Friday, 03 July 2026

हाईकोर्ट के आदेश की पालना नहीं करने पर तहसीलदार और पटवारी निलंबित


हाईकोर्ट के आदेश की पालना नहीं करने पर तहसीलदार और पटवारी निलंबित

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करौली जिले की नादौती तहसील का मामला, अतिक्रमण नहीं हटाने पर हाईकोर्ट ने अपनाया सख्त रुख

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने अदालत के आदेशों की पालना नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ ने करौली जिले की नादौती तहसील के तहसीलदार दीनदयाल शर्मा और पटवारी भरत सिंह गुर्जर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि इन अधिकारियों के मन में कोर्ट के आदेशों के प्रति कोई सम्मान नहीं है, बल्कि इन्होंने अदालत के आदेशों की अवमानना जैसी स्थिति उत्पन्न की है। अदालत ने कहा कि दोनों अधिकारी स्पष्ट रूप से अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करने के दोषी हैं।

हाईकोर्ट ने राजस्व सचिव को निर्देश दिए हैं कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से विभागीय कार्रवाई शुरू की जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विभागीय जांच पूरी होने तक दोनों अधिकारी निलंबित रहेंगे।

मामला करौली जिले की नादौती तहसील में अतिक्रमण से जुड़ा है। याचिकाकर्ता रूपराज प्रजापत ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि एक निश्चित क्षेत्र से बार-बार अतिक्रमण हटाए जाने के बावजूद अतिक्रमणकारी फिर उसी स्थान पर कब्जा कर लेते हैं। इस पर हाईकोर्ट ने उन्हें आदतन अतिक्रमणकारी मानते हुए 27 अप्रैल 2026 को अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे।

30 अप्रैल को मामला फिर कोर्ट के समक्ष आया, तब हाईकोर्ट ने तहसीलदार और पटवारी से स्पष्टीकरण मांगा था और मामले को 20 मई को सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, मामला उस दिन सूचीबद्ध नहीं हो सका। इसके बाद 2 जुलाई को सुनवाई के दौरान दोनों अधिकारियों ने स्वीकार किया कि अतिक्रमण अभी भी मौजूद है और उसे हटाने के लिए सात दिन का समय और दिया जाए।

इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि दोनों अधिकारी सहज रूप से स्वीकार कर रहे हैं कि अदालत के आदेश की पालना नहीं हुई। कोर्ट ने कहा कि उन्हें यह भली-भांति जानकारी थी कि संबंधित स्थान पर बार-बार अतिक्रमण हो रहा है, इसके बावजूद उन्होंने अपने कर्तव्य का पालन नहीं किया।

हालांकि, अदालत ने कहा कि फिलहाल दोनों अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने जैसा कदम नहीं उठाया जा रहा है। लेकिन कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि आदेशों की अवहेलना और कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि संबंधित एसएचओ और राजस्व अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं, ताकि अतिक्रमण तत्काल हटाया जा सके। कोर्ट ने अगली सुनवाई से पहले पालना रिपोर्ट पेश करने के निर्देश भी दिए हैं।

मामले की अगली सुनवाई 8 जुलाई को होगी। हाईकोर्ट की इस सख्ती को प्रशासनिक अधिकारियों के लिए स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि अदालत के आदेशों की अनदेखी या पालना में देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।

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