Saturday, 20 June 2026

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने जयपुर में 700 बीएलओ और सुपरवाइजर्स से किया संवाद, कहा—सभी बीएलओ मेरे परिवार का हिस्सा


मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने जयपुर में 700 बीएलओ और सुपरवाइजर्स से किया संवाद, कहा—सभी बीएलओ मेरे परिवार का हिस्सा

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जयपुर। भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने शनिवार को सीतापुरा स्थित जयपुर एग्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर यानी जेईसीसी में आयोजित बीएलओ संवाद कार्यक्रम में प्रदेश के लगभग 700 बूथ स्तरीय अधिकारियों और सुपरवाइजर्स से संवाद किया। कार्यक्रम में उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया के सफल संचालन को लेकर बीएलओ के कार्यों की सराहना की और मतदाता सूची की शुद्धता, पारदर्शिता तथा समावेशिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अपने संबोधन की शुरुआत राजस्थानी परंपरा के अनुरूप “खम्मा घणी” कहकर की। उन्होंने कहा कि सभी बीएलओ उनके परिवार का हिस्सा हैं और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के आधार हैं। उन्होंने कहा कि 12 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में हुए एसआईआर में राजस्थान को प्रथम स्थान दिलाने में यहां के बीएलओ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि भारत में सभी चुनाव संविधान और विधि के अनुरूप स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से संपन्न होते हैं।

ज्ञानेश कुमार ने कहा कि हाल के वर्षों में चुनावों में मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी यह दर्शाती है कि देश के नागरिकों का लोकतांत्रिक प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग पर विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत इस वर्ष लोकतांत्रिक देशों के वैश्विक संगठन IDEA यानी इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस की अध्यक्षता कर रहा है। यह संगठन विश्वभर में स्थायी, सशक्त और समावेशी लोकतंत्र को बढ़ावा देने का कार्य करता है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य के सफल संचालन में बीएलओ की भूमिका की सराहना करते हुए उन्हें अतिरिक्त मानदेय प्रदान किए जाने के लिए राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग के कार्यों की सफलता का आधार जमीनी स्तर पर कार्यरत बीएलओ ही हैं। सामान्य परिस्थितियों में निर्वाचन आयोग एक संस्थागत ढांचे के रूप में कार्य करता है, लेकिन चुनावों के दौरान लगभग 1.80 करोड़ अधिकारियों और कर्मचारियों की भागीदारी के साथ यह विश्व की सबसे बड़ी चुनावी संस्था बन जाता है।

उन्होंने कहा कि इस विशाल चुनावी व्यवस्था में बीएलओ सबसे आधारभूत और महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। बीएलओ निर्वाचन आयोग और मतदाताओं के बीच सेतु का कार्य करते हैं। मतदाता सूची के अद्यतन, नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता पहचान संबंधी सत्यापन और निर्वाचन आयोग की विभिन्न गतिविधियों को आमजन तक पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका रहती है।

कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन ने कहा कि प्रदेश के बीएलओ की मेहनत का ही परिणाम रहा कि राजस्थान में एसआईआर का कार्य तय समय से सात दिन पहले पूरा किया जा सका। उन्होंने कहा कि बीएलओ और सुपरवाइजर्स के समर्पित प्रयासों से राजस्थान एसआईआर प्रक्रिया में देशभर में अग्रणी रहा।

संवाद कार्यक्रम के दौरान बीएलओ और सुपरवाइजर्स ने निर्वाचन संबंधी अपने अनुभव साझा किए और चुनाव प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सुझाव भी दिए। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने सभी अधिकारियों से मतदाता सूची की शुद्धता, पारदर्शिता और समावेशिता सुनिश्चित करने के लिए पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में जिला निर्वाचन अधिकारी संदेश नायक ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा किए गए बीएलओ संवाद से चुनाव प्रक्रिया को स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने में बीएलओ को नई दिशा मिलेगी।

गौरतलब है कि राजस्थान एसआईआर के विभिन्न चरणों में उस समय चल रहे 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अग्रणी रहा। एसआईआर प्रारंभ होने से पहले ही राजस्थान में 70 प्रतिशत मैपिंग पूरी कर ली गई थी, जबकि एसआईआर के दौरान राज्य ने 98 प्रतिशत तक मैपिंग कर देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया। राजस्थान में एसआईआर 27 अक्टूबर 2025 से प्रारंभ हुआ था। गणना चरण की शुरुआत 4 नवंबर 2025 से हुई। मतदाता सूचियों के प्रारूप का प्रकाशन 16 दिसंबर 2025 को किया गया। अंता विधानसभा को छोड़कर 199 विधानसभाओं की मतदाता सूचियों का प्रकाशन 21 फरवरी 2026 को हुआ।

राजस्थान में एसआईआर के बाद अंतिम मतदाता सूची में अंता विधानसभा को शामिल करने के उपरांत मतदाताओं की कुल संख्या 5.17 करोड़ रही। प्रदेश के 52,490 बूथ स्तरीय अधिकारियों के अथक प्रयासों से 5.48 करोड़ मतदाताओं के लिए एसआईआर का कार्य समय से पहले सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। इसे निर्वाचन तंत्र को अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और मतदाता केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

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