Monday, 29 June 2026

यमुना जल समझौते पर भाजपा ने कांग्रेस को घेरा, कहा- 32 साल की प्रतीक्षा को भजनलाल सरकार ने परिणाम में बदला,1917 क्यूसेक पानी से शेखावाटी को मिलेगा


यमुना जल समझौते पर भाजपा ने कांग्रेस को घेरा, कहा- 32 साल की प्रतीक्षा को भजनलाल सरकार ने परिणाम में बदला,1917 क्यूसेक पानी से शेखावाटी को मिलेगा

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जयपुर। यमुना जल समझौते को लेकर राजस्थान की राजनीति में भाजपा ने कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला है। भाजपा की ओर से इसे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दृढ़ संकल्प, सतत प्रयास और राजनीतिक इच्छाशक्ति की बड़ी उपलब्धि बताया गया है। पार्टी ने कहा कि 32 वर्षों से फाइलों में अटका यमुना जल समझौता अब साकार होने की दिशा में आगे बढ़ा है और यह केवल जल समझौता नहीं, बल्कि राजस्थान के जल अधिकारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।

भाजपा ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्ष 1994 में यमुना जल बंटवारे का समझौता हुआ था, लेकिन राजस्थान को उसका वैधानिक अधिकार लंबे समय तक नहीं मिल पाया। इस दौरान प्रदेश और केंद्र में कांग्रेस की सरकारें रहीं, लेकिन राजस्थान के हिस्से का पानी दिलाने के लिए न तो प्रभावी वार्ता हुई, न राजनीतिक दबाव बनाया गया और न ही ठोस परिणाम सामने आया।

भाजपा बोली- कांग्रेस ने शेखावाटी की प्यास को चुनावी मुद्दा बनाया

भाजपा ने कहा कि कांग्रेस ने शेखावाटी की प्यास को केवल चुनावी मुद्दा बनाया, लेकिन समाधान का संकल्प नहीं लिया। पार्टी ने सवाल उठाया कि 32 वर्षों तक परिणाम क्यों नहीं आए और राजस्थान का जल अधिकार केवल भाषणों तक ही सीमित क्यों रहा।

भाजपा के अनुसार, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सत्ता संभालने के बाद स्पष्ट कर दिया था कि राजस्थान के हितों से कोई समझौता नहीं होगा। इसी दिशा में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सी.आर. पाटिल और हरियाणा सरकार के साथ लगातार संवाद किया। इसी संवाद और समन्वय के परिणामस्वरूप वर्षों से अटका रास्ता खुला है।

1917 क्यूसेक पानी से शेखावाटी को मिलेगी राहत

भाजपा ने दावा किया कि 1917 क्यूसेक यमुना जल और लगभग 295 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के माध्यम से राजस्थान को पानी की उपलब्धता राज्य की जल सुरक्षा का नया अध्याय बनेगी। इससे शेखावाटी के झुंझुनूं, सीकर, चूरू सहित अनेक क्षेत्रों में पेयजल संकट कम होगा।

पार्टी ने कहा कि इस परियोजना से भूजल पर निर्भरता घटेगी, गिरते जलस्तर को संभालने में मदद मिलेगी और किसानों को राहत मिलेगी। इसके साथ ही उद्योगों के लिए पानी उपलब्ध होगा और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। वर्षों से टैंकरों और गहराते भूजल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों के लिए यह निर्णय जीवन बदलने वाला साबित हो सकता है।

हरियाणा चुनाव घोषणा-पत्र को लेकर कांग्रेस पर निशाना

भाजपा ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के घोषणा-पत्र में राजस्थान को यमुना का पानी नहीं देने जैसी बात कही गई थी। पार्टी ने इसे राजस्थान के स्वाभिमान और लोगों की प्यास के साथ राजनीतिक खिलवाड़ बताया।

भाजपा ने कहा कि उस समय राजस्थान और शेखावाटी से जुड़े कांग्रेस नेता हरियाणा में पार्टी के पक्ष में प्रचार कर रहे थे, लेकिन किसी ने भी राजस्थान के जल अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज नहीं उठाई। भाजपा ने इसे कांग्रेस की प्राथमिकताओं पर सवाल बताते हुए कहा कि कांग्रेस के लिए पार्टी पहले और राजस्थान बाद में रहा।

सहकारी संघवाद से निकला समाधान

भाजपा ने कहा कि राज्य सरकार ने टकराव की राजनीति के बजाय सहकारी संघवाद की भावना के साथ संवाद, विश्वास और परिणाम का रास्ता चुना। पार्टी के अनुसार, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यह दिखाया है कि मजबूत नेतृत्व केवल बयान नहीं देता, बल्कि दशकों से अटकी फाइलों को मंजिल तक पहुंचाता है।

भाजपा ने इसे “राजनीति बनाम परिणाम” का उदाहरण बताते हुए कहा कि एक तरफ कांग्रेस की दशकों पुरानी वादाखिलाफी है, वहीं दूसरी ओर भाजपा सरकार का परिणाम आधारित सुशासन है। पार्टी ने कहा कि कांग्रेस ने वर्षों तक केवल वादे किए, जबकि भजनलाल सरकार ने समाधान दिया।

जल सुरक्षा और विकास का नया आधार

भाजपा ने कहा कि यह समझौता केवल शेखावाटी की प्यास बुझाने का माध्यम नहीं है, बल्कि राजस्थान को जल-सुरक्षित बनाने की दीर्घकालिक रणनीति का महत्वपूर्ण आधार है। इससे राज्य के आर्थिक विकास, औद्योगिक निवेश, कृषि उत्पादकता, शहरी विस्तार और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य को मजबूती मिलेगी।

पार्टी ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सिद्ध किया है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति ही सबसे बड़ी प्रशासनिक शक्ति होती है। यदि निर्णय लेने का साहस, स्पष्ट दृष्टि और जनता के प्रति प्रतिबद्धता हो, तो दशकों पुराने विवाद भी सुलझाए जा सकते हैं।

भाजपा ने कहा कि यमुना जल समझौता केवल एक हस्ताक्षर नहीं, बल्कि यह प्रमाण है कि निर्णायक नेतृत्व, साफ नीयत और अटल संकल्प से इतिहास बदला जा सकता है। पार्टी ने इसे नए राजस्थान की दिशा में बड़ा कदम बताया, जहां सरकारें फाइलों को लंबित नहीं रखतीं, बल्कि फैसले लेकर परिणाम देती हैं।




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