



शिकायतकर्ता का आरोप—EPFO खाते में जमा होने वाली धनराशि का किया गबन, अदालत ने कहा, आरोप संज्ञेय अपराध की ओर करते हैं संकेत
लखनऊ। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। लखनऊ की अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय, कक्ष संख्या-26 की अदालत ने प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए संबंधित थाने को मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच करने का आदेश दिया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रार्थना पत्र में वर्णित कथनों के आधार पर प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनना प्रतीत होता है।
मामले में शिकायतकर्ता की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) सहपठित धारा 175(3) के तहत प्रार्थना पत्र पेश किया गया था। शिकायत में EPFO से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
अदालती आदेश में दर्ज शिकायत के अनुसार शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि EPFO, क्षेत्रीय कार्यालय लखनऊ में कार्यरत कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने कथित तौर पर मिलीभगत कर उसके PF खाते में जमा होने वाली धनराशि का गबन किया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित कर्मचारियों ने अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए कथित रूप से कूटरचित दस्तावेज तैयार किए और रकम को PF खाते में जमा नहीं होने दिया। आदेश में शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि कथित घटनाक्रम को लेकर उसने विभागीय स्तर पर भी शिकायत की थी।
अदालती आदेश के अनुसार शिकायतकर्ता ने 9 दिसंबर 2025 को संबंधित थाने में शिकायत भेजी थी। इसके बाद 18 मार्च 2026 को पुलिस आयुक्त, लखनऊ को भी शिकायत भेजे जाने का उल्लेख है। शिकायतकर्ता का कहना था कि इसके बावजूद उसकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उसने अदालत की शरण ली।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित थाने से प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मंगवाई। आदेश में उल्लेख है कि शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों और उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए मामला ऐसा है जिसमें पुलिस जांच की आवश्यकता है।
अदालत ने यह भी दर्ज किया कि शिकायत में लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और इनमें कथित तौर पर PF खाते में जमा होने वाली राशि के गबन का मामला शामिल है।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय की अदालत ने आदेश में कहा कि प्रार्थना पत्र में वर्णित कथनों के आधार पर प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनना प्रतीत होता है। इसी आधार पर अदालत ने संबंधित थानाध्यक्ष को निर्देश दिया है कि प्रार्थना पत्र में वर्णित कथनों के आधार पर सुसंगत धाराओं में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कर नियमानुसार विवेचना की जाए।
अदालत ने केवल FIR दर्ज करने का ही आदेश नहीं दिया, बल्कि थानाध्यक्ष को एक सप्ताह के भीतर FIR दर्ज किए जाने की सूचना न्यायालय को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं। इस आदेश के बाद अब पुलिस को शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करनी होगी। जांच में ही यह स्पष्ट होगा कि PF की कथित रकम के संबंध में वास्तव में क्या हुआ और इसमें किन अधिकारियों अथवा कर्मचारियों की भूमिका रही।
यह भी महत्वपूर्ण है कि अदालत का यह आदेश आरोपों की अंतिम पुष्टि या किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने का फैसला नहीं है। अदालत ने शिकायत में प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध की स्थिति देखते हुए FIR दर्ज कर पुलिस विवेचना कराने का आदेश दिया है। आरोपों की सत्यता जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया में तय होगी।

