Monday, 29 June 2026

यमुना जल बंटवारे पर 32 साल बाद सहमति, राजस्थान और हरियाणा के बीच सोमवार को हो सकता है एमओए


यमुना जल बंटवारे पर 32 साल बाद सहमति, राजस्थान और हरियाणा के बीच सोमवार को हो सकता है एमओए

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जयपुर/नई दिल्ली। यमुना जल बंटवारे को लेकर राजस्थान और हरियाणा के बीच 1994 के समझौते को लागू करने से जुड़े लंबे विवाद के समाधान की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है। करीब 32 साल बाद दोनों राज्यों के बीच इस मुद्दे पर सहमति बन गई है। सूत्रों के अनुसार, सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समझौते को लागू करने के लिए मेमोरंडम ऑफ एग्रीमेंट यानी एमओए पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। इस दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल भी मौजूद रहेंगे।

समझौते के प्रमुख बिंदुओं पर रविवार को दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच दिल्ली स्थित बीकानेर हाउस में मैराथन बैठक हुई। करीब दो घंटे चली इस बैठक में राजस्थान और हरियाणा के बीच कई अहम विषयों पर सहमति बनी। इस समझौते को शेखावाटी सहित राजस्थान के जल संकटग्रस्त क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बीकानेर हाउस में दो घंटे चली बैठक

रविवार को हुई बैठक में राजस्थान की ओर से मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, एसीएस अभय कुमार और जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर भुवन भास्कर मौजूद रहे। वहीं हरियाणा की ओर से एसीएस अनुराग अग्रवाल और चीफ इंजीनियर वीरेन्द्र सिंह बैठक में शामिल हुए। हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक से जुड़े।

बैठक में यमुना जल समझौते के क्रियान्वयन, पाइपलाइन मार्ग, जल प्रवाह, वित्तीय व्यय, परियोजना संचालन और भविष्य में अन्य जल स्रोतों से मिलने वाले पानी के उपयोग पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने तकनीकी और प्रशासनिक बिंदुओं पर सहमति बनाते हुए एमओए के लिए आधार तैयार किया।

हरियाणा ने इन स्थानों से मांगा पानी

समझौते के तहत हरियाणा ने कई स्थानों से पानी लेने की मांग रखी है। इसमें दानोदा कलां से 10 क्यूसेक, नयागांव के पास सारसौद डिस्ट्रीब्यूटी से 80 क्यूसेक, चौधरी माइनर पर हिंदवान से 70 क्यूसेक, सरसना माइनर पर पाट्टन से 20 क्यूसेक, सेगा नरार से 2 क्यूसेक, कैथल टाउन के पास पेओदा से 43 क्यूसेक और कैथल टाउन के पास चांदना मानस रोड से 41.83 क्यूसेक पानी की मांग शामिल है।

इसके अतिरिक्त एक अन्य स्थान से भी पानी लिया जाएगा। हरियाणा हाश्यावास के तीन रिजर्वायर में से एक से आवश्यकता के अनुसार पानी ले सकेगा। इन बिंदुओं को लेकर दोनों राज्यों के बीच तकनीकी सहमति बनने की जानकारी सामने आई है।

हाईब्रिड मोड पर राजस्थान पहुंचेगा पानी

हथिनी कुंड बैराज से राजगढ़, चूरू के जलाशय तक पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बनाई जाएगी। हथिनी कुंड और राजगढ़ के बीच भूतल स्तर में करीब 110 मीटर का अंतर है और राजगढ़ अपेक्षाकृत नीचा है। ऐसे में सामान्य स्थिति में पानी हथिनी कुंड से गुरुत्वाकर्षण के प्रवाह से राजगढ़ तक पहुंच सकेगा।

हालांकि, इस पाइपलाइन को हाईब्रिड मोड पर विकसित किया जाएगा। इसके तहत पम्पिंग स्टेशन भी बनाए जाएंगे, ताकि पानी की उपलब्धता कम होने या प्रवाह में कमी आने पर पंपिंग सिस्टम के माध्यम से पानी राजगढ़ तक पहुंचाया जा सके।

एसपीवी कंपनी करेगी परियोजना का संचालन

इस परियोजना के संचालन के लिए पहले संयुक्त बोर्ड का प्रस्ताव था, लेकिन अब दोनों राज्य स्पेशल पर्पज व्हीकल यानी एसपीवी कंपनी बनाने पर सहमत हो गए हैं। एसपीवी के गठन और संचालन से जुड़े अन्य बिंदु आगे तय किए जाएंगे। यही कंपनी परियोजना के क्रियान्वयन और संचालन की जिम्मेदारी संभालेगी।

परियोजना का पूरा आर्थिक व्यय राजस्थान सरकार वहन करेगी। हालांकि, इस व्यय में केंद्र सरकार से भी सहयोग लेने का प्रयास किया जाएगा। भविष्य में किशाऊ, लखवार और रेणुकाजी से राजस्थान के हिस्से का पानी भी इन्हीं पाइपलाइनों के जरिए प्रदेश तक पहुंचाया जा सकेगा।

राजस्थान को मिलेगा 1917 क्यूसेक पानी

राजस्थान को 1994 के समझौते के आधार पर ही पानी मिलेगा। बताया जा रहा है कि हरियाणा ने समझौते के बाद बदली परिस्थितियों और वर्तमान मांग के अनुसार बंटवारे का प्रस्ताव रखा था, लेकिन राजस्थान की ओर से मूल समझौते को ही फिलहाल लागू करने का प्रस्ताव रखा गया। इस पर दोनों राज्यों के बीच सहमति बनी।

राजस्थान को 1917 क्यूसेक पानी मिलने की बात सामने आई है। हथिनी कुंड से चूरू के हाश्यावास तक तीन पाइपलाइन डाली जाएंगी। प्रत्येक पाइपलाइन का व्यास 3.6 मीटर होगा। यह पानी पश्चिमी यमुना कैनाल से उपलब्ध कराया जाएगा।

हरियाणा के पांच जिलों से गुजरेगी पाइपलाइन

प्रस्तावित पाइपलाइन हरियाणा के यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और हिसार जिलों से होकर गुजरेगी। पाइपलाइन मार्ग में आवश्यक भूमि अवाप्ति की जाएगी। मंजूरी के बाद वित्तीय संसाधन जुटाए जाएंगे और निर्माण कार्य के लिए टेंडर तथा वर्क ऑर्डर जारी किए जाएंगे।

परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद इसका निर्माण कार्य शुरू होगा। जल संकट से जूझ रहे राजस्थान के इलाकों के लिए यह परियोजना दीर्घकालिक राहत देने वाली मानी जा रही है। विशेष रूप से चूरू, झुंझुनूं, सीकर और शेखावाटी क्षेत्र में पेयजल और जल उपलब्धता को लेकर यह समझौता महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

32 साल पुराने विवाद के समाधान की उम्मीद

यमुना जल बंटवारे को लेकर राजस्थान और हरियाणा के बीच 1994 से विवाद चला आ रहा था। लंबे समय से राजस्थान अपने हिस्से के पानी को लेकर समझौते के क्रियान्वयन की मांग कर रहा था। अब दोनों राज्यों के बीच एमओए की तैयारी को इस विवाद के समाधान की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

यदि सोमवार को एमओए पर हस्ताक्षर होते हैं, तो राजस्थान के लिए यमुना जल समझौते के क्रियान्वयन का रास्ता साफ हो जाएगा। इसके बाद परियोजना की वित्तीय, तकनीकी और निर्माण संबंधी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।

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