Thursday, 09 July 2026

27 साल तक ग्रेच्युटी नहीं देने पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार और हाईकोर्ट प्रशासन पर एक लाख रुपए का जुर्माना


27 साल तक ग्रेच्युटी नहीं देने पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार और हाईकोर्ट प्रशासन पर एक लाख रुपए का जुर्माना

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जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने 27 साल पहले रिटायर हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश को ग्रेच्युटी की बकाया राशि अदा नहीं किए जाने पर सरकार और हाईकोर्ट प्रशासन पर सख्ती दिखाई है। अदालत ने मामले में एक लाख रुपए का जुर्माना लगाते हुए याचिकाकर्ता को बकाया राशि 9 प्रतिशत ब्याज सहित अदा करने के निर्देश दिए हैं।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश मातादीन गर्ग की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में कहा गया था कि याचिकाकर्ता की उम्र 81 वर्ष है और ग्रेच्युटी की राशि नहीं मिलने से उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

1999 में हुए थे सेवानिवृत्त
मातादीन गर्ग मार्च 1999 में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद दो साल तक सरकारी भवन खाली नहीं करने के कारण संपदा निदेशक ने हाईकोर्ट प्रशासन को पत्र लिखा था। इसमें कहा गया था कि उनकी ग्रेच्युटी में से 57 हजार 454 रुपए काटकर शेष राशि जारी की जाए।

इसके बावजूद याचिकाकर्ता को 27 साल बाद भी बकाया ग्रेच्युटी राशि का भुगतान नहीं किया गया। याचिका में बताया गया कि इस संबंध में याचिकाकर्ता ने संबंधित अधिकारियों को कई बार अभ्यावेदन भी दिए, लेकिन उन पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

ब्याज सहित भुगतान के निर्देश
हाईकोर्ट ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए याचिकाकर्ता को बकाया राशि 9 प्रतिशत ब्याज सहित अदा करने के निर्देश दिए। अदालत ने लंबे समय तक भुगतान नहीं किए जाने को गंभीर माना और सरकार तथा हाईकोर्ट प्रशासन पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया।

मामला सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी के सेवा लाभों से जुड़ा होने के कारण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत के आदेश के बाद अब याचिकाकर्ता को लंबित ग्रेच्युटी राशि ब्याज सहित मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

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