



जयपुर। प्रतियोगी परीक्षाओं में ब्लूटूथ डिवाइस के माध्यम से नकल कराने वाले गिरोह के कथित सरगना तुलछाराम कालेर को अदालत से राहत नहीं मिली है। जयपुर महानगर द्वितीय की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-1) अदालत ने उसकी 15 दिन की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपी ने अपने बड़े भाई के गंभीर रूप से बीमार होने और वेंटिलेटर पर भर्ती होने का हवाला देते हुए अदालत से अस्थायी राहत की मांग की थी।
मामले की सुनवाई के दौरान तुलछाराम कालेर की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि आरोपी पिछले लगभग दो वर्षों से जेल में बंद है। उन्होंने कहा कि आरोपी का बड़ा भाई बीकानेर के एक अस्पताल में वेंटिलेटर पर भर्ती है और परिवार में उसकी देखभाल करने वाला कोई अन्य सक्षम व्यक्ति नहीं है। ऐसे में मानवीय आधार पर 15 दिन की अंतरिम जमानत प्रदान की जानी चाहिए।
हालांकि अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। एडीजे विनोद कुमार गुप्ता-द्वितीय ने अपने आदेश में कहा कि मामले की प्रकृति अत्यंत गंभीर है और आरोपी का आपराधिक इतिहास भी न्यायालय के समक्ष है। ऐसे में उसे किसी प्रकार की अंतरिम राहत देना उचित नहीं होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।
गौरतलब है कि ब्लूटूथ के जरिए नकल कराने वाले गिरोह का मामला प्रदेश की चर्चित परीक्षाओं में तकनीकी माध्यमों से की गई कथित धांधली से जुड़ा रहा है। जांच एजेंसियां लंबे समय से इस नेटवर्क से जुड़े विभिन्न आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं। तुलछाराम कालेर को इस गिरोह का प्रमुख संचालक माना जाता है और उसके खिलाफ कई गंभीर आरोपों की जांच चल रही है।