Tuesday, 18 August 2026

निकाय-पंचायत चुनाव में Gen Z को 50% से ज्यादा टिकट देने की पैरवी, पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत बोले- सिफारिश से टिकट दिया तो हारेंगे


निकाय-पंचायत चुनाव में Gen Z को 50% से ज्यादा टिकट देने की पैरवी, पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत बोले- सिफारिश से टिकट दिया तो हारेंगे

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पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने युवाओं को राजनीति में आगे लाने पर दिया जोर, डोटासरा बोले- कांग्रेस 60 प्रतिशत टिकट युवाओं को देने की तैयारी में

जयपुर। राजस्थान में आगामी नगरीय निकाय और पंचायतीराज चुनावों को लेकर कांग्रेस में टिकट वितरण की रणनीति पर मंथन तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पार्टी से Gen Z और युवा पीढ़ी को 50 प्रतिशत से अधिक टिकट देने की पैरवी की है। उन्होंने कहा कि राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव को समझते हुए युवाओं को ज्यादा अवसर देना जरूरी है।

पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने साथ ही पार्टी नेतृत्व को साफ नसीहत दी कि टिकट सिफारिश के आधार पर नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत और वास्तविक कार्यकर्ता की क्षमता देखकर दिए जाएं। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि वे स्वयं भी किसी नाम की सिफारिश करें तो केवल उसी आधार पर टिकट नहीं दिया जाना चाहिए।

‘50 प्रतिशत से ज्यादा टिकट Gen Z को दें’

कांग्रेस वॉर रूम में निकाय चुनावों की तैयारियों को लेकर हुई बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में  पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि उन्होंने पार्टी के सामने यह बात रखी है कि 50 प्रतिशत से ज्यादा टिकट Gen Z को दिए जाएं।

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के आने से देश का राजनीतिक और सामाजिक माहौल बदला है। सीनियर नेताओं के अनुभव का उपयोग भी होना चाहिए, लेकिन युवा पीढ़ी के महत्व से इनकार नहीं किया जा सकता। गहलोत ने कहा कि पीढ़ी का बदलाव हो रहा है और राजनीतिक दलों को युवाओं की भावनाओं और आकांक्षाओं को पहचानते हुए उन्हें आगे आने का अवसर देना चाहिए।

जंतर-मंतर के आंदोलनों का भी किया जिक्र

पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने युवाओं की राजनीतिक सक्रियता का उल्लेख करते हुए कहा कि Gen Z के आंदोलनों ने देश के राजनीतिक माहौल को प्रभावित किया है।

उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए आंदोलनों और राहुल गांधी के प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि वे स्वयं भी जयपुर में ऐसे आंदोलनों में शामिल हुए हैं। गहलोत का कहना था कि युवाओं की भागीदारी को अब केवल चुनावी नजरिए से नहीं, बल्कि बदलती राजनीति के संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए।

‘सिफारिश से टिकट मत दीजिए’

 पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने टिकट वितरण में सिफारिश आधारित राजनीति से बचने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि पार्टी अगर सिफारिश के आधार पर उम्मीदवार चुनेगी तो चुनावी नुकसान होगा। वास्तविक कार्यकर्ताओं और स्थानीय स्तर पर मजबूत उम्मीदवारों को ही टिकट दिया जाना चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने उम्मीद जताई कि फील्ड में भेजे जाने वाले ऑब्जर्वर्स को प्रदेश कांग्रेस पर्याप्त अधिकार देकर भेजेगी ताकि वे स्थानीय परिस्थितियों और जमीनी फीडबैक के आधार पर उम्मीदवारों के नाम तय कर सकें।

‘मैं भी सिफारिश करूं तो टिकट मत देना’

पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि जयपुर, भरतपुर, बीकानेर समेत अलग-अलग जगहों से लोग टिकट की सिफारिश के लिए उनके पास आते हैं, लेकिन वे मानते हैं कि केवल वरिष्ठ नेता की सिफारिश के आधार पर टिकट नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “मैं भी किसी की सिफारिश करूं तो टिकट मत देना।”

पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने तर्क दिया कि किसी वरिष्ठ नेता को हर वार्ड या पंचायत की वास्तविक जमीनी स्थिति की जानकारी नहीं हो सकती। ऐसे में केवल सिफारिश पर टिकट देने से गलत उम्मीदवार का चयन हो सकता है और पार्टी को चुनावी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

जमीनी हकीकत के आधार पर हो उम्मीदवारों का चयन

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उम्मीदवार का चयन स्थानीय लोकप्रियता, संगठन से जुड़ाव, कार्यकर्ता के रूप में उसकी सक्रियता और जीत की वास्तविक संभावना के आधार पर होना चाहिए।उनका कहना था कि टिकट वितरण का अधिकार फील्ड फीडबैक और संगठनात्मक प्रक्रिया से जुड़े लोगों को अधिक मिलना चाहिए, ताकि वास्तविक कार्यकर्ताओं के साथ न्याय हो सके।

डोटासरा बोले- 50 नहीं, 60 प्रतिशत टिकट युवाओं को देंगे

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी युवाओं को अधिक टिकट देने की नीति का समर्थन करते हुए कहा कि पार्टी का लक्ष्य 60 प्रतिशत तक टिकट युवाओं को देने का है।

डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस इस संबंध में नीचे तक गाइडलाइन भेजेगी और प्रत्याशी चयन में युवाओं पर खास ध्यान दिया जाएगा। उनका कहना था कि निकाय और पंचायत चुनावों में नई पीढ़ी को अधिक अवसर देकर संगठन को भी नई ऊर्जा दी जाएगी।

दल बदलने वालों पर भी नजर रखेगी कांग्रेस

डोटासरा ने टिकट वितरण में जनप्रतिनिधियों के पिछले राजनीतिक व्यवहार को भी अहम मानने की बात कही।

उन्होंने कहा कि यदि कोई निर्दलीय चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस के साथ पांच साल खड़ा रहा है तो उसके टिकट पर विचार किया जा सकता है। लेकिन जो व्यक्ति कांग्रेस के टिकट पर जीतने के बाद दूसरे दल का समर्थन कर चुका है, उसे दोबारा टिकट नहीं दिया जाएगा। इस बयान के जरिए कांग्रेस नेतृत्व ने निकाय और पंचायत चुनावों से पहले दल बदलने वाले जनप्रतिनिधियों को भी साफ संदेश दिया है।

कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर बढ़ा मंथन

आगामी स्थानीय निकाय और पंचायतीराज चुनावों के लिए कांग्रेस अब युवा उम्मीदवारों, स्थानीय कार्यकर्ताओं और जीत की क्षमता रखने वाले चेहरों पर अधिक फोकस करती दिखाई दे रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत की 50 प्रतिशत से अधिक Gen Z को टिकट देने की पैरवी और डोटासरा के 60 प्रतिशत युवाओं को मौका देने के बयान से संकेत मिल रहे हैं कि इस बार कांग्रेस टिकट वितरण में पीढ़ीगत बदलाव को प्रमुखता दे सकती है।

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