Friday, 10 July 2026

रोहिंग्या मानव तस्करी मामले में हाईकोर्ट ने तीन आरोपियों की जमानत खारिज की


रोहिंग्या मानव तस्करी मामले में हाईकोर्ट ने तीन आरोपियों की जमानत खारिज की

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जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने म्यांमार मूल के तीन रोहिंग्या आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने मोहम्मद उस्मान, शफी आलम उर्फ शोफी आलम और रबी उल इस्लाम की जमानत अर्जी को नामंजूर कर दिया।

तीनों आरोपियों पर आरोप है कि वे पिछले कई वर्षों से भारत में अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर रह रहे थे। इस दौरान वे अवैध रूप से बांग्लादेश भी गए। आरोपों के अनुसार वर्ष 2023 में गिरफ्तारी से पहले ये आरोपी बांग्लादेश से 30 लड़कियों को अवैध तरीके से भारत लेकर आए और उन्हें हैदराबाद, जम्मू-कश्मीर, असम और राजस्थान सहित अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाया गया।

NIA के अनुसार आरोपियों के खिलाफ मानव तस्करी से जुड़े कई मामलों में गंभीर आरोप हैं। खुफिया इनपुट के आधार पर NIA ने आरोपियों को राजस्थान और हरियाणा से गिरफ्तार किया था। वर्ष 2024 में जयपुर स्थित NIA की विशेष अदालत से जमानत खारिज होने के बाद आरोपियों ने राजस्थान हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी।

फर्जी दस्तावेज बनवाने का भी आरोप
NIA की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता स्नेहदीप ख्यालिया ने अदालत को बताया कि तीनों आरोपी वर्ष 2011-12 में बांग्लादेश के रास्ते भारत में आए थे। इनमें मोहम्मद उस्मान जम्मू-कश्मीर में, शफी आलम तेलंगाना में और रबी उल इस्लाम नूंह, हरियाणा में पहचान छिपाकर रह रहा था।

NIA की ओर से दलील दी गई कि आरोपियों ने भारत में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आधार कार्ड बनवाए, मोबाइल सिम लिए और बैंक खाते भी खुलवाए। आरोप है कि इनकी साजिश रोहिंग्या लड़कियों को भारत में बसाने की थी, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उनका इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों में किया जा सके। इसी कथित साजिश के तहत कई लड़कियों को भारत लाकर अलग-अलग शहरों में उनकी शादियां कराए जाने का भी आरोप लगाया गया।

गवाहों और पीड़ितों के बयान बाकी होने की दलील
NIA की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि यदि आरोपियों को जमानत दी जाती है, तो उनके देश छोड़कर भागने की आशंका है। साथ ही मामले में अभी कई महत्वपूर्ण गवाहों, पीड़ितों और शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज होना बाकी हैं। ऐसे में आरोपियों को जमानत देना जांच और ट्रायल की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है।

वहीं, आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि उन्हें मामले में झूठा फंसाया गया है। बचाव पक्ष ने कहा कि महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं और आरोपी पिछले दो वर्षों से अधिक समय से जेल में बंद हैं। ट्रायल में समय लगने की संभावना को देखते हुए उन्हें जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता, आरोपों की प्रकृति और अभियोजन पक्ष की आपत्तियों को देखते हुए तीनों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी।

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