



जयपुर। कजाकिस्तान से एमबीबीएस कर राजस्थान में प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों के फर्जी एफएमजीई सर्टिफिकेट मामले में एसओजी की जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। जांच में सामने आया है कि राज्य में सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रैक्टिस कर रहे 88 और डॉक्टरों के फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन यानी एफएमजीई सर्टिफिकेट संदिग्ध या फर्जी पाए गए हैं। इन डॉक्टरों की गिरफ्तारी की तैयारी की जा रही है।
इस मामले में अब तक 27 डॉक्टर गिरफ्तार किए जा चुके हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, अधिकतर डॉक्टर कस्बों और छोटे शहरों में प्रैक्टिस कर रहे थे। विदेश से एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों को भारत में पंजीयन से पहले निर्धारित एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा पास करना जरूरी होता है, लेकिन आरोप है कि कई लोगों ने फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन करवा लिया।
करीब डेढ़ सौ डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन पर संदेह
एसओजी एफएमजी डेटा और राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रेशन डेटा का मिलान कर रही है। प्रारंभिक जांच में करीब डेढ़ सौ डॉक्टरों के दस्तावेजों में गड़बड़ी सामने आने की बात कही जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि कई डॉक्टरों ने फर्जी एफएमजीई सर्टिफिकेट के आधार पर सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रैक्टिस शुरू कर दी थी।
25 से 30 लाख में पढ़ाई से रजिस्ट्रेशन तक का सौदा
अब तक गिरफ्तार 27 डॉक्टरों से पूछताछ में एसओजी को महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। पूछताछ में सामने आया कि नीट क्वालिफाई नहीं करने वाले कुछ युवकों से दलालों ने संपर्क किया था। आरोप है कि कजाकिस्तान से एमबीबीएस कराने और बिना वास्तविक एफएमजीई पास किए राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन करवाने का सौदा 25 से 30 लाख रुपए में किया जाता था।
जांच एजेंसी के अनुसार, एक युवक को कजाकिस्तान भेजने के बाद उसी नेटवर्क के जरिए कई अन्य लोगों को विदेश से एमबीबीएस करवाया गया। इसके बाद कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्रेशन करवाया गया। इस पूरे नेटवर्क में करीब 25 करोड़ रुपए के लेन-देन या खर्च की आशंका जताई जा रही है।
मास्टरमाइंड पर रिश्तेदारों को भी एमबीबीएस करवाने का आरोप
एसओजी की जांच में गिरोह के मास्टरमाइंड के रूप में भानाराम माली का नाम सामने आया है। आरोप है कि उसने पहले अपने रिश्तेदारों को एमबीबीएस करवाया और बाद में उनके संपर्क में आए अन्य युवकों को भी इस नेटवर्क के जरिए विदेश भेजा गया। इसके बाद फर्जी दस्तावेज तैयार कर रजिस्ट्रेशन करवाने की प्रक्रिया पूरी कराई गई।
जल्द और गिरफ्तारियां संभव
एसओजी एडीजी विशाल बंसल के अनुसार, विदेश से एमबीबीएस कर भारत लौटे सौ से ज्यादा डॉक्टरों के एफएमजी रजिस्ट्रेशन में फर्जीवाड़ा सामने आया है। विदेश से एमबीबीएस कराने और फर्जी रजिस्ट्रेशन करवाने में एक बड़ा गिरोह सक्रिय था, जिसका खुलासा किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि एफएमजी डेटा और आरएमसी डेटा की जांच जारी है। डेटा मिलान और दस्तावेजों की जांच के आधार पर जल्द ही कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। फिलहाल एसओजी यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में दलालों, दस्तावेज तैयार करने वालों और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में सहयोग करने वाले अन्य लोगों की क्या भूमिका रही।
मामले ने चिकित्सा व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच पूरी होने के बाद फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रैक्टिस करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।