



जयपुर। जयपुर की अरावली पहाड़ियों पर स्थित प्रसिद्ध गढ़ गणेश मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को अब जल्द ही सैकड़ों सीढ़ियां चढ़ने की मजबूरी से राहत मिल सकती है। करीब 9 करोड़ रुपए की लागत वाली गढ़ गणेश रोप-वे परियोजना 7 साल के इंतजार के बाद एक बार फिर रफ्तार पकड़ चुकी है। हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।
परियोजना पूरी होने के बाद श्रद्धालु तलहटी से गढ़ गणेश मंदिर तक मात्र तीन मिनट में पहुंच सकेंगे। वर्तमान में मंदिर तक पहुंचने के लिए 300 से अधिक सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जो बुजुर्गों, बच्चों, दिव्यांगों और बीमार श्रद्धालुओं के लिए बड़ी चुनौती है।
गढ़ गणेश रोप-वे परियोजना के तहत अधिकांश टावर यानी खंभों का निर्माण पूरा हो चुका है। अब स्टेशन, केबल और इलेक्ट्रो-मैकेनिकल सिस्टम लगाने का काम अंतिम चरण में बताया जा रहा है। निर्माण एजेंसी और संबंधित विभाग परियोजना को जल्द पूरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
रोप-वे शुरू होने के बाद मंदिर तक पहुंचने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा। इससे श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ेगी और गढ़ गणेश मंदिर आने वाले भक्तों की संख्या में भी इजाफा होने की संभावना है।
गढ़ गणेश रोप-वे परियोजना पर्यावरण संरक्षण, वन क्षेत्र और हेरिटेज जोन से जुड़े मुद्दों के कारण हाईकोर्ट पहुंच गई थी। कानूनी प्रक्रिया के चलते लंबे समय तक निर्माण कार्य रुका रहा। इसी कारण यह परियोजना करीब 7 साल तक गति नहीं पकड़ सकी।
हाल ही में हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद परियोजना का काम फिर शुरू किया गया है। अब निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और शेष तकनीकी कार्यों को पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है।
गढ़ गणेश मंदिर जयपुर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर तक पहुंचने के लिए अभी लंबी सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जिससे कई श्रद्धालुओं को परेशानी होती है।
रोप-वे शुरू होने के बाद बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांग श्रद्धालुओं को विशेष राहत मिलेगी। साथ ही त्योहारों और विशेष अवसरों पर भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करने में भी मदद मिल सकेगी।
गढ़ गणेश मंदिर धार्मिक महत्व के साथ-साथ जयपुर के पर्यटन मानचित्र पर भी खास स्थान रखता है। रोप-वे सुविधा शुरू होने से यहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए यात्रा अधिक आसान और आकर्षक हो जाएगी।
परियोजना पूरी होने के बाद जयपुर में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। अरावली की पहाड़ियों के बीच रोप-वे यात्रा श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक होने के साथ-साथ एक नया अनुभव भी बनेगी।