



जोधपुर। हरियाणा प्रभारी और राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया ने मुख्यमंत्री के बार-बार दिल्ली जाने को लेकर विपक्ष द्वारा दिए जा रहे बयानों पर कांग्रेस पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली जाने का मतलब प्रदेश के लिए पैरवी करना, योजनाओं का रिव्यू करना और बजट लाना होता है। यह कांग्रेस में होता है कि “दिल्ली जाओ, कुर्सी बचाओ” या “दिल्ली जाओ, कांग्रेस बचाओ”। भाजपा में ऐसा नहीं होता।
जोधपुर में सोमवार को मीडिया से बातचीत के दौरान हरियाणा प्रभारी और राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया ने कहा कि मुख्यमंत्री भी कह चुके हैं कि जब भी वे दिल्ली जाते हैं, प्रदेश के लिए कुछ न कुछ लेकर आते हैं और वे लेकर भी आए हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली जाकर प्रदेश की योजनाओं, विकास कार्यों और बजट से जुड़े विषयों पर केंद्र सरकार से समन्वय करना शासन व्यवस्था का सामान्य हिस्सा है।
परिसीमन से जुड़े सवाल पर हरियाणा प्रभारी और राज्यसभा सांसद पूनिया ने कहा कि यह सब एक सिस्टम का हिस्सा है, लेकिन राहुल गांधी, कांग्रेस और अशोक गहलोत किसी भी सिस्टम को मानने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संस्थागत प्रक्रियाओं का सम्मान करना चाहिए।
रिफाइनरी को लेकर गहलोत पर साधा निशाना
मीडिया द्वारा रिफाइनरी के क्रेडिट को लेकर पूछे गए सवाल पर हरियाणा प्रभारी और राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया ने कहा कि जनता घोषणाएं और भाषण नहीं, बल्कि परिणाम देखती है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 में जब कांग्रेस सरकार की विदाई तय हो चुकी थी, तब सोनिया गांधी को बुलाकर रिफाइनरी की शुरुआत करवाई गई थी।
हरियाणा प्रभारी और राज्यसभा सांसद पूनिया ने कहा कि राजस्थान में लंबे समय तक केंद्र और राज्य में अलग-अलग सरकारें रहने का असर विकास योजनाओं पर पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब केंद्र में मोदी सरकार और राज्य में गहलोत सरकार थी, तब जल जीवन मिशन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। उन्होंने कहा कि गहलोत ने केंद्र सरकार की कई योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू होने से रोका।
रिफाइनरी को लेकर हरियाणा प्रभारी और राज्यसभा सांसद पूनिया ने कहा कि घोषणा भले ही अशोक गहलोत ने की हो, लेकिन उसे धरातल पर लाने का काम भाजपा सरकार ने किया है। उन्होंने कहा कि अशोक गहलोत को इस काम की प्रशंसा करनी चाहिए और अच्छी योजनाओं की तारीफ करने में कंजूसी नहीं करनी चाहिए।
नई जिम्मेदारी पर बोले- सामान्य कार्यकर्ता से शुरू किया सफर
नई जिम्मेदारी मिलने पर हरियाणा प्रभारी और राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया ने कहा कि उन्होंने एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में काम शुरू किया था और समय के साथ उनकी भूमिका बदलती रही। उन्होंने कहा कि संगठन में कार्यकर्ता की मेहनत और जिम्मेदारी के आधार पर उसे अलग-अलग दायित्व मिलते हैं।
ऊंट संरक्षण को लेकर चल रही रिसर्च
हरियाणा प्रभारी और राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया ने ऊंटों के संरक्षण को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किताबों में पढ़ा जाता है कि ऊंट रेगिस्तान का जहाज है और राजस्थान की पहचान के साथ ऊंट का गहरा संबंध है। उन्होंने बताया कि बीकानेर स्थित नेशनल केमल रिसर्च सेंटर ऊंटों की प्रजाति, संरक्षण और उनसे जुड़े उत्पादों पर काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि ऊंट के दूध और उससे बनने वाले उत्पादों, जैसे आइसक्रीम आदि पर भी काम हो रहा है। इसके अलावा यह रिसर्च भी चल रही है कि रायका और रेबारी समाज के वे लोग, जो ऊंट चराते हैं, उनमें डायबिटीज कम पाई जाती है। इस विषय पर शोध टीम काम कर रही है। जब उनसे पूछा गया कि कार्यकर्ताओं को ऊंट बचाने के लिए क्या संदेश देंगे, तो पूनिया ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वे कार्यकर्ताओं से कहते हैं कि जो ऊंट रखेगा, उसे टिकट मिलेगा।