



अलवर/भुवनेश्वर। ओडिशा कैडर के 2013 बैच के आईपीएस अधिकारी जगमोहन मीणा के इस्तीफे का मामला इन दिनों चर्चा में है। अलवर जिले की रैणी तहसील के प्रागपुरा गांव के लोग इस खबर से स्तब्ध हैं, क्योंकि जगमोहन मीणा इसी गांव के मूल निवासी हैं।
जगमोहन मीणा ने अपने निर्णय को व्यक्तिगत बताया है। उनका कहना है कि यह फैसला परिवार और करीबी दोस्तों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद सोच-समझकर लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इस निर्णय के पीछे किसी प्रकार का दबाव या बाहरी कारण नहीं है।
जगमोहन ने ओडिशा के लोगों के प्रति आभार जताया है। साथ ही अपने करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपने के लिए ओडिशा सरकार को भी धन्यवाद दिया है।
पिता बोले- फैसला टालने के लिए कहा है
जगमोहन मीणा के पिता नंदराम मीणा ने बताया कि उनका बेटा शुरू से ही मेधावी छात्र रहा है। उन्होंने कहा कि जगमोहन ने परिवार से बात करने के बाद ही इस्तीफा पेश किया है, जो फिलहाल विचाराधीन है।
नंदराम मीणा के अनुसार, पिछले दो दिनों से लगातार लोगों के फोन आ रहे हैं। उन्होंने बेटे से बात कर फैसला टालने के लिए कहा है। उनका कहना है कि यदि जगमोहन इस्तीफा देते हैं, तो वे देश की टॉप मैनेजमेंट व्यवस्था में अपना योगदान देंगे, क्योंकि वे आईआईटी से पढ़े हुए हैं।
औपचारिक स्वीकृति अभी बाकी
ओडिशा सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, जगमोहन मीणा का त्यागपत्र प्रक्रिया के लिए भेज दिया गया है, लेकिन सक्षम प्राधिकारी से औपचारिक स्वीकृति मिलना अभी बाकी है।
अखिल भारतीय सेवा नियमों के तहत किसी आईपीएस अधिकारी का इस्तीफा केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से स्वीकार किए जाने के बाद ही प्रभावी होता है। ऐसे में औपचारिक स्वीकृति मिलने तक जगमोहन मीणा सेवा में बने रहेंगे।
इन जिम्मेदारियों से चर्चा में रहे जगमोहन मीणा
वर्ष 1989 में जन्मे जगमोहन मीणा वर्तमान में भुवनेश्वर में पुलिस उपायुक्त के पद पर कार्यरत हैं। वे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी के पूर्व छात्र हैं।
जगमोहन मीणा को पहली पोस्टिंग कालाहांडी जिले में उप-मंडल पुलिस अधिकारी यानी एसडीपीओ के रूप में मिली थी। वर्ष 2019 में वे ओडिशा के माओवादी प्रभावित जिले मालकानगिरि में पुलिस अधीक्षक रहते हुए माओवादी विरोधी अभियानों का नेतृत्व करने के कारण चर्चा में आए।
उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में जिम्मेदारी संभाली। बाद में उन्हें कटक में पुलिस उपायुक्त के रूप में तैनात किया गया। मार्च 2025 में उन्होंने भुवनेश्वर के डीसीपी के रूप में कार्यभार संभाला।
अपनी करीब 13 साल की सेवा के दौरान जगमोहन मीणा को उत्कृष्ट कार्य के लिए कई पदक भी मिल चुके हैं। उनके इस्तीफे की खबर के बाद प्रशासनिक और पुलिस हलकों के साथ-साथ उनके पैतृक गांव में भी इस फैसले को लेकर चर्चा तेज है।