



जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सचिन पायलट को लेकर हाल ही में दिए गए अपने बयानों पर सफाई देते हुए कहा है कि उन्होंने जो कुछ भी कहा, वह पूरी ईमानदारी और दिल से कहा है। उनका किसी पर आरोप लगाने या व्यक्तिगत टिप्पणी करने का कोई इरादा नहीं था। गहलोत ने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल उन राजनीतिक घटनाओं और परिस्थितियों को देश के सामने रखने का प्रयास किया, जिनके कारण उनके बारे में एक विशेष धारणा बनाई जा रही थी।
अशोक गहलोत ने कहा कि पिछले कुछ समय से यह माहौल बनाया जा रहा था कि उन्होंने मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष पद स्वीकार नहीं किया था। उन्होंने कहा कि इस धारणा को लेकर जो भ्रम फैलाया जा रहा था, उसी के संदर्भ में उन्होंने अपनी बात रखी। उनका उद्देश्य केवल तथ्यों को सामने लाना था, ताकि वास्तविक परिस्थितियों को समझा जा सके।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि उनके किसी बयान में कोई तथ्यात्मक त्रुटि है या किसी को उनके कथनों पर आपत्ति है, तो वह सीधे उनसे संवाद कर सकता है। उन्होंने कहा कि वे हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं और किसी भी विषय पर खुलकर चर्चा की जा सकती है। गहलोत ने यह भी कहा कि राजनीतिक घटनाक्रम को समग्रता में समझे बिना उनके बयानों की गलत व्याख्या की जा रही है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप नहीं लगाया है और न ही किसी की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया है। उनका उद्देश्य केवल उन परिस्थितियों को सामने रखना था, जो उस समय की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में तथ्यों और घटनाओं पर खुली चर्चा होना आवश्यक है तथा जनता के सामने वास्तविक स्थिति रखना भी राजनीतिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।
सचिन पायलट द्वारा हाल ही में दिए गए उस बयान पर भी अशोक गहलोत ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें पायलट ने कहा था कि गहलोत उन्हें अपने बेटे की तरह मानते हैं। इस पर गहलोत ने कहा कि सचिन पायलट सही कह रहे हैं। उनका बचपन से परिवार के साथ आना-जाना रहा है और लंबे समय तक सभी लोग साथ मिलकर काम करते रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि व्यक्तिगत संबंधों और राजनीतिक मतभेदों को अलग-अलग नजरिए से देखा जाना चाहिए।
राजस्थान कांग्रेस में पिछले कुछ वर्षों से चली आ रही अंदरूनी राजनीतिक खींचतान के बीच अशोक गहलोत का यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर जहां उन्होंने अपने पुराने बयानों का बचाव किया है, वहीं दूसरी ओर संवाद और चर्चा के लिए खुले रहने की बात कहकर विवाद को शांत करने का संकेत भी दिया है।