



टोंक में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से स्थायी लोक अदालत की कार्यप्रणाली, अधिकारिता और उपयोगिता के प्रति आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से जन जागरूकता पोस्टर का विमोचन किया गया। यह गतिविधि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली और राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार आयोजित की जा रही जन जागरूकता गतिविधियों के तहत की गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण टोंक की अध्यक्ष एवं जिला जज डॉ. सीमा अग्रवाल तथा अपर जिला न्यायाधीश एवं सचिव दिनेश कुमार जलुथरिया ने स्थायी लोक अदालत संबंधी पोस्टर का विमोचन किया।
इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण टोंक की अध्यक्ष डॉ. सीमा अग्रवाल ने कहा कि स्थायी लोक अदालत लोक उपयोगी सेवाओं से जुड़े विवादों के त्वरित, सरल और सुलभ निस्तारण का प्रभावी मंच है। उन्होंने कहा कि स्थायी लोक अदालत में सबसे पहले विवादों का समाधान सुलह-समझौते के माध्यम से कराने का प्रयास किया जाता है। यदि समझौता नहीं हो पाता है, तो आवश्यकता अनुसार स्थायी लोक अदालत द्वारा विवाद का निर्णय भी किया जा सकता है। इससे आमजन को कम समय और कम खर्च में न्याय उपलब्ध कराने में सहायता मिलती है।
अपर जिला न्यायाधीश एवं सचिव दिनेश कुमार जलुथरिया ने कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार स्थायी लोक अदालतों के संबंध में व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत पोस्टर, पम्पलेट, विधिक जागरूकता शिविरों और अन्य प्रचार-प्रसार माध्यमों से आमजन को स्थायी लोक अदालत के लाभों, कार्यप्रणाली और अधिकारिता की जानकारी दी जा रही है।
उन्होंने बताया कि विमोचित पोस्टर में स्थायी लोक अदालत की संरचना, शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया, सुलह और निस्तारण की व्यवस्था सहित विद्युत, जलापूर्ति, स्वास्थ्य, बैंकिंग एवं बीमा, परिवहन, नगर निकाय, एलपीजी और अन्य लोक उपयोगी सेवाओं से संबंधित विवादों के समाधान की जानकारी दी गई है। पोस्टर के माध्यम से आमजन को वैकल्पिक विवाद निस्तारण तंत्र के रूप में स्थायी लोक अदालत के महत्व और लाभों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनोज फौजदार, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गजपाल सिंह, अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रेया गोयल सहित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।