Friday, 03 July 2026

जयपुर में मानसून की पहली बारिश में टोंक रोड धंसी, 20 फीट चौड़ा और 10 फीट गहरा गड्ढा बना


जयपुर में मानसून की पहली बारिश में टोंक रोड धंसी, 20 फीट चौड़ा और 10 फीट गहरा गड्ढा बना

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सीवरेज और गैस लाइन के डक्ट में तकनीकी खामी से मिट्टी कमजोर होने की आशंका, JDA ने शुरू कराया मरम्मत कार्य

जयपुर। जयपुर में मानसून की पहली बारिश ने शहर के विकास कार्यों और प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुक्रवार दोपहर बाद शहर की सबसे व्यस्त सड़कों में शामिल टोंक रोड पर अचानक सड़क धंस गई। देखते ही देखते सड़क पर करीब 20 फीट चौड़ा और 10 फीट गहरा गड्ढा बन गया।

घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही जयपुर विकास प्राधिकरण और संबंधित विभागों की टीम मौके पर पहुंची। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए क्षतिग्रस्त हिस्से के आसपास बैरिकेडिंग की गई और मरम्मत कार्य शुरू कराया गया।

सड़क धंसने के कारण कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा। मौके पर वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित किया गया, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। भारी मशीनों की मदद से गड्ढे को भरने और सड़क को दोबारा तैयार करने का काम युद्धस्तर पर शुरू किया गया।

जयपुर विकास प्राधिकरण के जोन-ए के अधिशासी अभियंता दीपक अग्रवाल ने बताया कि टोंक रोड पर पहले सीवरेज लाइन और गैस लाइन बिछाने का काम किया गया था। इस दौरान लाइन के लिए बनाया गया डक्ट तकनीकी मानकों के अनुरूप सही तरीके से फिट नहीं किया गया। मानसून की पहली बारिश में पानी रिसकर अंदर चला गया, जिससे नीचे की मिट्टी कमजोर हो गई और सड़क धंस गई।

उन्होंने बताया कि फिलहाल मरम्मत कार्य तेजी से किया जा रहा है। अगले 24 घंटे के भीतर सड़क को पूरी तरह दुरुस्त कर आमजन के लिए खोलने का प्रयास किया जा रहा है। मरम्मत के दौरान यातायात व्यवस्था को सुरक्षित और नियंत्रित रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।

मानसून की पहली ही बारिश में राजधानी की प्रमुख सड़क पर इस तरह बड़ा गड्ढा बनने से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गनीमत रही कि सड़क धंसने के समय वहां से कोई भारी वाहन नहीं गुजर रहा था, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।

फिलहाल जेडीए प्रशासन ने क्षेत्र को सुरक्षित कर मरम्मत कार्य तेज कर दिया है। साथ ही यह मामला शहर में बारिश से पहले की जाने वाली तैयारियों, भूमिगत लाइन बिछाने के बाद सड़क की गुणवत्ता और तकनीकी निरीक्षण की व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है।

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