



जयपुर/चूरू। राजस्थान में बसों के संचालन में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। रालसा के एक माह के विशेष निरीक्षण एवं प्रवर्तन अभियान के दौरान चूरू में एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर पर तीन बसें संचालित होती मिलीं। इनमें एक बस चूरू रूट पर, दूसरी झुंझुनूं रूट पर और तीसरी चूरू के एक स्कूल में चलाई जा रही थी।
प्रदेश में लगातार हो रहे बस हादसों के बाद राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से लग्जरी बसों, स्लीपर बसों और यात्री वाहनों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत जयपुर और चूरू में हुई कार्रवाई में परिवहन विभाग ने 4 बसों को जब्त किया है।
चूरू में एक ही नंबर पर तीन बसें
चूरू में परिवहन निरीक्षक रॉबिन सिंह की जांच में बस नंबर RJ 18 PB 1433 पर तीन अलग-अलग बसों का संचालन होना पाया गया। जांच में सामने आया कि तीनों बसों के चेसिस नंबर वाले हिस्से को काटकर उन पर दोबारा कथित रूप से फर्जी पंचिंग की गई थी।
प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि ये बसें या तो कबाड़ से खरीदी गई थीं या फिर चोरी के वाहनों को मॉडिफाई कर सड़क पर उतारा गया था। परिवहन विभाग के अनुसार, जब्त की गई तीनों बसों में से कोई भी बस RJ 18 PB 1433 नंबर की मूल बस नहीं निकली। ऐसे में जिस बस के दस्तावेजों और रजिस्ट्रेशन नंबर पर यह पूरा संचालन किया जा रहा था, उस असली बस का पता लगाने की कार्रवाई की जा रही है।
तीनों बसें अलग-अलग ट्रैवल्स एजेंसियों के नाम पर संचालित की जा रही थीं। परिवहन विभाग ने इन्हें अलग-अलग रूटों से जब्त कर चूरू डीटीओ कार्यालय में सीज कर दिया है। मामले में वाहन मालिक सतवीर सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
जयपुर में नागालैंड रजिस्ट्रेशन की बस पर एमपी नंबर प्लेट
जयपुर में भी जांच के दौरान विजय ट्रैवल्स की एक बस संदिग्ध पाई गई। बस पर मध्य प्रदेश की नंबर प्लेट लगी हुई थी, लेकिन जांच में उसका मूल रजिस्ट्रेशन नागालैंड का निकला। दस्तावेजों और वाहन की पहचान में गड़बड़ी मिलने के बाद बस को जब्त कर जांच शुरू कर दी गई है।
इस तरह के मामलों ने यात्री सुरक्षा और परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ही नंबर पर कई बसों का संचालन न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि किसी दुर्घटना की स्थिति में वाहन की वास्तविक पहचान और जिम्मेदारी तय करने में भी बड़ी बाधा बन सकता है।
दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के प्रावधान
परिवहन विभाग के अनुसार, ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। संबंधित प्रावधानों के तहत एक साल तक की जेल और 15 से 20 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है।
रालसा के विशेष अभियान के तहत अब प्रदेशभर में बसों की जांच और तेज होने की संभावना है। परिवहन विभाग, यातायात पुलिस और संबंधित एजेंसियां दस्तावेजों, चेसिस नंबर, फिटनेस, परमिट और नंबर प्लेट की गहन जांच कर रही हैं, ताकि अवैध और असुरक्षित वाहनों को सड़क से हटाया जा सके।
