



जयपुर। जयपुर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नगर निगम के एक कनिष्ठ अभियंता को 80 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी निर्माणाधीन मकान को सील नहीं करने और निर्माण कार्य नहीं रुकवाने की एवज में 2 लाख रुपए की रिश्वत मांग रहा था। एसीबी ने ट्रैप कार्रवाई के दौरान आरोपी की कार से रिश्वत की राशि बरामद की।
एसीबी की एसयू-प्रथम चौकी ने सिविल लाइंस जोन, नगर निगम जयपुर के कनिष्ठ अभियंता संजय कुमार बैरवा को गिरफ्तार किया है। वहीं मामले में आरोपी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दीनदयाल को भी डिटेन किया गया है। एसीबी ने आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता ने एसीबी को बताया था कि उसने पुराने मकान को तोड़कर नया निर्माण करने के लिए नगर निगम से स्वीकृति प्राप्त कर ली थी। इसके बावजूद आरोपी जेईएन संजय कुमार बैरवा और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी निर्माण स्थल पर पहुंचे।
आरोप है कि दोनों ने मकान को दोबारा सील करने, गार्ड बैठाने और निर्माण कार्य रुकवाने की धमकी दी। इसके बाद निर्माण कार्य जारी रखने और कार्रवाई नहीं करने की एवज में रिश्वत की मांग की गई।
शिकायत के अनुसार, आरोपी जेईएन ने स्वयं और तत्कालीन उपायुक्त के नाम पर कुल 2 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी। एसीबी ने शिकायत का गोपनीय सत्यापन करवाया। सत्यापन में एक लाख रुपए की रिश्वत मांग की पुष्टि हुई।
आरोप है कि आरोपी के कहने पर पहले 20 हजार रुपए एक कर्मचारी द्वारा ले लिए गए। इसके बाद शेष राशि की मांग जारी रहने पर एसीबी ने ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई।
ट्रैप कार्रवाई के दौरान आरोपी ने अपनी कार का लॉक खोलकर शिकायतकर्ता से 80 हजार रुपए कार के गियर के पास स्थित डैशबोर्ड में रखवाए। जैसे ही राशि रखवाई गई, एसीबी टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए डैशबोर्ड से रिश्वत की पूरी रकम बरामद कर ली।
जांच के दौरान डैशबोर्ड के धौवन का रंग गुलाबी पाया गया। इसके अलावा आरोपी के पर्स से 27 हजार 400 रुपए की संदिग्ध नकदी भी बरामद हुई है। एसीबी इस राशि के संबंध में भी जांच कर रही है।
मामले में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दीनदयाल को डिटेन किया गया है। एसीबी उससे यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि रिश्वत मांगने और राशि के लेनदेन में उसकी क्या भूमिका थी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस प्रकरण में किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता तो नहीं है।
फिलहाल एसीबी आरोपी कनिष्ठ अभियंता से पूछताछ कर रही है। मामले में रिश्वत की मांग, पहले ली गई राशि और तत्कालीन उपायुक्त के नाम का उल्लेख किए जाने से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत जांच की जा रही है।
जयपुर में हुई इस कार्रवाई के बाद नगर निगम के कामकाज और निर्माण स्वीकृति से जुड़े मामलों में रिश्वतखोरी को लेकर फिर सवाल उठे हैं। एसीबी ने आमजन से अपील की है कि किसी भी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी द्वारा रिश्वत मांगे जाने पर तुरंत ब्यूरो को शिकायत दें।
एसीबी के अनुसार, शिकायत का सत्यापन कर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। फिलहाल इस मामले में आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।