



रंधावा बोले—पंजाब की कानून-व्यवस्था, नार्को-टेररिज्म और गैंगस्टर नेटवर्क को लेकर पहले से तय थी मुलाकात
दिल्ली। राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी और पंजाब से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की शुक्रवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गईं। इस मुलाकात के अलग-अलग सियासी मायने निकाले जाने लगे, हालांकि रंधावा ने इसे राजनीतिक रंग देने को गलत बताया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा भी रंधावा के समर्थन में सामने आए हैं।
सुखजिंदर सिंह रंधावा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनकी मुलाकात पंजाब की बिगड़ती कानून-व्यवस्था, पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद, नार्को-टेररिज्म, गैंगस्टर नेटवर्क और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों को लेकर थी। उन्होंने कहा कि इस मुलाकात को राजनीतिक रंग देने का प्रयास दुर्भावनापूर्ण है।
रंधावा ने बताया कि उन्होंने 4 जून को प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था और उसकी प्रति केंद्रीय गृह मंत्री को भी भेजी थी। पत्र में पंजाब की कानून-व्यवस्था, पाकिस्तान समर्थित आतंकी गतिविधियों, नार्को-टेररिज्म, गैंगस्टरों और राजनेताओं के बीच कथित सांठगांठ तथा पंजाब पुलिस के राजनीतिक इस्तेमाल जैसे मुद्दे उठाए गए थे। उन्होंने कहा कि अपने क्षेत्र में सक्रिय एक कुख्यात गैंगस्टर के बारे में भी उन्होंने जानकारी दी थी।
रंधावा ने कहा कि 23 जून को उन्होंने एक और पत्र भेजकर गुरदासपुर और अन्य क्षेत्रों में गैंगस्टरों की गतिविधियों की जानकारी दी थी। उनके अनुसार, इन्हीं पत्रों के आधार पर उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री से बैठक के लिए बुलाया गया। बैठक में उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका, पंजाब में जबरन वसूली, धमकियों और जेलों के भीतर से मोबाइल फोन के इस्तेमाल जैसे गंभीर मुद्दों पर बात रखी।
रंधावा ने कहा कि यदि भारत सरकार यह मानती है कि वर्तमान स्थिति राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है और पाकिस्तान इसमें सीधे तौर पर दखल दे रहा है, तो केंद्र सरकार अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती। उन्होंने कहा कि यह विषय किसी दल का नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा से जुड़ा है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी रंधावा के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने कहा कि सुखजिंदर सिंह रंधावा का परिवार पंजाब के सबसे सम्मानित परिवारों में से एक है। उनके पिता और पूर्व पंजाब कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष संतोख सिंह रंधावा ने पंजाब में अशांति के दौर में देश की एकता और अखंडता के पक्ष में निर्भीकता से आवाज उठाई थी। गहलोत ने कहा कि रंधावा परिवार ने हमेशा उग्रवाद और देशविरोधी ताकतों के खिलाफ स्पष्ट रुख अपनाया है।
गहलोत ने कहा कि देशहित में खड़े रहने के कारण रंधावा और उनके परिवार को लगातार धमकियां मिलती रही हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे गंभीर विषय को लेकर रंधावा केंद्रीय गृह मंत्री से मिलते हैं, तो इसे राजनीतिक रंग देना अनुचित है।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी कहा कि पंजाब की कानून-व्यवस्था और सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा किसी एक दल का विषय नहीं, बल्कि पूरे देश की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पंजाब की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में गृह मंत्री रहते हुए रंधावा ने देशविरोधी ताकतों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की थी और इसी कारण उनके परिवार को लंबे समय से धमकियां मिलती रही हैं।
डोटासरा ने कहा कि रंधावा की अमित शाह से मुलाकात को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक संदर्भ में समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक सच्चे कांग्रेसी की पहचान यही है कि वह विचारधारा पर अडिग रहते हुए भी राष्ट्रहित के मुद्दों पर जिम्मेदारी निभाए।
राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि पंजाब कांग्रेस में चल रही खींचतान और राज्य की सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के बीच रंधावा की केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात ने चर्चाओं को बल दिया है। हालांकि रंधावा और कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यह मुलाकात राजनीतिक नहीं, बल्कि पंजाब की कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर थी।