिधि आंदोलनकारियों से मिले, उनकी बात सुने और समाधान का भरोसा दिलाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जनाक्रोश और युवाओं की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिखा रही है। पायलट ने मांग की कि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए जवाबदेही तय की जाए और आवश्यक राजनीतिक निर्णय लिए जाएं।
सचिन पायलट ने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत के मामलों को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि कई महिलाओं की जान चली गई, लेकिन अब तक बड़े स्तर पर जिम्मेदारी तय नहीं की गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केवल छोटे अधिकारियों के तबादले करके सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। समस्या किसी एक अस्पताल या जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश की पूरी सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित है।
पायलट ने कहा कि बीकानेर, कोटा या किसी अन्य जिले के सरकारी अस्पतालों में जाने पर चिकित्सा संसाधनों, जवाबदेही और प्रबंधन की कमी दिखाई देती है। इतनी गंभीर घटनाओं के बावजूद सरकार की प्रतिक्रिया असंवेदनशील और गैर-जिम्मेदाराना है।
उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं की मौत के मामलों की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। जांच में उपचार व्यवस्था, दवाओं की गुणवत्ता, ऑपरेशन प्रक्रिया और प्रशासनिक लापरवाही सहित सभी पहलुओं को शामिल किया जाए।
पायलट ने कहा कि राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर पूरे देश में सवाल उठ रहे हैं और आम जनता का सरकारी अस्पतालों से विश्वास कमजोर हो रहा है। दोषियों पर कार्रवाई और प्रभावित परिवारों को न्याय मिलना आवश्यक है।
पायलट ने कहा कि किसी भी राज्य में शिक्षा, चिकित्सा और कानून-व्यवस्था सरकार की कार्यक्षमता के प्रमुख पैमाने होते हैं। उनके अनुसार, राजस्थान सरकार तीनों मोर्चों पर विफल रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय बड़े आयोजनों, विज्ञापनों और प्रचार पर धन खर्च कर रही है। अस्पतालों और विद्यालयों की वास्तविक स्थिति सुधारने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए जा रहे।
कर्मचारियों और शिक्षकों के तबादलों पर टिप्पणी करते हुए पायलट ने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक प्रतिशोध और एक विशेष विचारधारा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से स्थानांतरण कर रही है।
उन्होंने कहा कि तबादलों के लिए स्पष्ट नीति, नियम और वस्तुनिष्ठ मापदंड होने चाहिए। राजनीतिक हित साधने या किसी से दुश्मनी निकालने के लिए कर्मचारियों को दूरदराज के क्षेत्रों में भेजना उचित नहीं है।
पायलट ने कहा कि चुनाव के बाद सरकार पूरे प्रदेश और सभी नागरिकों की होती है। कर्मचारियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार लंबे समय तक जनता स्वीकार नहीं करती।
राजनीतिक भाषा और नेताओं के आचरण पर पायलट ने कहा कि सत्ता में रहते और पद से हटने के बाद नेताओं के स्वर बदल जाते हैं। फिर भी राजनीतिक व्यक्तियों को अपने आचरण और भाषा से समाज के सामने सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध मजबूत, सैद्धांतिक और वैचारिक होना चाहिए, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणी, अपशब्द और सोशल मीडिया पर चरित्र हनन लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है। राजनीतिक नेताओं को संयम और समझदारी से काम करना चाहिए।
सचिन पायलट ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि नई व्यवस्था के कारण कई वाहन खराब हो रहे हैं और वाहन मालिकों को माइलेज तथा इंजन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदूषण और तेल आयात कम करने के प्रयासों का सभी समर्थन करते हैं, लेकिन नई नीति लागू करने से पहले वाहन निर्माता कंपनियों, तकनीकी विशेषज्ञों और आम उपभोक्ताओं को विश्वास में लिया जाना चाहिए था।
पायलट ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि एथेनॉल नीति को पर्याप्त तकनीकी तैयारी और विकल्पों के बिना लागू करने से आम वाहन मालिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
पायलट ने कहा कि छोटे वाहन और मोटरसाइकिल खरीदने वाले लोग अपनी मेहनत की कमाई से वाहन लेते हैं। ईंधन नीति के कारण इंजन खराब होने या माइलेज कम मिलने की स्थिति में उनकी जिम्मेदारी कौन लेगा, सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बिना पर्याप्त चर्चा के नीतियां लागू कर रही है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इन नीतियों से आम जनता को क्या लाभ मिलेगा और वाहन संबंधी तकनीकी समस्याओं का समाधान कैसे किया जाएगा।
सचिन पायलट ने कहा कि राजस्थान की जनता में शिक्षा, चिकित्सा, कानून-व्यवस्था, कर्मचारियों के तबादलों और महंगाई से जुड़े मामलों को लेकर आक्रोश है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष के विधायक आगामी मानसून सत्र में इन सभी मुद्दों को विधानसभा में प्रमुखता से उठाएंगे और सरकार से जवाब मांगेंगे।