



जयपुर में स्मार्ट आंगनबाड़ी केंद्र अवसंरचना पहल को लेकर शुक्रवार को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में सीएसआर भागीदारी कार्यशाला का आयोजन किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग, राजस्थान सरकार की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में उप मुख्यमंत्री तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री दिया कुमारी मुख्य अतिथि रहीं, जबकि महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री डॉ. मंजू बाघमार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य मिशन सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक बनाने के लिए कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी सीएसआर सहयोग जुटाना रहा।
कार्यशाला में राजस्थान के आंगनबाड़ी केंद्रों पर दी जा रही सेवाओं और उनकी आधारभूत सुविधाओं में सुधार को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें सीएसआर फंड के माध्यम से नवीन तकनीक आधारित एलजीएसएफ यानी लाइट गेज स्टील फ्रेम प्री-फैब्रिकेटेड स्ट्रक्चर्स और कंटेनर आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। बताया गया कि इस तकनीक के माध्यम से कम समय में सुरक्षित, आधुनिक और बच्चों के अनुकूल आंगनबाड़ी केंद्र तैयार किए जा सकते हैं। कार्यशाला में पंखुड़ी पोर्टल की भी जानकारी दी गई, जिसे भारत सरकार द्वारा 8 जनवरी 2026 को लॉन्च किया गया है। यह पोर्टल पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शी, गैर-नकद सीएसआर योगदान को सक्षम बनाने वाला एकीकृत डिजिटल मंच है।
उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप गरीब और कमजोर परिवारों के बच्चों का सशक्तिकरण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सशक्त मानव संसाधन से ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण होगा और इसके लिए आंगनबाड़ियों को आधुनिक बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सीएसआर फंड इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। दिया कुमारी ने कहा कि स्मार्ट आंगनबाड़ी केंद्र स्वस्थ और सशक्त राजस्थान की नींव हैं। सीएसआर सहयोग से जर्जर और किराये के भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को स्मार्ट प्ले स्कूल में अपग्रेड करना राज्य सरकार का लक्ष्य है।
दिया कुमारी ने कहा कि प्री-फैब्रिकेटेड स्ट्रक्चर्स और कंटेनर आंगनबाड़ी जैसी नवीन तकनीकों से कुछ सप्ताह में ही आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण किया जा सकता है। इससे जर्जर और क्षतिग्रस्त आंगनबाड़ी केंद्रों की आधारभूत संरचना में कम समय में बड़ा सुधार किया जा सकता है। उन्होंने गुजरात में सीएसआर फंड के माध्यम से आंगनबाड़ियों में हुए विकास कार्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि राजस्थान में भी इसी तरह के नवाचारों को आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कॉरपोरेट भागीदारों से शहरी और अर्ध-शहरी औद्योगिक क्षेत्रों में प्री-फैब्रिकेटेड आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि कॉरपोरेट हाउसेज आंगनबाड़ियों को प्ले स्कूल में बदलने में योगदान देकर राष्ट्र निर्माण की मुहिम में भागीदार बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि गरीब और कमजोर वर्गों के बच्चों को भी बेहतर शाला पूर्व शिक्षा, सुरक्षित वातावरण और पोषण से जुड़ी सुविधाएं मिलनी चाहिए। इसके लिए सरकार, समाज और कॉरपोरेट जगत को मिलकर काम करना होगा।
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री डॉ. मंजू बाघमार ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उनकी नींव मजबूत करके ही उज्ज्वल भारत का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सीएसआर फंड के माध्यम से आंगनबाड़ियों को प्ले स्कूल में परिवर्तित कर गरीब बच्चों को बेहतर शाला पूर्व शिक्षा का वातावरण उपलब्ध कराया जा सकता है। उन्होंने पोषण वाटिकाओं के निर्माण, बच्चों के लिए यूनिफॉर्म, फर्नीचर, खिलौने, शिक्षण सामग्री और बच्चों के अनुकूल आधारभूत सुविधाएं विकसित करने में सहयोग का आह्वान किया।
आईसीडीएस निदेशक वासुदेव मालावत ने बताया कि राजस्थान में 63 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में से 3,284 केंद्र जर्जर या क्षतिग्रस्त भवनों में संचालित हैं, जबकि 11,488 केंद्र किराए या अस्थाई परिसरों में चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि इनके समाधान के लिए एलजीएसएफ तकनीक से मात्र 15 से 21 दिनों में सोलर युक्त, भूकंपरोधी स्मार्ट आंगनबाड़ी केंद्र स्थापित किए जाएंगे। कार्यशाला में डब्ल्यूसीडी विभाग, आईसीडीएस के वरिष्ठ अधिकारी, एक्सिस बैंक, श्री सीमेंट, वेदांता, वंडर ग्रुप, अडानी ग्रुप, टाटा स्टील, एनपीसीआईएल, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, हिंदुस्तान जिंक, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, डेल सहित प्रमुख कॉरपोरेट हाउस, पीएसयू, एनजीओ, तकनीकी विशेषज्ञ और जिला अधिकारी उपस्थित रहे।