


भरतपुर संभाग में पांचना बांध से सिंचाई के पानी को लेकर लंबे समय से चल रहे गतिरोध को समाप्त करने के लिए प्रशासन ने संवाद की पहल तेज कर दी है। संभागीय आयुक्त नलिनी कठोतिया की अध्यक्षता में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ कैचमेंट एवं कमांड क्षेत्र के किसान प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बात रखी और इस बात पर सहमति व्यक्त की कि बांध का पानी क्षेत्र के सभी किसानों के हित में उपयोग होना चाहिए। प्रशासन ने दोनों पक्षों से सकारात्मक वातावरण में वार्ता जारी रखने और आपसी सहमति से समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
बैठक में सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार की बजट घोषणा के तहत 50 करोड़ रुपए की पांचना लिफ्ट सिंचाई परियोजना स्वीकृत की गई है। अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना का कार्य शीघ्र शुरू किया जाएगा। इस पर कैचमेंट क्षेत्र के किसान प्रतिनिधियों ने मांग रखी कि स्वीकृत परियोजना को जल्द धरातल पर उतारा जाए, ताकि क्षेत्र के किसानों को वास्तविक लाभ मिल सके। वहीं कमांड क्षेत्र के किसान प्रतिनिधियों ने न्यायालय के आदेशों की पालना में नहरों में पानी छोड़ने की मांग उठाई।
बैठक में दोनों पक्षों के किसान प्रतिनिधियों ने यह आश्वासन दिया कि वे एक-दूसरे के खिलाफ नकारात्मक या जातिगत टिप्पणियां नहीं करेंगे। दोनों पक्षों ने संवाद बनाए रखने और सरकार के प्रयासों में सहयोग करने की बात कही। प्रशासन ने भी किसानों से धरना समाप्त करने का अनुरोध किया और कहा कि विवाद का समाधान टकराव के बजाय आपसी बातचीत और संवेदनशील दृष्टिकोण से ही संभव है।
बैठक में पुलिस महानिरीक्षक भरतपुर रेंज कैलाश चन्द्र विश्नोई, करौली कलेक्टर अक्षय गोदारा, सवाई माधोपुर कलेक्टर कानाराम, करौली एसपी लोकेश सोनवाल, सवाई माधोपुर एसपी जयेष्ठा मैत्रयी सहित सिंचाई विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। कैचमेंट क्षेत्र की ओर से करौली विधायक दर्शन सिंह, अशोक धाभाई, हाकिम सिंह, रामस्वरूप सहित अन्य प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वहीं कमांड क्षेत्र के किसानों की ओर से रघुवीर प्रसाद मीणा, महेंद्र सिंह, तेज सिंह और अन्य सदस्य बैठक में शामिल हुए।
पांचना बांध विवाद वर्ष 2006 से चला आ रहा है। करौली जिले के गुड़ला स्थित पांचना बांध पर 39 गांवों के लोग करीब एक महीने से पहरा दे रहे हैं। हाईकोर्ट की ओर से मई माह में तीसरी बार बांध का पानी जल्द कमांड क्षेत्र की नहरों में छोड़ने के आदेश दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद सरकार अब तक न तो नहरें रोकने वाले गांवों को बांध के पानी से संतुष्ट कर पाई है और न ही कमांड क्षेत्र के किसानों को उनका पानी मिल पाया है। इसी कारण विवाद लगातार संवेदनशील बना हुआ है।
पिछले करीब दो दशक में पांचना बांध से नहरों के जरिए खेतों के लिए नियमित पानी छोड़े जाने की स्थिति नहीं बन पाई। बताया जाता है कि वर्ष 2006 के बड़े आंदोलन के बाद से डूब क्षेत्र के ग्रामीण बांध पर कड़ा पहरा रखते आए हैं और नहरों के गेट खोलने को लेकर लगातार विरोध होता रहा है। पूरे वर्ष में केवल श्रीमहावीरजी मेले के दौरान भगवान के अभिषेक के लिए सीमित मात्रा में पानी नदी के रास्ते छोड़ा जाता है। वर्तमान में दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग स्थानों पर महापंचायतें भी बुलाई जा रही हैं, जिससे प्रशासन की चिंता और बढ़ गई है। ऐसे में प्रशासन का प्रयास है कि सामाजिक सद्भाव बनाए रखते हुए न्यायालय के आदेशों और किसानों के हितों के बीच संतुलित समाधान निकाला जाए।