Monday, 29 June 2026

शेखावाटी तक यमुना का पानी लाने का रास्ता साफ, केंद्र-राजस्थान-हरियाणा के बीच हुआ एमओए


शेखावाटी तक यमुना का पानी लाने का रास्ता साफ, केंद्र-राजस्थान-हरियाणा के बीच हुआ एमओए

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नई दिल्ली। शेखावाटी के तीन जिलों सीकर, चूरू और झुंझुनूं तक यमुना का पानी पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय, राजस्थान सरकार और हरियाणा सरकार के बीच मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट यानी एमओए पर हस्ताक्षर हुए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटील, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।

एमओए के बाद अब यमुना का पानी राजस्थान लाने की परियोजना का काम आगे बढ़ेगा। कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस परियोजना के तहत शेखावाटी के गांवों और शहरों में पाइपलाइन के जरिए पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।

सीएम भजनलाल बोले- दशकों का इंतजार खत्म होगा

एमओए पर हस्ताक्षर के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि आज ऐतिहासिक दिन है और दशकों का इंतजार खत्म होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि शेखावाटी के तीन जिलों तक यमुना का पानी पहुंचाने के लिए यह एमओए एक ऐतिहासिक कदम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना सीकर, चूरू और झुंझुनूं जैसे जल संकटग्रस्त क्षेत्रों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगी। यमुना जल से इन जिलों में पेयजल संकट कम होगा और लंबे समय से पानी की समस्या से जूझ रहे लोगों को राहत मिलेगी।

295 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन से आएगा पानी

राजस्थान के हिस्से का यमुना जल हरियाणा के हथिनी कुंड बैराज से चूरू जिले के हंसियावास तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए लगभग 295.5 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड पाइपलाइन डाली जाएगी। इस पाइपलाइन के माध्यम से पानी चूरू में प्रस्तावित बड़े वाटर रिजर्वेयर तक पहुंचेगा।

हंसियावास में बड़ा वाटर रिजर्वेयर बनाया जाएगा, जहां पानी को स्टोर कर शेखावाटी के तीनों जिलों में भेजा जाएगा। परियोजना के तहत अंडरग्राउंड पाइपलाइन, पानी स्टोरेज के लिए डैम और वाटर मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया जाएगा।

पाइपलाइन का 95 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा में

हरियाणा से पाइपलाइन के जरिए पानी राजस्थान लाया जाएगा। इस पाइपलाइन का करीब 95 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा में आएगा। जल संसाधन विभाग अब जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा। जमीन अधिग्रहण का काम हरियाणा और राजस्थान सरकार मिलकर पूरा करेंगी।

पाइपलाइन के लिए जिन लोगों की जमीन ली जाएगी, उन्हें नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। जमीन अधिग्रहण, टेंडर और वर्क ऑर्डर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

32 साल बाद आगे बढ़ी परियोजना

शेखावाटी तक यमुना का पानी पहुंचाने के लिए वर्ष 1994 में राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल समझौता हुआ था, लेकिन सहमति और क्रियान्वयन के अभाव में यह समझौता लंबे समय तक कागजों में ही अटका रहा। वर्ष 2001 में भी हरियाणा के हथिनी कुंड बैराज से राजस्थान को पानी मिलना तय हुआ था, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ सका।

वर्ष 2024 में इस समझौते पर फिर से काम शुरू हुआ। 17 फरवरी 2024 को केंद्र, राजस्थान और हरियाणा सरकार के बीच त्रिपक्षीय एमओयू हुआ था। इसके बाद डीपीआर पर काम शुरू किया गया और अब एमओए होने के बाद परियोजना के क्रियान्वयन का रास्ता और साफ हो गया है।

एसपीवी करेगी परियोजना का संचालन

इस परियोजना के लिए राजस्थान-हरियाणा यमुना वाटर एसपीवी का गठन किया जाएगा। यही स्पेशल पर्पज व्हीकल परियोजना के संचालन, प्रबंधन और क्रियान्वयन से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाएगा।

एमओए के बाद अब परियोजना की प्रशासनिक, वित्तीय और तकनीकी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। मंजूरी के बाद वित्तीय संसाधन जुटाए जाएंगे और निर्माण कार्य के लिए टेंडर जारी किए जाएंगे।

शेखावाटी के लिए जल सुरक्षा का नया अध्याय

यह परियोजना शेखावाटी क्षेत्र के लिए जल सुरक्षा का नया अध्याय मानी जा रही है। सीकर, चूरू और झुंझुनूं जैसे जिलों में लंबे समय से पेयजल संकट बड़ी चुनौती रहा है। भूजल स्तर लगातार गिरने और पानी की कमी के कारण इन क्षेत्रों के गांवों और शहरों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

यमुना जल परियोजना के शुरू होने के बाद इन जिलों में पेयजल आपूर्ति को मजबूती मिलेगी। इससे लाखों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है और क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास को भी नई दिशा मिलेगी।

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